NDTV Khabar

पहली टेबल-टेनिस लीग: कई ग़लतियों के बावजूद उम्मीद की किरण

भारत में 13 से 30 जुलाई तक चल रहे अल्टीमेट टेबल-टेनिस लीग ने आईपीएल या प्रीमियर बैडमिंटन लीग की तरह शोर तो नहीं मचाया. लेकिन फ़ैन्स को इस लीग में भी टॉप स्तर के टेबल-टेनिस को देखने को मौक़ा ज़रूर मिला.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
पहली टेबल-टेनिस लीग:  कई ग़लतियों के बावजूद उम्मीद की किरण

इस टेनिस टेनिस लीग में शरथ कमल जैसे स्‍टार खिलाड़ी शिरकत कर रहे हैं (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: भारत में 13 से 30 जुलाई तक चल रहे अल्टीमेट टेबल-टेनिस लीग ने आईपीएल या प्रीमियर बैडमिंटन लीग की तरह शोर तो नहीं मचाया. लेकिन फ़ैन्स को इस लीग में भी टॉप स्तर के टेबल-टेनिस को देखने को मौक़ा ज़रूर मिला. भारतीय आयोजक इसे 2024 या 2028 के ओलिंपिक की सीढ़ी के तौर पर भी देखते हैं.  तमिलनाडु के इंजीनियर और शानदार टेबल टेनिस खिलाड़ी जी. साथियन (वर्ल्ड रैंकिंग 110), मधुरिका पाटकर (वर्ल्ड रैंकिंग 190), मनिका बत्रा (वर्ल्ड रैंकिंग 104) और शरथ कमल (वर्ल्ड रैंकिंग 43)....ये भारतीय टेबल टेनिस के चुनिंदा सितारे हैं जिन्होंने भारत की पहली अल्टीमेट टेबल टेनिस लीग (UTT)में धूम मचा रखी है. इनमें से शरथ कमल के अलावा किसी की वर्ल्ड रैंकिंग 100 के अंदर नहीं है. लेकिन अल्‍टीमेट टेबल टेनिस लीग में इन सबने पिछले दिनों दुनिया के टॉप टेबल-टेनिस खिलाड़ियों को शिकस्त दी है. भारत में चल रही तीन हफ़्तों की की ये लीग इन खिलाड़ियों के लिए बेशकीमती प्लेटफ़ॉर्म साबित हो रही है.

2011 जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले जी. साथियन इस लीग को लेकर बेहद उत्साहित हैं. वे हर जीत के बाद मुट्ठियां भींचकर फ़ैन्स का उत्साह बढ़ाते हैं. चेन्नई के गणशेखरन साथियन कहते हैं, "मेरे लिए इस टूर्नामेंट में वर्ल्ड नंबर 8 के ख़िलाफ़ मिली जीत अब तक की सबसे बड़ी जीत है.  मैंने पहली बार टॉप 10 खिलाड़ी को हराया है. ये बहुत बड़ा प्लेटफ़ॉर्म है सबको सामने लाने का. भारत में मेन्स का लेवल बहुत अच्छा है इसलिए इस लीग से सबको फ़ायदा होगा. वहीं 29 साल की महाराष्ट्र की मौजूदा नेशनल चैंपियन मधुरिका पाटकर कहती हैं कि इससे पूरे गेम को फ़ायदा होगा. वे कहती हैं, "भारतीय प्लेयर्स को बहुत फ़ायदा होगा. हमारे लिए अच्छा मौक़ा है वर्ल्ड में टॉप प्लेयर्स के साथ प्रैक्टिस करने का अच्छा मौक़ा मिलता है. अच्छी ट्रेनिंग का मौक़ा मिलता है. लीग के आने से हरेक स्पोर्ट को फ़ाइनेंसियल सपोर्ट मिलता है, गेम में पैसा आएगा तो गेम ग्रो करेगा."

यह भी पढ़ें
राष्ट्रमंडल खेल : शरत-अमलराज को पुरुष युगल टेबल टेनिस में रजत

ये लीग भारतीय खिलाड़ियों के सपने बड़े कर रही है. इस खेल में भारत और ओलिंपिक पोडियम के बीच बड़ा फ़ासला कम करने में ये लीग कैसे मदद कर सकती है. ये पूछे जाने पर इटली से आए भारत के मुख्य टेबल टेनिस कोच कॉन्सटैन्टिनो कहते हैं, "ये अच्छा सवाल है. ओलिंपिक का पदक एक टूर्नामेंट से नहीं आ सकता. आपको सॉलिड बैकग्राउंड बनाने की ज़रूरत होगी. मैंने इस टेबल-टेनिस लीग में देखा है कि टॉप के 10 विदेशी खिलाड़ी भी भारतीय खिलाड़ियों को सम्मान दे रहे हैं चाहे उनकी रैंकिंग 300 के बाहर क्यों ना हो. भारतीय खिलाड़ी उम्दा प्रदर्शन कर रहे हैं."

यह भी पढ़ें
राष्ट्रमंडल टेबल टेनिस : सिंगापुर ने भारत को फाइनल में बुरी तरह हराया

जिस खेल को दुनिया में 220 से ज़्यादा देशों के खिलाड़ी खेलते हैं उसकी लोकप्रियता भारत में बेहद कम है. इसका असर लीग पर भी दिख रहा है. लेकिन  छह फ़्रेंचाइज़ी के बीच चेन्नई, मुंबई और दिल्ली में हो रही इस लीग से फ़्रेंचाइज़ी मालिकों और अधिकारियों को बड़ी उम्मीदे हैं. ऑइलमैक्स-स्टैग योद्धा कंपनी के सह मालिक कपिल गर्ग कहते हैं, "पहली बार हो रहा है.थोड़ी ग़लतियां भी हुई हैं. हम अगली बार इम्प्रूव करेंगे. अगर टीवी व्यूअरशिप की बात करें तो वो काफ़ी बेहतर हुई है. सोशल मीडिया पर अच्छी पब्लिसिटी हुई है. स्टेडियम में भले ही लोग कम आए पहली बैडमिंटन प्रीमियर लीग से ज़्यादा लोग आए हैं."

भारत में इस वक्त क़रीब 6.6 लाख रजिस्टर्ड टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं. इस खेल के अधिकारी अगले तीन साल में इसकी संख्या को 10 लाख तक ले जाना चाहते  हैं. इन्हें उम्मीद है की लीग उसमें मददगार साबित होगी.  योद्धा फ़्रेंचाइज़ी के सह-मालिक कपिल गर्ग कहते हैं, "हमारा मुख्य उद्देश्य तो टेबल टेनिस को ही प्रमोट करना है. भारतीय लड़कियों ने विदेशी लड़कियों को हराना शुरू कर दिया है. भारतीय खिलाड़ियों के लिए ये बहुत अहम लीग है."

बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर ख़ान के टेबल टेनिस के इस विज्ञापन ने इस खेल का प्रचार तो किया, मगर आयोजकों से बैडमिंटन, कुश्ती या क्रिकेट तक की लोकप्रियता के आसपास नहीं ले जा सके. कुल मिलाकर इस वक्त भारतीय खिलाड़ियों से ओलिंपिक में पदकों की उम्मीद करना ज़्यादती हो सकती है. लेकिन अधिकारियों और खिलाड़ियों की ठोस योजना की वजह से इसके सहारे आने वाले दस-बारह साल में पदकों की उम्मीद की जा सकती है. ये लीग उस दिशा में अहम रोल अदा कर सकती है.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement