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..जब गोपीचंद को बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए गिरवी रखना पड़ा था अपना घर

गोपीचंद ने बैडमिंटन खिलाड़ी और कोच के रूप में भारत को कई सफलताएं दिलाई हैं.

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..जब गोपीचंद को बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए गिरवी रखना पड़ा था अपना घर

गोपीचंद खिलाड़ी के रूप में ऑल इंग्‍लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीत चुके हैं (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. गाचीबावली के स्टेडियम में शुरू की थी गोपी ने कोचिंग
  2. कहा, खिलाड़ि‍यों की जीत से बड़ी खुशी मेरे लिए कुछ नहीं
  3. साबित करना चाहता था, भारतीय खिलाड़ी भी विश्‍वस्‍तरीय हैं
नई दिल्ली: पुलेला गोपीचंद ने बैडमिंटन खिलाड़ी और कोच के रूप में भारत को कई सफलताएं दिलाई हैं. खिलाड़ी के रूप में बैडमिंटन छोड़ने के बाद गोपी कोच के रूप में इस खेल से जुड़े और विश्‍व स्‍तरीय खिलाड़ि‍यों की पूरी 'फौज' तैयार कर डाली.  उनकी अकादमी में प्रशिक्षण लेने वाले साइना नेहवाल, पीवी सिंधु, किदांबी श्रीकांत जैसे बैडमिंटन खिलाड़ी शामिल हैं. हालांकि कोचिंग का यह सफर गोपीचंद के लिए कठिनाइयों से भरा रहा है. एक समय ऐसा भी था जब इन खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के लिए गोपीचंद को अपना घर तक गिरवी रखना पड़ा था. गोपीचंद ने कहा कि इन खिलाड़ियों की जीत से मिलने वाली खुशी उन्हें कहीं ओर से नहीं मिल सकती.

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ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैम्पियन गोपीचंद ने 2003 में गाचीबावली के सरकारी स्टेडियम में कोचिंग शुरू की थी. उस समय उनके पास फंड बिल्कुल भी नहीं था. उस दौरान, परुपल्ली कश्यप, सिंधु, साइना, बी सुमित रेड्डी, एन सिक्की रेड्डी, गुरुसाई दत्त, बी. साई प्रणीत जूनियर खिलाड़ी थे. गोपीचंद ने कहा, "मैं यह नहीं कहूंगा कि मैंने जो किया इन बच्चों के लिए किया. मैंने यह स्वयं के लिए भी किया. कोचिंग के शुरुआती दौर में इनकी जीत से जो सुख मुझे मिलता था, वह शानदार था. मैं यह हमेशा से सुनते हुए आया था कि भारतीय खिलाड़ी अच्छे नहीं है और भारतीय अच्छे बैडमिंटन खिलाड़ी नहीं बन सकते. मेरे लिए इस कथन को गलत साबित करना ही सबसे बड़ी चुनौती थी."

वीडियो: बैडमिंटन के बारे में यह बोले पुलेला गोपीचंद
कोच गोपीचंद ने कहा, "मेरे लिए जीतना और इन बच्चों के लिए बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतना बेहद महत्वपूर्ण था. मैं आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो उन सभी चीजों को देखकर हैरान हो जाता हूं, जो मैंने इनके लिए की थी. मैंने जो किया वह अविश्वसनीय था. मैं पांच से छह घंटे तक अभ्यास करता था और उसके बाद फंड के लिए कार्पोरेट हाउसों के चक्कर काटता था, जहां से मुझे न ही मिलती थी. मैं फिर शाम को कोचिंग के लिए अकादमी पहुंच जाता था. मुझे नहीं पता कि मेरी अपनी जेब से कितना पैसा गया है, लेकिन जो सुख मुझे इनकी जीत से मिलता था, वो किसी ओर चीज से नहीं मिलता था." गोपीचंद ने कहा कि इन खिलाड़ियों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के रूप में देखने की खुशी हासिल करने के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया है. उनके लिए यह खिलाड़ी उनकी दुनिया बन गए थे और इन खिलाड़ियों की जीत से गोपीचंद को सुकून मिलता था. (इनपुट: आईएएनएस)


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