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खेलों को स्कूली पाठ्यक्रम का अनिवार्य अंग बनाएगी सरकार

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नई दिल्ली:

सरकार खेलों को स्कूली पाठयक्रम का अनिवार्य अंग बनाकर ‘राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज कार्यक्रम’ शुरू करेगी।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को केन्द्रीय कक्ष में संबोधित करते हुए कहा, खेलों को स्कूली पाठ्यक्रम का अनिवार्य अंग बनाकर तथा शैक्षिक प्रोत्साहन प्रदान करके खेलों को लोकप्रिय बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ‘राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज कार्यक्रम’ की शुरुआत करेगी। भारतय खेलों के विकास और संवर्धन को सुसाध्य बनाएगी, जिसमें ग्रामीण खेलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि देश के बच्चों और युवाओं को मनोरंजन के लिए ऐसे अवसरों की आवश्यकता है, जो उनका रचनात्मक विकास करे और उन्हें चुस्त रख सके।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व की प्राचीनतम सभ्यता है। आज यह विश्व का ऐसा देश भी है, जिसमें युवाओं की जनसंख्या सर्वाधिक है। हमें ‘आबादी के लाभांश’ का फायदा उठा सकने के लिए अपने युवाओं को सही शिक्षा, कौशल और अवसरों से सुसज्जित करना होगा।

मुखर्जी ने कहा कि सरकार केवल ‘युवा विकास’ की संकल्पना की बजाय ‘युवा संचालित’ विकास व्यवस्था प्रदान करेगी।

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