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भारत की फर्राटा धाविका दुती चंद ने कहा, लिंग विवाद फिर से उठने से चिंतित नहीं हूं

दुती चंद का पुराना 'लिंग विवाद' आगामी 22वें एशियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप से ठीक पहले एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है.

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भारत की फर्राटा धाविका दुती चंद ने कहा, लिंग विवाद फिर से उठने से चिंतित नहीं हूं

दुती चंद ने कहा कि मेरा ध्यान पूरी तरह एशियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप पर है (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. दुती चंद ने कहा, मेरा पूरा ध्‍यान चैंपियनशिप पर है
  2. विवाद के कारण वर्ष 2015 मेरे लिए दुर्भाग्‍यशाली रहा
  3. लिंग विवाद को खेल पंचाट में ले जा रहा है आईएएएफ
भुवनेश्वर: भारत की दिग्गज फर्राटा धावक दुती चंद का पुराना 'लिंग विवाद' आगामी 22वें एशियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप से ठीक पहले एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है, हालांकि दुती का कहना है कि वह इससे चिंतित नहीं है और अपना पूरा ध्यान चैम्पियनशिप में लगा रही हैं. दूती ने मंगलवार को कहा, "अभी मैं इस विवाद के बारे में नहीं सोच रही हूं. मेरा ध्यान पूरी तरह एशियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप पर है. मेरे पास वकील और सलाहकार हैं, वही तय करेंगे की हायपरएंड्रोजीनिज्म मामले में क्या करना है." दुती ने वहीं यह भी स्वीकार किया है कि उन पर इसे लेकर थोड़ा दबाव है.

उन्होंने कहा, "इस विवाद के चलते 2015 मेरे लिए काफी दुर्भाग्यशाली रहा. मैंने इससे खुद को बाहर निकाला और 2016 में कई खेलों में हिस्सा लिया और कई मेडल भी जीते. हालांकि इससे मैं थोड़ी घबराई रहती हूं, लेकिन इसका असर मैं अपने प्रदर्शन पर नहीं पड़ने दूंगी." अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ (आईएएएफ) ने मंगलवार को कहा है कि वह इस 'लिंग विवाद' को लेकर एकबार फिर खेल पंचाट न्यायालय (सीएएस) में जाएगी और अपनी हायपरएंड्रोजीनिज्म नीति के बारे में और सूबत पेश करेगी." हालांकि उसका यह फैसला चैम्पियनशिप में दुती को हिस्सा लेने से नहीं रोक सकता. आईएएएफ के अध्यक्ष सेबास्टियन को ने कहा कि दुती इन खेलों में हिस्सा ले सकती हैं.

उन्होंने कहा, "इसी साल अगस्त में लंदन विश्व चैम्पियनशिप में दुती के हिस्सा लेने पर भी कोई परेशानी नहीं है. अगर वह क्वालीफाई कर पाती हैं तो वह हिस्सा ले सकती हैं." दुती को 2014 में भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने आईएएएफ की हायपरएंड्रोजीनिज्म नीति के तहत निलंबित कर दिया था, जब उनके स्वास्थ्य जांच में यह पता चला था कि उनका शरीर निर्धारित स्तर से कहीं अधिक मात्रा में अमूमन पुरुषों में पाए जाने वाले हार्मोन का श्राव करता है. ओडिशा की रहने वाली दुती ने आईएएफ की हायपरएंड्रोजीनिज्म नीति को सीएएस में चुनौती दी थी.

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सीएएस ने जुलाई 2015 में अंतरिम आदेश जारी करते हुए आईएएएफ की हायपरएंड्रोजीनिज्म ग्रस्त खिलाड़ियों को महिला वर्ग में न खेलने देने की नीति को अधीकतम दो साल के लिए खारिज कर दिया था. सीएएस ने कहा था कि आईएएएफ वैज्ञानिक तथ्य पेश करे कि इस पदार्थ का शरीर में तय मात्रा से ज्यादा होना और हायपरएंड्रोजीनिज्म ग्रस्त खिलाड़ियों द्वारा बेहतर प्रदर्शन करने के बीच कोई संबंध है. अपने इस आदेश के बाद सीएएस ने दुती को अगले दो साल तक सभी अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में खेलने की अनुमति दे दी थी.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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