NDTV एक्सक्लूसिव : हॉकी टीम के कप्तान श्रीजेश ने कहा- हमारा टारगेट नंबर 1 बनने का है...

NDTV एक्सक्लूसिव : हॉकी टीम के कप्तान श्रीजेश ने कहा- हमारा टारगेट नंबर 1 बनने का है...

पीआर श्रीजेश की कप्तानी में टीम ने एशियाई चैंपियन्स ट्रॉफी जीती है (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

भारतीय हॉकी टीमों (पुरुष टीम, जूनियर टीम और महिला टीम) ने दीवाली के दिन फैन्स के लिए जीत के ट्रिपल धमाके किए और उम्मीद की नई किरण दिखाई. कई जानकार इसे भारतीय हॉकी के 'अच्छे दिन' की शुरुआत मान रहे हैं. मलेशिया में एशियाई हॉकी चैंपियन्स ट्रॉफी जीतकर लौटी भारतीय टीम खुश तो है, लेकिन हफ्तेभर बाद ही उसे ऑस्ट्रेलिया रवाना होना है, जहां वह टेस्ट सीरीज और चार देशों के हॉकी टूर्नामेंट (भारत, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और न्यूज़ीलैंड) में हिस्सा लेगी. जीतकर वतन वापसी के बाद टीम के कप्तान पीआर श्रीजेश ने NDTV खास बातचीत में कहा कि टीम इंडिया का लक्ष्य वर्ल्ड नंबर 1 बनने का है. पेश हैं बातचीत के कुछ अंश...

ओलिंपिक्स में 8वें नंबर पर रहने के बाद एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी का खिताब हासिल करना भारत के लिए कितनी बड़ी जीत है. भारत ने इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान को लीग और फाइनल में दो बार मात दी. क्या इसलिए इस जीत को टीम और बड़ी मानती है?

-ओलिंपिक्स में हम 8वें नंबर पर रहे जो हमारी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं रहा. उसके बाद हम सीज़न में एक बेहतर तरीके से शुरुआत करना चाहते थे. हम एशियाई चैंपियन्स ट्रॉफी के पूर्व चैंपियन भी हैं. हमारे लिए ये जीत ज़रूरी थी. पाकिस्तान की टीम अच्छी है. पहले इन मैचों में भावनाओं का उफान रहता था, लेकिन अब हम प्रोफेशनल तरीके से खेलते हैं, भावनाओं को अलग रखकर. पाकिस्तान को हराना खास है. हमारी टीम इस जीत से बेहद खुश है.

पाकिस्तान के खिलाड़ियों ने भुवनेश्वर में चैंपियन्स ट्रॉफी में भारत को हराकर दर्शकों के सामने बहुत खराब बर्ताव किया था. क्या आप या टीम पाकिस्तान के खिलाफ खेलते वक्त कहीं बदले की भावना के साथ भी मैदान पर उतरे?

-पाकिस्तानी टीम का बर्ताव भुवनेश्वर चैंपियंस ट्रॉफी में सही नहीं था, लेकिन हम मैच को भावनाओं से ऊपर उठकर ही खेलते हैं. हमने इंचियन एशियाई खेलों (2014) में भी उन्हें हराया था, तब भी हमने सही तरीके से बर्ताव किया. हमें इसी तरह से खेलने की ट्रेनिंग मिली है.

पिछली बार चैंपियंस ट्रॉफी में सरदार और रुपिंदर पाल नहीं थे और इस बार ड्रैग फ़्लिकर रघुनाथ टीम में नहीं थे.... क्या पूरी टीम अब उस स्तर पर आ गई है जहां एक-दो स्टार खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं रहना पड़े?

-देखिए पेनल्टी कॉर्नर किसी एक खिलाड़ी का खेल नहीं होता है. कोई फॉरवर्ड बॉल को पुश करता है, एक खिलाड़ी स्टॉपर का रोल निभाता है, एक खिलाड़ी डॉज देता है तब ड्रैग फ्लिकर गोल कर पाता है. रुपिंदर या किसी भी ड्रैग फ्लिकर के गोल में कई खिलाड़ियों का हाथ रहता है. रुपिंदर ने अच्छा प्रदर्शन किया. पूरे टूर्नामेंट में हमने 30 में से 11 गोल पेनल्टी कॉर्नर के ज़रिये किये. हमारा पेनल्टी कॉर्नर कनवर्ज़न रेट अच्छा रहा. हमारी टीम लगातार बेहतर हो रही है और हम बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं.
 
कोच रोलंट ऑल्टमैन्स का क़रार 2020 टोक्यो ओलिंपिक तक होने से टीम को कितना फ़ायदा होता देखते हैं?

-कोच रोलंट ऑल्टमैन्स लंबे समय से टीम से जुड़े हैं. वो टीम को अच्छी तरह समझते हैं. खिलाड़ी भी उनकी कोचिंग स्टाइल को समझते हैं. वो 2020 तक जुड़े हैं तो टोक्यो ओलिंपिक के लिए तैयारी करने और लक्ष्य बनाने में अच्छी मदद मिलेगी.

टीम को अभी चार देशों के टूर्नामेंट में भी हिस्सा लेना है....आगे टीम का क्या टारगेट ...क्या मिशन है?

-हम तैयारी के बाद चार देशों के टूर्नामेंट के लिए ऑस्ट्रेलिया जाएंगे. हम जीत के इरादे से खेल रहे हैं. 2018 में फिर से हमें एशियान गेम्स (जकार्ता, इंडोनेशिया), वर्ल्ड कप (2018, भुवनेश्वर), कॉमनवेल्थ गेम्स (2018, गोल्ड कोस्ट, ऑस्ट्रेलिया) और टोक्यो ओलिंपिक में अच्छा करना है. टीम लगातार इन्हीं टूर्नामेंट को लक्ष्य बनाकर अभ्यास कर रही है.

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क्या टीम की नज़र वर्ल्ड रैंकिंग पर भी है?

-बिल्कुल. हमारा लक्ष्य वर्ल्ड नंबर वन बनने पर है. मैं जब टीम में आया था तब हम 12वें-13वें नंबर पर थे. फिर मैं कप्तान बना और हमारी टीम ने ऐतिहासिक जीत हासिल की. अभी हम छठे नंबर पर हैं और धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं.