NDTV Khabar

जमीनी स्तर पर बैडमिंटन के अधिक से अधिक डबल्‍स टूर्नामेंट कराने की जरूरत : अश्विनी पोनप्पा

अश्विनी पोनप्पा आज भी दक्षिण एशिया में चैम्पियन महिला युगल बैडमिंटन खिलाड़ी हैं.

63 Shares
ईमेल करें
टिप्पणियां
जमीनी स्तर पर बैडमिंटन के अधिक से अधिक डबल्‍स टूर्नामेंट कराने की जरूरत : अश्विनी पोनप्पा

अश्‍विनी की गिनती देश की बेहतरीन डबल्‍स खिलाड़ि‍यों में की जाती है (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. ज्‍वाला के साथ कई खिताब जीत चुकी हैं अश्विनी
  2. कहा-डबल्‍स मैचों को मिलती है कम अहमियत
  3. राष्‍ट्रमंडल खेलों में जीता था ज्‍वाला के साथ गोल्‍ड
नई दिल्ली: भारत की अग्रणी युगल बैडमिंटन खिलाड़ी और राष्ट्रमंडल चैम्पियन रह चुकीं अश्विनी पोनप्पा का मानना है कि देश में विश्वस्तरीय बैडमिंटन जोड़ियां विकसित करने के लिए जमीनी स्तर पर अधिक से अधिक संख्या में डबल्‍स टूर्नामेंट आयोजित करने की जरूरत है. अपनी पूर्व जोड़ीदार ज्वाला गुट्टा के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई खिताब जीत चुकीं पोनप्पा का कहना है कि अगर डबल्‍स टूर्नामेंट के आयोजन में इजाफा होगा तो बच्चे इस वर्ग में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे. पीएनबी मेटलाइफ जूनियर बैडमिंटन चैम्पियनशिप के राष्ट्रीय फाइनल्स में बतौर मुख्य अतिथि शामिल पोनप्पा ने शुक्रवार को कहा कि युगल मुकाबलों को कम अहमियत दी जाती है, ऐसे में जमीनी स्तर पर इस तरह के टूर्नामेंट्स के ज्यादा आयोजन से युगल खिलाड़ियों की अच्छी बेंच स्ट्रेंग्थ तैयार की जा सकती है.

यह भी पढ़ें
बैडमिंटन : परुपल्‍ली कश्‍यप ने हासिल की बड़ी जीत, 21वीं वरीयता के ली हृयून को हराया


पोनप्पा आज भी दक्षिण एशिया में चैम्पियन महिला युगल बैडमिंटन खिलाड़ी हैं. पिछले ही साल उन्होंने ज्वाला के साथ दक्षिण एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीता. हालांकि विश्व चैम्पियनशिप-2011 में कांस्य पदक, बैडमिंटन का विश्व कप माने जाने वाले उबर कप में दो बार (2014, 2016) कांस्य पदक राष्ट्रमंडल खेलों-2010 में स्वर्ण पदक जीत चुकीं पोनप्पा अब ज्वाला के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में कम ही नजर आती हैं.

यह भी पढ़ें
यूएस ओपन बैडमिंटन: परुपल्ली कश्यप को हराकर प्रणॉय ने जीता खिताब


पोनप्पा से जब पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि युवा खिलाड़ी डबल्‍स वर्ग को छोड़कर एकल वर्ग में अपना करियर तलाश रहे हैं? इस पर उन्होंने कहा, "मैं इसके लिए उन्हें दोष नहीं दूंगी, क्योंकि डबल्‍स मुकाबलों को उतना महत्व दिया नहीं जाता है. उम्मीद है हालात बदलेंगे और कई युगल टूर्नामेंट्स आयोजित होंगे जहां से खिलाड़ी निकलेंगे." पिछले कुछ वर्षों में भारतीय युगल खिलाड़ियों के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी देखी गई है.

वीडियो : रैंकिंग को अहमियत नहीं देते किदांबी श्रीकांत



इस संबंध में जब पोनप्पा से पूछा गया तो उन्होंने कहा, "इसके कई कारण हैं. मैं उनमें नहीं जाना चाहती, क्योंकि अंत में एक युगल खिलाड़ी के तौर पर मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने और प्रदर्शन में निरंतरता लाने की कोशिश कर रही हूं. साथ ही दूसरे खिलाड़ी भी हैं." 27 वर्षीय पोनप्पा के अनुसार, "हमारी कोशिश होती है कि हम अपना सर्वश्रेष्ठ दें और निरंतरता हासिल करें, लेकिन फिर भी मैं कहूंगी कि युगल खिलाड़ियों का प्रदर्शन बहुत खराब नहीं रहा है. हमने इस साल कुछ खिताब जीते हैं. पहले जो था उसमें अब सुधार हो रहा है. अतीत में ज्वाला और मैंने भी काफी कुछ हासिल किया."

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement