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भारतीय जिमनास्टिक्स बेंच बनने लगी मज़बूत...

दिल्ली में पिछले क़रीब महीने भर से चल रहे जिमनास्टिक के कैंप में ये खिलाड़ी मॉन्ट्रियल में होने वाले वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे हैं.

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भारतीय जिमनास्टिक्स बेंच बनने लगी मज़बूत...
नई दिल्‍ली: भारतीय जिमनास्टिक्स टीम इन दिनों अक्टूबर में कनाडा में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी है. दीपा कर्माकर इंजरी से रिकवरी के दौर में हैं और एशियन गेम्स के मेडल विजेता आशीष कुमार वापसी के लिए ज़ोर लगा रहे हैं. ऐसे में युवा जिमनास्ट की बेंच दिग्गजों की कमी को पूरा करने का दम दिखा रही है और उन्हें लेकर बड़ी उम्मीद भी की जाने लगी है.

दिल्ली में पिछले क़रीब महीने भर से चल रहे जिमनास्टिक के कैंप में ये खिलाड़ी मॉन्ट्रियल में होने वाले वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे हैं. रियो ओलिंपिक्स में धमाका करने वाली दीपा कर्माकर को मलाल ये है कि वो घुटने की सर्जरी की वजह से तबतक पूरी तरह फ़िट नहीं हो पाएंगी. कश्मीर में रहने वाले दीपा के फ़िज़ियोथेरपिस्ट साजिद को भरोसा है कि दीपा सितंबर तक पूरी तरह ठीक हो जाएंगी. साजिद कहते हैं, "दीपा पहले से ज़्यादा फ़िट होकर वापसी करेंगी. ऐसी मिसाल हमने रियो ओलिंपिक्स में भी देखी है. आप देखना वो कुछ और बेहतर नतीजे देंगी."

एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले इकलौते भारतीय जिमनास्ट आशीष अपने फ़्लोर ऑर वॉल्टिंग एक्सरसाइज़ को पुख़्ता करने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं. उन्हें लगता है कि उनकी लैंडिंग ठीक हुई तो एशियाई और कॉमनवेल्थ खेलों में पदक उनसे दूर नहीं रह सकते. दीपा और आशीष के अलावा अरुणा रेड्डी, रोमन रिंग के मास्टर और पुरी के रहने वाले राकेश पात्रा जैसे जिमनास्ट ने हाल के दिनों में जिमनास्टिक सर्किट में अपना नाम ऊंचा किया है. जानकार इन्हें भारतीय जिमनास्टिक्स के भविष्य के तौर पर देखते हैं.

दीपा कर्माकर कहती हैं, "मैं वर्ल्ड चैंपियनशिप में नहीं जा पाऊंगी इसे लेकर थोड़ा दुख तो है. लेकिन इस खेल में आप इंजरी के बारे में कुछ नहीं कह सकते. लेकिन अरुणा रेड्डी, प्रणिता नायक, राकेश और आशीष अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. अगर ऐसे ही अच्छा प्रदर्शन करते रहे तो कॉमनवेल्थ या एशियन गेम्स में चार-पांच मेडल जीत सकते हैं."

कोच बीएस नंदी कहते हैं कि पहले की तुलना में अब टीम में कई क्वालिटी जिमनास्ट आ गए हैं. वो कहते हैं कि इस खेल के प्रति लोगों का नज़रिया बदला है और लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ी है. वो बताते हैं कि इन युवा जिमनास्ट ने हाल ही में एशियाई चैंपियनशिप के तीन इवेंट्स में फ़ाइनल में जगह बनाई, इसलिए ये आगे पदकों के दावेदार बन सकते हैं. बीएस नंदी कहते हैं, "भारतीय खेल प्राधिकरण ने इस खेल में सुविधा दिलाने के लिए काफ़ी मेहनत की है. एक-एक पहलू का ख्‍याल रखा जा रहा है. इस खेल में मेडल को लेकर आप यकीन के तौर पर कभी कुछ नहीं कह सकते. लेकिन अगर सब ठीक रहा तो आप जल्दी ही अच्छे नतीजे की उम्मीद कर सकते हैं."

ज़ाहिर है युवा खिलाड़ियों के सपने बड़े हो गए हैं और वो इस खेल को रियो के नतीजे और शोहरत से आगे देखने लगे हैं. दीपा और आशीष की कामयाबी से भारतीय बेंच मज़बूत भी हुई है. इतना ज़रूर है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को अब दीपा या आशीष के साये से आगे निकलकर नई पहचान बनाने की ज़रूरत होगी.


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