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लिएंडर पेस के 27 साल के डेविस कप के सफर का 'ब्रेक प्‍वाइंट', कप्‍तान महेश भूपति ने टीम से बाहर किया

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लिएंडर पेस के 27 साल के डेविस कप के सफर का 'ब्रेक प्‍वाइंट', कप्‍तान महेश भूपति ने टीम से बाहर किया

लिएंडर पेस और महेश भूपति की डबल्‍स जोड़ी को एक समय दुनिया में शीर्ष वरीयता हासिल थी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. ओलिंपिक खेलों में ब्रॉन्‍ज मेडल जीत चुके हैं लिएंडर पेस
  2. डेविस कप में अब तब डबल्‍स के 42 मुकाबले जीत चुके हैं
  3. महेश भूपति के साथ एक समय कई डबल्‍स खिताब जीते थे
बेंगलुरू: देश के दिग्‍गज टेनिस खिलाड़ी और ओलिंपिक के कांस्‍य पदक धारी लिएंडर पेस के डेविस कप के सफर पर 'कड़वाहट से भरा' विराम लग गया है.  लिएंडर को 27 साल में पहली बार भारत की डेविस कप टीम से स्‍थान नहीं दिया गया है. इस तरह पेस को टीम से बाहर रहने को मजबूर होना पड़ा है. गैर खिलाड़ी कप्तान और डबल्‍स में पेस के पूर्व जोड़ीदार महेश भूपति ने उज्बेकिस्तान के खिलाफ शुक्रवार  से यहां शुरू होने वाले एशिया ओसियाना मुकाबले के लिये रोहन बोपन्ना को चुना है. बोपन्ना दूसरे दौर के युगल मैच में श्रीराम बालाजी के साथ जोड़ी बनाएंगे और केएसएलटीए में फारूख दुस्तोव और संजार फायजीव की जोड़ी से भिड़ेंगे.

गौरतलब है कि रोहन बोपन्ना वर्ल्‍ड रैंकिंग में 24वें स्थान पर हैं और वे कई ग्रैंडस्लैम खिताब जीत चुके पेस (53वें स्थान) से 29 पायदान ऊपर हैं. चोटिल युकी भांबरी की जगह रामकुमार रामनाथन भारत की एकल चुनौती की अगुवाई करेंगे. रामनाथन कल पहले एकल मैच में तैमूर इस्माइलोव का सामना करेंगे. चोटिल भांबरी की जगह टीम में जगह बनाने वाले प्रजनेश गुणेश्वरन की भिड़ंत दूसरे एकल मैच में फायजीव से होगी. रविवार को होने वाले उलट एकल में रामनाथन का सामना फायजीव से जबकि गुणेश्वरन की भिड़ंत अंतिम मैच में इस्माइलोव से होगी.

भूपति ने पेस के बजाय बोपन्ना को चुनने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि बेंगलुरू का यह खिलाड़ी अच्छी सर्विस कर रहा है और उसने साल की शुरुआत भी बढ़िया की है.भूपति ने कहा, ‘हां, जैसा कि मैंने कहा कि हालात निश्चित रूप से काफी तेज होंगे. रोहन अच्छी सर्विस कर रहा है। इस फैसले का आधार यही था.’लिएंडर पेस ने 1990 में जयपुर में जापान के खिलाफ डेविस कप में पदार्पण किया था. उन्हें फॉर्म के आधार पर करीब तीन दशकों में पहली बार डेविस कप टीम से बाहर किया गया. पेस ने अभी तक डेविस कप में 42 युगल मुकाबले जीते हैं और वह इटली के दिग्गज निको पीटरांजेली की बराबरी पर हैं. उन्हें डेविस कप इतिहास में सर्वाधिक युगल मैच जीतने का रिकॉर्ड बनाने के लिए केवल एक जीत की दरकार है. पेस के खेल में अभी भी गजब की फुर्ती है. 43 साल की उम्र में भी वे कोर्ट पर युवा प्‍लेयर्स को टक्‍कर देते नजर आते हैं.

भूपति ने कहा कि एक समय उनके युगल जोड़ीदार रह चुके खिलाड़ी को बाहर रखने का फैसला काफी कठिन था. उन्होंने कहा, ‘यह कठिन था इसलिए यह अंतिम समय में किया गया. मैं शुरू से ही स्पष्ट था कि मैं तीन एकल खिलाड़ियों के विकल्प के साथ ही खेलना चाहता था क्योंकि दो खिलाड़ी डेविस कप में नहीं खेले हैं इसलिये दो युगल विशेषज्ञ खिलाड़ियों के साथ खेलना थोड़ा जोखिम भरी स्थिति होती.’भूपति ने कहा कि टीम के अन्य खिलाड़ियों ने पेस से ज्यादा अभ्‍यास किया था. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि ये लड़के रविवार से यहां हैं. हमने रोहन और बाला के साथ कई सेट खेले हैं. ये प्रत्येक दिन तीन सेट खेलते हैं. दुर्भाग्य से लिएंडर कल ही यहां आया और उसने तीन गेम खेले और यहां बारिश शुरू हो गई.’ यह पूछने पर कि पेस अगर यहां शुरू में जुड़ जाते तो उन्हें मौका मिलता, तो भूपति ने कहा, ‘अगर मुझे रविवार और सोमवार तक पूरी टीम मिली होती तो मेरे पास फैसला करने का शायद और ज्यादा समय होता.’ भूपति से जब पूछा गया कि क्या पेस का सफर खत्म हो गया तो उन्‍होंने नकारात्मक जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘बिलकुल नहीं, मैंने सभी को जिसमें लिएंडर भी शामिल हैं, को बता दिया कि इसका मतलब यह नहीं है कि उसका सफर खत्म हो गया है. उसकी टीम में उपस्थिति ही अहम है, वह जितना अनुभव और उर्जा डेविस कप में लाता है, वह शानदार है.’

पेस, बस नाम ही काफी है  
लिएंडर पेस देश के भारत के सफलतम टेनिस खिलाड़ियों में से एक हैं. महेश भूपति के साथ डबल्‍स में उन्‍होंने कई एटीपी खिताब अपने नाम किए. पेस-भूपति को जोड़ी को एक समय विश्‍व में शीर्ष वरीयता हासिल थी, लेकिन अहं के टकराव के कारण जल्‍द ही इनके संबंधों में कड़वाहट आ गई और उन्‍होंने अलग-अलग खेलने का फैसला किया. बाद में एक बार फिर ये साथ खेलते नजर आए लेकिन युगल मैच खेलने के दौरान पहले जैसी गर्मजोशी और सामंजस्‍य गायब दिखा. पेस को देश के खेल के सबसे ऊंचे सम्‍मान राजीव गांधी खेल रत्‍न से भी नवाजा जा चुका है. पिछले वर्ष हुए रियो ओलिंपिक के दौरान जब पेस और बोपन्‍ना की जोड़ी शुरुआती दौर में ही बाहर हो गई तो भूपति ने एक तरह से 'जले पर नमक' छिड़कते हुए कहा था कि इन दोनों खिलाड़‍ियों (पेस-बोपन्‍ना) ने ओलिंपिक जैसे बड़े मुकाबले के लिए पहले से तैयारी नहीं की. इन दोनों ने पर्याप्‍त अभ्‍यास नहीं किया.


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