राष्ट्रीय हित में काम नहीं कर रहा है हॉकी प्रबंधन : राजपाल

खास बातें

  • पूर्व भारतीय कप्तान ने बातचीत में कहा, ‘देश में हॉकी के लिए कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। हॉकी प्रबंधन राष्ट्रीयहित में कोई काम नहीं कर रहा है और इसका नकारात्मक असर खेल पर देखने को मिल रहा है।’
जालंधर:

राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रह चुके राजपाल सिंह ने देश के हॉकी प्रबंधन पर राष्ट्रीयहित में काम नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक टीम में स्थिरता नहीं होगी तब तक हॉकी की दुर्दशा जारी रहेगी और लाख कोशिशों के बावजूद हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा नहीं कर सकते।

हॉकी पंजाब की ओर से आयोजित पंजाब एकादश और भारत के बीच प्रदर्शनी मैच खेलने पहुंचे पूर्व भारतीय कप्तान ने बातचीत में कहा, ‘‘देश में हॉकी के लिए कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। हॉकी प्रबंधन राष्ट्रीयहित में कोई काम नहीं कर रहा है और इसका नकारात्मक असर खेल पर देखने को मिल रहा है।’’

पंजाब एकादश की कप्तानी कर रहे राजपाल ने कहा, ‘‘अगर सब कुछ ऐसे ही चलता रहा और व्यक्तिगत हितों को साधने की कोशिश जारी रही तो भारत में हॉकी की दुर्दशा भी जारी रहेगी। हम लाख कोशिश कर लें, अपनी पुरानी फॉर्म में नहीं आ सकते क्योंकि यहां खेल को कैसे उन्नत किया जाए, इसे छोड़कर हर काम हो रहा है।’’

यह पूछने पर कि आप इसके लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं, राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने वाले राजपाल ने कहा, ‘‘मैं किसी व्यक्ति विशेष की बात नहीं कर रहा हूं। मैं पूरे हॉकी प्रबंधन की बात कर रहा हूं जो देश हित में या हॉकी के हित की अनदेखी कर रहे हैं। इसका असर खेल पर हो रहा है।’’

एशियाई खेलों में कांस्य पदक विजेता टीम की कप्तानी कर चुके राजपाल ने कहा, ‘‘टीम में स्थिरता का अभाव है। बेहतर से बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को टीम में जगह पक्की नजर नहीं आती। इसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ता है। एक टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन वाले खिलाड़ी को अगले टूर्नामेंट के लिए टीम में नहीं चुना जाता है।’’

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘मैं कप्तान था, टीम को एशियाई खेलों में कांस्य पदक मिला। मैंने कप्तान के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद जब टीम सुल्तान अजलान शाह टूर्नामेंट खेलने गई तो मुझे नहीं चुना गया। ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो बेहतर प्रदर्शन करते हैं और उन्हें नहीं चुना जाता इसलिए यह जरूरी है कि टीम में स्थिरता हो।’’

राजपाल ने कहा, ‘‘विश्व सीरिज हॉकी में अच्छे अच्छे खिलाड़ी खेल रहे हैं लेकिन हॉकी प्रबंधन या टीम के चयनकर्ता उन खिलाड़ियों को ‘राजनीति’ की वजह से राष्ट्रीय टीम नहीं चुनते, इस ‘राजनीति’ का असर खेल पर होता है। इसका परिणाम ओलिंपिक में हमारा शर्मनाक प्रदर्शन आपके सामने है।’’

हॉकी के खेल में आई गिरावट के लिए वह बार बार कप्तानों का बदला जाना भी मानते हैं। राजपाल का कहना है, ‘‘न तो कप्तान को पता होता है और न ही खिलाड़ियों को कि अगले टूर्नामेंट में वे चुने जाएंगे या नहीं। इससे उनका प्रदर्शन प्रभावित होता है। पिछले छह साल में आप नजर डालेंगे तो पता चलेगा कि सात से अधिक बार कप्तान बदले जा चुके हैं।’’

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जब यह पूछा गया कि माइकल नोब्स और उनके पहले के कोच के साथ आप काम कर चुके हैं, दोनों में से किस कोच का प्रदर्शन बढ़िया है तो राजपाल ने हंसते हुए कहा, ‘‘मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा। हां, इससे आश्चर्य जरूर होता है कि जिस कोच ने राष्ट्रमंडल खेलों में टीम को पदक जीतने लायक बना दिया, उसका कार्यकाल समाप्त कर दिया गया और जिसने ओलिंपिक में शर्मनाक प्रदर्शन करवाया उसका कार्यकाल बढ़ा दिया गया है।’’

पूर्व कप्तान ने कहा कि चाहे जहां से कोच ले आइए, हॉकी प्रबंधन जब तक व्यक्तिगत हितों से नहीं हटेगा तब तक देश में इस खेल का भला नहीं होने वाला।