यह ख़बर 30 अगस्त, 2012 को प्रकाशित हुई थी

आईएचएफ ने आईओए की तीन सदस्यीय समिति को नकारा

आईएचएफ ने आईओए की तीन सदस्यीय समिति को नकारा

खास बातें

  • भारतीय हॉकी महासंघ (आईएचएफ) ने गुरुवार को देश में हॉकी के संचालन को लेकर फैसला करने के लिए भारतीय ओलिम्पिक संघ (आईओए) द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति को नकार दिया है।
नई दिल्ली:

भारतीय हॉकी महासंघ (आईएचएफ) ने गुरुवार को देश में हॉकी के संचालन को लेकर फैसला करने के लिए भारतीय ओलिम्पिक संघ (आईओए) द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति को नकार दिया है।

इस तीन सदस्यीय समिति की बैठक गुरुवार को ही होनी थी लेकिन आईएचएफ ने इसके अस्तित्व को मानने से इनकार कर दिया। आईएचएफ की दलील है कि इस समिति के सदस्य उस वक्त आईओए के सदस्य थे, जब आईएचएफ को 2008 में निलम्बित किया था, लिहाजा वह यह मानकर नहीं चल सकता कि यह समिति न्यायोचित फैसला करेगी।  

आईएचएफ प्रमुख आरके शेट्टी और सलाहकार केपीएस गिल ने भी इस सम्बंध में विश्व हॉकी महासंघ (एफआईएच) को चेतावनी दी है। आईएचएफ का कहना है कि एफआईएच भारतीय हॉकी के मामलों में जरूरत से अधिक दखलअंदाजी न करे।

आईएचएफ के पूर्व प्रमुख गिल ने कहा कि तीन सदस्यीय समिति में शामिल भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष जीएस मंघेर न्यायोचित फैसला नहीं कर सकते। इस समिति में भारोत्तोलन महासंघ के बीरेंद्र प्रसाद वैश्य और हैंडबॉल महासंघ के महासचिव एसएम बाली को भी शामिल किया गया है।

आईएचएफ ने कहा कि एफआईएच को भारतीय हॉकी के मामले में दखल नहीं देना चाहिए और देश में काम कर रहे दो हॉकी महासंघों को आपसी तालमेल के जरिये किसी रास्ते पर पहुंचने देना चाहिए।

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गिल की दलील है कि आईओए ने आईएचएफ को इसलिए निलम्बित किया क्योंकि उसका अपना एजेंडा था। बकौल गिल, "आईओए के तत्कालीन प्रमुख सुरेश कलमाडी आईएचएफ प्रमुख बनना चाहते थे। कलमाडी ने हमसे कहा होता। उन्हें सभ्य इंसान की तरह बर्ताव करना चाहिए था।"