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ओलिंपिक में भारत की महिला 'शक्ति' : 4 ब्रॉन्ज के बाद अब पीवी सिंधु ने दिलाया सिल्वर, गोल्ड की आस अधूरी

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ओलिंपिक में भारत की महिला 'शक्ति' : 4 ब्रॉन्ज के बाद अब पीवी सिंधु ने दिलाया सिल्वर, गोल्ड की आस अधूरी

पीवी सिंधु रियो ओलिंपिक में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल हासिल करने के बाद (फोटो: AFP)

खास बातें

  1. यदि पीवी सिंधु आज जीतीं तो स्वर्णिम इतिहास रच जाएगा
  2. पहले सभी भारतीय महिलाएं ओलिंपिक में मेडल ब्रॉन्ज जीती हैं
  3. व्यक्तिगत स्पर्धा में हमें केवल अभिनव बिंद्रा ने एक ही गोल्ड दिलाया है
रियो डि जनेरियो:

भारत की बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु ने रियो ओलिंपिक में सिल्वर जीतकर इतिहास रच दिया. हालांकि वह गोल्ड नहीं जीत पाईं. इससे भारत को झटका लगा. फिर भी उन्होंने सिल्वर जीतने वाली पहली भारतीय होने का रिकॉर्ड बना दिया, क्योंकि इससे पहले जितनी भी भारतीय महिलाएं ओलिंपिक में मेडल जीती हैं, उनको ब्रॉन्ज से ही संतोष करना पड़ा था. महिलाओं ने हमें अब तक 4 ब्रॉन्ज और एक सिल्वर (सिंधु का मेडल) दिलाया है... महिला और पुरुष खिलाड़ियों की बात करें, तो व्यक्तिगत स्पर्धा में हमें केवल एक ही गोल्ड मिला है. हां हॉकी में जरूर हमने 8 गोल्ड जीते थे, जो अब बहुत पुरानी बात हो गई है.
 
सिंधु नहीं पहुंच पाईं 'बिंद्रा के क्लब' में
भारत की नई बैडमिंटन सनसनी पीवी सिंधु गोल्ड जीतने में विफल रहीं. इसके साथ ही वह शूटर अभिनव बिंद्रा के गोल्डन क्लब में शामिल होने से रह गईं. बिंद्रा ने बीजिंग ओलिंपिक, 2008 में गोल्ड जीता था और वह व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाले इकलौते भारतीय है.

आइए बात करते हैं सिंधु के अलावा ओलिंपिक में झंडे गाड़ने वाली भारतीय महिलाओं की...


कर्णम मल्लेश्वरी : ...और हाथ से निकल गया गोल्ड
श्रीकाकुलम, आंध्रप्रदेश की रहने वाली इस वेटलिफ्टर ने देश को पहली बार महिलाओं की 69 किग्रा भार वर्ग की स्पर्धा में ओलिंपिक मेडल दिलाया था. सिडनी ओलिंपिक, 2000 में उन्होंने ब्रॉन्ज जीतकर इतिहास रचा था. मल्लेशवरी ने गोल्ड के लिए अपनी सारी ताकत लगा दी थी. उस दिन उन्होंने कुल 240 किलो वजन उठाया था, जिसमें स्नैच में अधिकतम 110 और क्लीन-जर्क में 130 किलो शामिल था.
 


गौर कीजिए उन्होंने हर बार खुद के वजन से लगभग दोगुना भार उठाया. कुछ इंटरव्यू में उन्होंने यह भी बताया है कि उनके हाथ से कैसे गोल्ड मेडल फिसल गया. दरअसल उनके कोच ने अंत में उनसे 137 किलो वजन उठाने के लिए कहा था, जबकि मल्लेश्वरी का मानना था कि 127 किग्रा उचित रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि 132 तक का भार उठाने पर भी वह अन्य प्रतिभागियों की बराबरी पर आ जातीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कोच की बात मानी और 137 किग्रा उठाने में विफल रहीं और गोल्ड तो क्या सिल्वर भी जाता रहा... ब्रॉन्ज से ही संतोष करना पड़ा... उनका यह भी कहना है कि उन्होंने भारत में ऐसा कई बार किया था और उनके कोच उनसे ओलिंपिक रिकॉर्ड बनता हुआ देखना चाहते थे, लेकिन उस दिन भाग्य ने साथ नहीं दिया.

कर्णम मल्लेश्वरी ने 54 किग्रा वर्ग में 1994 और 1995 में वर्ल्ड टाइटल भी जीता था. मल्लेश्वरी ने 2004 के ओलिंपिक गेम्स में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने का कारण वेटलिफ्टिंग से संन्यास ले लिया. मल्लेश्वरी को उनकी उपलब्धियों के लिए भारतीय खेल जगत का सर्वोच्च सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न, 1995 भी मिल चुका है.

मैरीकॉम : मुक्के से निकला 'ब्रॉन्ज'
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जो महिला तीन बच्चों को जन्म दे चुकी हो, उसके मुक्के इतने शक्तिशाली हैं कि आज भी मेडल दिला सकते हैं. एमसी मैरीकॉम की यही तो खासियत है... उनके जज्बे का कोई सानी नहीं है... उन्होंने 4 साल पहले लंदन ओलिंपिक, 2012 में ब्रॉन्ज मेडल जीतते हुए देश का नाम रोशन किया था. हालांकि रियो ओलिंपिक के लिए वह क्वालिफाई नहीं कर पाईं थीं और वर्ल्ड चैंपियनशिप के दूसरे राउंड में हार गई थीं. पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन इस महिला मुक्केबाज ने दो साल पहले ही एशियन गेम्स, 2014 में गोल्ड मेडल जीता था. 33 साल की उम्र में भी बॉक्सिंग रिंग के अंदर मैरीकॉम की फिटनेस और तेजी देखने लायक होती है.
 

लंदन ओलिंपिक में महिला बक्सिंग को पहली बार शामिल किया गया था. मैरीकॉम ने देश के लिए गोल्ड लाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन सेमीफाइनल में यूके की निकोला एडम्स से हार जाने के कारण उन्हें ब्रॉन्ज ही मिल पाया. मैरीकॉम की उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2009 का खेल रत्न पुरस्कार दिया था. उनके जीवन पर बॉलीवुड में फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें उनका किरदार प्रियंका चोपड़ा ने निभाया था.

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साइना नेहवाल : बैडमिंटन में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला
रियो ओलिंपिक में चोट के कारण देश का सपना पूरा करने में असमर्थ रहीं साइना नेहवाल ने मैरीकॉम की तरह ही लंदन ओलिंपिक, 2012 में ब्रॉन्ज जीता था और ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बै़टमिंटन खिलाड़ी होने का गौरव हासिल किया था. ओलिंपिक 2012 में ब्रॉन्ज के लिए साइना का मैच चीनी खिलाड़ी और उस समय की वर्ल्ड नंबर 2 जिंग वैंग से था. वैंग के घायल होने की वजह से साइना को विजयी घोषित किया गया था.
 


अब उनकी साथी खिलाड़ी पीवी सिंधु उनसे भी एक कदम आगे निकल गई हैं और सिल्वर मेडल पक्का करके नया इतिहास रच दिया है. मूलतः हिसार, हरियाणा की रहने वाली साइना ने इसी साल ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीता है. साइना बीजिंग ओलिंपिक 2008 में भी क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं. साइना अब तक तीन बार इंडोनेशिया ओपन टूर्नामेंट (2009, 2010 और 2012) जीत चुकी हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स 2008, 2010 में गोल्ड अपने नाम किया था. उनको भारत सरकार पद्म श्री, पद्म भूषण और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है.

साक्षी मलिक : रियो में देश की पहली पदकवीर
रियो ओलिंपिक में देश की पहली पदकवीर हरियाणा की इस पहलवान ने महिला वर्ग में नया कीर्तिमान रच दिया है. उनकी किस्मत ने भी साथ दिया और उन्हें रेपेचेज राउंड में मौका मिल गया. यहां भी वह मैच के पहले पीरियड में 0-5 से पिछड़ गई थीं.
 


तीसरे और अंतिम मिनट का खेल खत्‍म होने में जब चंद सेकंड ही बचे थे तो साक्षी ने अपने विरोधी का पैर पकड़कर गिरा दिया और इस तरह दो और प्‍वाइंट हासिल कर मैच पर अपराजेय बढ़त हासिल की और उनके पक्ष में स्‍कोर 7-5 हो गया. साक्षी ने इससे पहले 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर जीता था. साक्षी ने 2002 में अपने कोच ईश्वर दहिया के साथ पहलवानी शुरू की थी.


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