मैदान से ज़्यादा दफ़्तर में खेली जा रही है हॉकी, मुख्य कोच के अलावा भी होंगे कई बदलाव

मैदान से ज़्यादा दफ़्तर में खेली जा रही है हॉकी, मुख्य कोच के अलावा भी होंगे कई बदलाव

भारतीय हॉकी टीम (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

रियो ओलिंपिक्स के लिए भारतीय हॉकी टीम ने क़रीब दो साल पहले क्वालिफ़ाई किया, लेकिन टीम ने अबतक इसका फ़ायदा उठाने के बजाए अपने लिए मुश्किलें ही खड़ी की हैं। दूसरी टीमों योजना बनाकर तैयारी कर रही हैं, तो टीम इंडिया के अधिकारी मैदान के बाहर उलझे-उलझे नज़र आते हैं।

भारतीय टीम हिमाचल प्रदेश के शिलारू में हाई आल्टीट्यूड ट्रेनिंग में जुटी है, लेकिन भारतीय हॉकी इन दिनों ज़्यादातर दफ़्तरों में ही खेली जा रही है। हॉकी इंडिया की इवैल्यूएशन कमिटी की तीन घंटे चली बैठक में कोच के बदलाव अलावा कई अहम मुद्दों पर बात हुई। यहां जो फ़ैसले लिए गए वो भारतीय हॉकी की सूरत बदल सकते हैं।

इवैल्यूएशन कमेटी के सदस्य और मॉस्को ओलिंपिक्स गोल्ड मेडल विजेता टीम के कप्तान वासुदेवन भास्करन ने बताया कि मीटिंग में ज़्यादातर बात इस मुद्दे को लेकर होती रही कि रियो तक टीम की तैयारी का रुख़ क्या रखा जाए। इस दौरान ये भी बात हुई कि यूरोपीय शैली की हॉकी भारतीय टीम के मुताबिक नहीं है, इसलिए शायद मिलीजुली हॉकी खेलने की ज़रूरत है।

इवैलेयूएशन कमेटी के चेयरमैन हरबिन्दर सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि रियो ओलिंपिक्स में बस साल भर का समय बचा है, इसलिए कोच और टीम कैसी तैयारी करते हैं, ये तय हो जाना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने नए कोच का नाम प्रेस को बताना ठीक नहीं समझा, लेकिन ये एक ऐसा राज़ है, जिससे दो-तीन दिनों पहले ही पर्दा उठ चुका है।

डच कोच पॉल वैन हास को लेकर उठे विवाद और नए कोच के चयन के अलावा कमेटी ने कई अहम फ़ैसले लिए :-

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टीम के साथ क़रीब डेढ़ साल से जुड़े कोच जूड फेलिक्स ने भी इस्तीफ़ा दे दिया।
मिडफ़ील्डर गुरबाज के सिंह ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
युवराज वाल्मीकि के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठे।
तुषार खांडेकर, जूड फेलिक्स की जगह टीम के सहायक कोच के तौर पर जुड़े।
टीम की रियो तक की रणनीति पर बात हुई।
टीम के सपोर्ट स्टाफ़ में और बदलाव के सुझाव दिए गए।

दरअसल बेल्जियम में हुए वर्ल्ड हॉकी लीग सेमीफ़ाइनल टूर्नामेंट में टीम हॉकी इंडिया के औसत दर्जे के प्रदर्शन के बाद ये जानकार टीम की रणनीति में बदलाव की गुंजाइश देखते हैं। अब रियो तक टीम की ज़िम्मेदारी एक ऐसे कोच के हाथ में है, जिसके सहारे हॉलैंड ने क़रीब दो दशक पहले ओलिंपिक्स, वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफ़ी में कामयाबी हासिल की थी। लेकिन तब से अबतक हालात और टीमें बदल चुकी हैं। फ़ैन्स उम्मीद और आशंका के साथ नतीजों का इंतज़ार करेंगे।