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जम्मू और कश्मीर में हिंसा पर भारी पड़ा खेल, प्रदेश को मिली पहली राज्य-प्रायोजित फुटबॉल अकादमी

कश्मीर की घाटी हमेशा से ही गलत कारणों की वजह से सुर्ख़ियों में रहती है. जहाँ एक तरफ घाटी के युवा सड़कों पर हिंसक विरोध मार्च निकालने में ज़रा भी नहीं हिचकते ऐसे में जम्मू और कश्मीर की 'स्टेट स्पोर्ट्स कॉउंसिल' की खेल को बढ़ावा देने के ये मुहिम प्रदेश के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

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जम्मू और कश्मीर में हिंसा पर भारी पड़ा खेल, प्रदेश को मिली पहली राज्य-प्रायोजित फुटबॉल अकादमी

ये फुटबॉल अकादमी राजधानी श्रीनगर में स्थापित की गयी है

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श्रीनगर: देश का सबसे उत्तरी राज्य जम्मू और कश्मीर हिंसा की आग में झुलस रहा है. स्तिथि बेहद तनावपूर्ण है जिसका प्रमाण है घाटी में रोज़ाना हो रहीं अनेक हिंसक घटनाएं. लेकिन इस चिंताजनक परिस्तिथि में कुछ ऐसा भी हो रहा है जिससे कश्मीर के युवाओं को सही दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरणा मिलेगी. खेल मंत्री इमरान अंसारी की अगुवाई में जम्मू और कश्मीर को प्रदेश की पहली राज्य-प्रायोजित फुटबॉल अकादमी मिल गयी है जिससे राज्य में खेल को बढ़ावा मिलेगा.

ये अकादमी राजधानी श्रीनगर में स्थापित की गयी है जिसमे 100 कश्मीरी लड़के, जिनकी आयु 13 से 18 वर्ष के बीच है, पेशेवर फुटबॉलर्स से ट्रेनिंग लेंगे. कोचिंग टीम के मुखिया होंगे राष्ट्रीय टीम के स्टार फुटबॉलर मेहराजुद्दीन वाडू, जिनकी देख रेख में युवा खिलाड़ी फुटबॉल के गुर सीखेंगे. ये 100 खिलाड़ी छह दिन के कड़े ट्रायल के बाद चुने गए हैं. इस ट्रायल में प्रदेश भर के करीब 1000 युवाओं ने हिस्सा लिया था. इतनी भारी तादाद में आये इन खिलाड़ियों की ये संख्या दर्शाती है की घाटी के युवाओं को बस सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है. मुख्य ट्रेनर मेहराजुद्दीन वाडू ने इस मौके पर कहा की महत्वपूर्ण बात ये है की हम कितनी खूबी से युवाओं को ट्रेनिंग देकर तैयार करते हैं. हमारे पास बढ़िया कोच और फिटनेस ट्रेनर मौजूद हैं.
 
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कश्मीर की घाटी हमेशा से ही गलत कारणों की वजह से सुर्ख़ियों में रहती है. जहाँ एक तरफ घाटी के युवा सड़कों पर हिंसक विरोध मार्च निकालने में ज़रा भी नहीं हिचकते ऐसे में जम्मू और कश्मीर की 'स्टेट स्पोर्ट्स कॉउंसिल' की खेल को बढ़ावा देने के ये मुहिम प्रदेश के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. खेल मंत्री इमरान अंसारी ने कहा की "कश्मीर में कुछ ऐसी ताकतें हैं लोगों के चेहरे पर हंसी नहीं देखना चाहते, उन्होंने लोगों को चेहरे से मुस्कान छीन ली है. हालाँकि हम इस बात पर अपनी पीठ नहीं थपथपा सकते की हम बदलाव ले आये हैं लेकिन हाँ ये उस दिशा में एक छोटी और अच्छी शुरुआत है." कुछ ही दिन पहले अंसारी के नेतृत्व में जम्मू और कश्मीर सरकार ने घाटी में खेल को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया था जब सरकार ने राज्य भर के तमाम गाँवों में फुटबॉल क्लबों की स्थापना के लिये 50-50 लाख रूपये देने की घोषणा करी थी.
 
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कश्मीर की धरती परंपरागत रूप से फुटबॉल के लिए काफी उर्वर रही है. राज्य के कई फुटबॉलर्स देश के लिए भी खेल चुके हैं. ऐसे में इस अकादमी के ज़रिये घाटी के प्रतिभावान युवाओं के पास अपनी कला को प्रदर्शित करने का और उसे सुधारने का सुनहरा अवसर है ताकि एक दिन वो भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधत्व कर सकें. संघर्ष क्षेत्र में होने की वजह से कश्मीरी बच्चों को बहुत मुश्किलों के बीच रहना पड़ता है. हिंसा के बीच बीतने वाला उनका बचपन पढ़ाई से भी दूर हो जाता है. ऐसे में युवाओं के सामने खेल के रूप में एक ऐसा विकल्प है जिससे वो सही दिशा में बढ़कर नई ऊंचाइयां छू सकते है.


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