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शादी के बाद मेरी पहली जीत, लेकिन टीम की ऐतिहासिक जीत मेरे लिए बड़ी बात : अभिषेक वर्मा

कंपाउंड तीरंदाज़ी में भारत के एशियन गेम्स चैंपियन और वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल विजेता अभिषेक वर्मा एक वर्ल्ड क्लास तीरंदाज़ माने जाते हैं. वो पहले भी वर्ल्ड कप में मेडल जीतते रहे हैं. लेकिन कंपाउंड टीम का गोल्ड जीतकर वो बेहद खुश हैं.

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शादी के बाद मेरी पहली जीत, लेकिन टीम की ऐतिहासिक जीत मेरे लिए बड़ी बात : अभिषेक वर्मा
नई दिल्ली: कंपाउंड तीरंदाज़ी में भारत के एशियन गेम्स चैंपियन और वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल विजेता अभिषेक वर्मा एक वर्ल्ड क्लास तीरंदाज़ माने जाते हैं. वो पहले भी वर्ल्ड कप में मेडल जीतते रहे हैं. लेकिन कंपाउंड टीम का गोल्ड जीतकर वो बेहद खुश हैं. शंघाई से NDTV से ख़ास बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि इस जीत के बाद उन्हें बेहद खुशी इसलिए हो रही है कि टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीता है और ये भारत के बेहतर भविष्य का संकेत है.

सवाल: कंपाउंड तीरंदाज़ी में टीम का गोल्ड जीतना कितनी बड़ी बात है?
अभिषेक वर्मा: टीम ने पहली बार गोल्ड जीतकर इतिहास कायम किया है यही हमारे लिए बड़ी बात है. जीत के बाद मैंने अपनी पत्नी (सोनाली वर्मा) से बात की तो उन्होंने बताया कि शादी के बाद ये मेरा पहला गोल्ड है. मैं वाकई बहुत खुश हूं. मैंने ऐसे सोचा नहीं था. लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि हमारी टीम ने गोल्ड जीता है. हमारी टीम को इस साल आप और अच्छा प्रदर्शन करते देख सकते हैं.

सवाल: फ़ाइनल तक का सफ़र कैसा रहा, ख़ासकर अमेरिका जैसी टीम को हराना कितनी बड़ी बात है?
अभिषेक वर्मा: हमारे लिए ये बहुत बड़ी कामयाबी है. अमेरिकी टीम साल में चार में से तीन बार गोल्ड जीतने का दम रखती है. अमेरिका में ही कंपाउंड तीरंदाज़ी के सारे टॉप क्लास इक्विपमेंट बनते हैं. जैसे रिकर्व तीरंदाज़ी (ओलिंपिक्स की तीरंदाज़ी) में दक्षिण कोरियाई टीम का स्थान है. वैसे ही कंपाउंड में अमेरिका का नंबर आता है. हमने अमेरिका को (232-230),ईरान को (232-230) और कोलंबिया को 226-221 के स्कोर से हराया. इस टूर्नामेंट से कंपाउंड में भारत का कद बढ़ा.

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सवाल: इस टूर्नामेट में आपके साथ युवा खिलाड़ी भी थे, कितना अलग था जीत का सफ़र?
अभिषेक वर्मा: टीम में युवा (अमनजीत सिंह) और अनुभवी खिलाड़ी (चिन्नाराजू श्रीधर और अभिषेक वर्मा) दोनों थे. हम पर ज़िम्मेदारी थी कि टीम का संयम बनाए रखें. इसलिए मैंने फ़ाइनल से पहले टीम का ध्यान गेम से अलग भटकाए रखा. इसके लिए फ़ोन पर गेम, लुडो और चेस भी खेली. अमनजीत ने भी अच्छा शूट किया. टीम में अच्छा तालमेल बन गया.

सवाल: आगे क्या चुनौती है, आगे आपसे उम्मीदें बनीं रहेंगी...
अभिषेक वर्मा: इस साल और अगले साल कई बड़े टूर्नामेट हैं. हमारी टीम की शुरुआत अच्छी रही है. इसी साल अक्टूबर में मेक्सिको में वर्ल्ड चैंपियनशिप है, पोलैंड में वर्ल्ड गेम्स है जिसके लिए मैंने अकेले क्वालिफ़ाई किया है. अगले साल एशियन गेम्स भी है. इसलिए कई बड़े मैच हैं और हमारी तैयारी को कंसिसटेंट रखने की ज़रूरत है. हम भी अपनी टीम से बड़ी उम्मीद लगा रहे हैं.


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