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जिम्नास्ट दीपा कर्मकार ने ‘प्रॉडुनोवा वॉल्ट’ से जीता सबका दिल, आखिर क्यों यह वॉल्ट है 'जानलेवा'...

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जिम्नास्ट दीपा कर्मकार ने ‘प्रॉडुनोवा वॉल्ट’ से जीता सबका दिल, आखिर क्यों यह वॉल्ट है 'जानलेवा'...

भारत की जिम्नास्ट दीपा कर्मकार से पदक की उम्मीदें बढ़ गई हैं (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. आज रात होगा जिम्नास्टिक्स में वॉल्ट फाइनल का मुकाबला
  2. विश्व में दीपा सहित पांच महिलाएं ही इसे सफलतापूर्वक कर पाई हैं
  3. अब देखना यह है कि इसके जरिए दीपा कमाल कर पाती हैं कि नहीं
रियो डी जेनेरियो:

दीपा कर्मकार ने रविवार रात ओलिंपिक वॉल्ट फाइनल में भारतीय उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन वह मामूली अंतर से पदक से चूक गईं. फिर भी उन्होंने अपने पसंदीदा और खतरनाक 'प्रॉडुनोवा वॉल्ट' के साथ अच्छा प्रदर्शन किया. यह वॉल्ट देखने में तो सहज लगता है, लेकिन वास्तव में इसकी कठिनाइयों और जोखिम को समझने वालों के लिए यह 'जानलेवा' और जीवनभर के लिए अपंग बना देने वाला है.

माहिर से माहिर जिम्नास्ट भी इसे करने से कतराती हैं. रियो ओलिंपिक में वॉल्ट फाइनल में पहुंचने के बाद जब जिम्नास्टिक्स के हर फन में माहिर विश्व की महान अमेरिकी जिम्नास्ट सिमोन बाइल्स से वॉल्ट फाइनल में प्रॉडुनोवा करने के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने कहा कि वह मरने नहीं जा रहीं. आखिर वॉल्ट के इस प्रकार में ऐसा क्या है कि इसे कोई भी महिला जिम्नास्ट इतनी आसानी से नहीं अपनाती और इसे जान लेने वाला बताती है...  

आखिर क्यों है इतना खतरनाक
प्रॉडुनोवा वास्तव में महिलाओं की कलात्मक जिम्नास्टिक की वॉल्ट विधा का एक प्रकार है. जटिल तकनीकी शब्दों से इतर सामान्य शब्दों में कहें, तो इसमें महिला जिम्नास्ट को दौड़ लगाते हुए वॉल्ट टेबल पर हाथ रखते हुए हवा में इतने ऊपर तक उछलना (फ्रंट हैंडस्प्रिंग) होता है कि इस दौरान हवा में ही 2 या अधिक समरसॉल्ट (360 डिग्री में हवा में रोटेशन - गुलाटियां मारना, जिसमें हवा में पहुंचने पर घुटनों से थोड़ा नीचे के भाग को दोनों हाथों से पकड़कर रखना होता है और फिर पैरों को सिर के सामने से गुजारते हुए पलटना होता है) लगाने होते हैं और फिर जिम्नास्टिक स्टेज में पैरों पर लैंड करना होता है. सुनने में यह आपको यह बेहद आसान लग रहा होगा, लेकिन इसमें सबसे अहम होता है, जिम्नास्टिक स्टेज पर लैंडिंग, जो बेहद जोखिमभरी होती है और इसमें जरा-सी चूक जीवन पर भारी पड़ सकती है. जानिए कैसे-


वास्तव में जब कोई जिम्नास्ट हाथों के सहारे हवा में उछलती है और यदि वह पर्याप्त ऊंचाई नहीं हासिल कर पाती, तो उसका रोटेशन का सिस्टम गड़बड़ हो सकता है, जिससे वह पैरों की जगह सिर के बल भी जिम्नास्टिक स्टेज पर लैंड कर सकती है. ऐसी स्थिति में उसकी गर्दन टूट सकती है, जिससे जान भी जा सकती है या फिर वह जीवनभर के लिए लकवे का शिकार हो सकती है.

हो चुका है हादसा
प्रॉडुनोवा वॉल्ट को सबसे खतरनाक माना जाता है और इसके कठिनाई का स्तर 7.000 है, जो वॉल्ट में सबसे अधिक है. जब इजिप्ट की 21 साल की जिम्नास्ट फ़द्वा महमूद ने अपने करियर में पहली बार प्रॉडुनोवा किया था, तो वह हादसे का शिकार हो गईं थी, हालांकि उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं लगी और वह बच गईं. दरअसल लैंडिंग के समय वह अपने चेहरे के बल जिम्नास्टिक स्टेज पर गिर गईं, थोड़ी देर के लिए लगा कि उन्होंने अपनी गर्दन तुड़वा ली, लेकिन अंत में सबकुछ ठीक रहा. हालांकि बाद में उन्होंने इसे करने में सफलता हासिल कर ली और ऐसा करनी वाली वर्ल्ड की केवल पांच जिम्नास्ट में एक हैं. इस हादसे के बाद इसे जानलेवा करार देते हुए बैन करने की मांग की जाने लगी.

इतना मुश्किल कि अब तक 5 जिम्नास्ट ही कर पाईं
जिम्नास्टिक्स का सबसे मुश्किल प्रॉडुनोवा वॉल्ट करने के बारे में कम खिलाड़ी ही सोचते हैं. विश्व में दीपा सहित पांच महिलाएं ही सफलतापूर्वक कर पाई हैं. पहली बार 1980 मॉस्को ओलिंपिक्स में चो यॉन्ग सिल ने इसे करने की कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हो पाईं थीं. फिर करीब 20 सालों तक कोई महिला इसे सफलतापूर्वक नहीं कर पाई. इसके बाद रूस की येलेना प्रॉडुनोवा ने इसे कर दिखाया और उन्हीं के नाम पर इसे प्रॉ़डुनोवा कहा जाने लगा. 1999 में येलेना प्रॉडुनोवा और 2012 में डॉमिनिक रिपब्लिक की यामिलेट पिन्या ने इसे सही ढंग से किया. इजिप्ट की फ़द्वा महमूद और उज़बेकिस्तान की ओक्साना चुज़ोवितिना ने भी यह कमाल किया. ऐसे में रियो ओलिंपिक में प्रॉडुनोवा में दीपा का प्रयास उल्लेखनीय रहा. दीपा के शब्दों वह इसे 1000 बार से अधिक कर चुकी हैं.

...जब बुरी तरह डर गए थे दीपा के कोच
ओलिंपिक में 52 साल बाद जिम्नास्टिक्स में पहुंची पहली भारतीय जिम्नास्ट दीपा कर्मकार ने जब पहली बार किसी प्रतियोगिता में इसे किया था, तो उनके कोच बिश्वेश्वर नंदी बुरी तरह डरे हुए थे. उन्होंने ग्लासगो वर्ल्ड चैंपियनशिप, 2015 में  सभी प्रतिभागियों के बीच सबसे कठिन स्तर (7.000) वाला प्रॉडुनोवा वॉल्ट करके सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था. हालांकि वह इसको सफलतापूर्वक पूरा करने में  विफल रहीं, क्योंकि उनका निचला भाग मैट को छू गया था. पिछले दो सालों में दीपा ने प्रॉडुनोवा को कॉमनवेल्थ गोम्स, एशियन चैंपियनशिप, वर्ल्ड चैंपियनशिप और  ओलिंपिक टेस्ट इवेंट में सफलतापूर्वक कर चुकी हैं.

पिछले साल इस ईवेंट के काफी समय बाद दीपा ने कहा था, 'जब मैंने वॉल्ट करना शुरू किया, तो मेरे कोच (बिश्वेश्वर नंदी) डरे हुए थे, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि मैं  या तो अपनी गर्दन तोड़ बैठूंगी या फिर मर जाऊंगी, लेकिन मैं इसे करने को लेकर उतावली थी और कुछ नया कर दिखाना चाहती थी और मैंने इसे करके ही दम लिया.'

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प्रॉडुनोवा वॉल्ट में पारंगत होने के लिए उनके समर्पण को आप इसी बात से समझ सकते हैं कि उन्होंने एक हफ्ते में इसके लिए किए जाने वाले प्रयासों की संख्या को  अपनी डायरी में लिखना शुरू कर दिया था और आपको पता है इसका अंतिम आंकड़ा क्या रहा? 127 वॉल्ट!

उम्मीद करते हैं कि 2020 के ओलिंपिक खेलों में यह भारतीय परी देश का झंडा गाड़कर ही लौटेगी...



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