NDTV पर Exclusive : एशिया खिताब के लिए बेताब हूं - विजेंद्र सिंह

NDTV पर Exclusive : एशिया खिताब के लिए बेताब हूं - विजेंद्र सिंह

विजेद्र सिंह (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

छह फाइटों में छह जीत, भारत के ओलिंपिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंद्र सिंह प्रोफेशनल रिंग में अब भी बहुत अनुभवी नहीं कहे जा सकते लेकिन उनका रिकॉर्ड शानदार है। बड़ी बात यह है कि इस दौरान उन्होंने अनुभवी मुक्केबाजों को हराकर अपना और भारत का नाम रोशन किया है। वे मानते हैं कि भारत में प्रोफेशनल बॉक्सिंग की बड़ी संभावनाए हैं। लंदन में अपनी छठी जीत के बाद विजेंद्र सिंह ने NDTV संवाददाता विमल मोहन और जया कौशिक से खास बात की।

सवाल : पोलैंड के आंद्रेज़ सोल्द्रा एक अनुभवी मुक्केबाज हैं। आपके लिए यह पहली 8 राउंड की फाइट थी। वे दावा कर रहे थे कि आपके लिए यह एक हॉरर शो साबित होगा, मगर आपने तो पांसा ही पलट दिया।
विजेंद्र सिंह : प्रोफेशनल रिंग में अपनी छठी जीत से मैं बेहद उत्साहित हूं। सोल्द्रा एक अच्छे फाइटर हैं, लेकिन मेरे पंच उन पर भारी साबित हुए। शायद यह मैच उनके लिए एक हॉरर शो बन गया।

सवाल : अगला मैच आपको घरेलू रिंग में लड़ना है जो एक अलग अनुभव होगा और यह मैच आपको एशिया का खिताब भी दिलवाएगा। आप इसे लेकर उत्साहित हैं?
विजेंद्र सिंह : बिल्कुल, इन मैचों में जीत से मेरा हौसला बुलंद हो गया है। खासकर आठ राउंड के पहले मैच में जीत से मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया है। मैं एशिया टाइटिल मुकाबले का बेताबी से इंतजार कर रहा हूं। मैं रिंग में कड़ी मेहनत करता हूं तभी मेरे मैच आसान नजर आते हैं। मुझे कहा जाता है कि अभ्यास में जितनी ज्यादा मुश्किल होगी, मैच उतने ही आसान होंगे।    

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सवाल : आपसे प्रभावित होकर यहां दूसरे मुक्केबाजों के लिए प्रोफेशनल रिंग का रास्ता आसान हो सकता है?
विजेंद्र सिंह : जरूर, मैं इस बदलाव का इंतजार कर रहा हूं। मैं मानता हूं कि भारतीय मुक्केबाजी में जो चीजें चल रही हैं वह जल्दी ठीक हो जाएं तो इसमें और फायदा होगा। मेरे बाद अब कई जूनियर खिलाड़ी प्रोफेशनल बॉक्सिंग में अपना करियर बनाने के लिए तैयार हो सकते हैं।

सवाल : आपको पहचान ओलिंपिक्स में जीत के जरिए ही मिली। लेकिन इस बार अब तक सिर्फ एक भारतीय मुक्केबाज ने रियो ओलिंपिक्स के लिए क्वालिफाई किया है..
विजेंद्र सिंह : मैं पहले से ही शिवा थापा के बारे में कहता रहा हूं।  शिवा थापा बैंटमवेट में रियो का टिकट हासिल कर चुके हैं। भारतीय मुक्केबाजों के पास एक और मौका है। मुझे लगता है 3-4 और भारतीय मुक्केबाज ओलिंपिक्स के लिए क्वालिफाई कर सकते हैं। यह संख्या और बढ़ सकती थी अगर भारतीय फेडरेशन की हालत ठीक होती। इन सबका असर रिंग पर भी पड़ता है। उम्मीद करता हूं कि भारतीय बॉक्सिंग संघ का मसला जल्दी सुलझ जाएगा।
   
सवाल : आपने सितंबर 2015 में अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की थी। तब से लेकर क्या प्रोफेशनल रिंग में आपका सफर आपकी योजना के मुताबिक रहा है?
विजेंद्र सिंह : पिछले 8 महीनों में मैंने शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरीकों से कड़ी मेहनत की है। शुरुआत में यह सफर मेरे लिए आसान नहीं था। नए माहौल में अपने आपको ढालना आसान नहीं था। लेकिन मैंने कड़ी मेहनत की। मैंने प्रोफेशनल बॉक्सिंग और जिन्दगी में कई नई चीजें सीखीं। अब भारत सुकून के साथ आ रहा हूं। एशियाई खिताब जीतने का इंतजार है।