जिस खिलाड़ी ने ओलिंपिक पहुंचने का रास्‍ता साफ किया, वही बना रियो के लिए हॉकी टीम का कप्‍तान...

जिस खिलाड़ी ने ओलिंपिक पहुंचने का रास्‍ता साफ किया, वही बना रियो के लिए हॉकी टीम का कप्‍तान...

पीआर श्रीजेश (फाइल फोटो)

रियो ओलिंपिक के लिए गोलकीपर पीआर श्रीजेश को भारतीय हॉकी टीम का कप्‍तान नियुक्‍त किया है। कप्‍तान के रूप में श्रीजेश को चुना जाना एक तरह से चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन का उन्‍हें मिला पुरस्‍कार है। गौरतलब है कि प्रतिष्‍ठापूर्ण चैंपियंस ट्रॉफी में श्रीजेश ही टीम इंडिया के कप्‍तान थे और तमाम खेल समीक्षकों को चौंकाते हुए भारतीय टीम रजत पदक जीतने में सफल रही थी।

प्रतियोगिता के खिताबी मुकाबले में मजबूत ऑस्‍ट्रेलियाई टीम को भारत ने यदि गोलरहित रोकने में बराबरी हासिल की थी तो इसका बहुत कुछ श्रेय श्रीजेश की बेहतरीन गोलकीपिंग को ही जाता है। गोल क्षेत्र पर सजग प्रहरी की भूमिका निभाते हुए श्रीजेश ने इसे अभेद दीवार में तब्‍दील कर दिया और ऑस्‍ट्रेलियाई फॉरवर्ड्स के सभी हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। इसे भारत की बदकिस्‍मती ही कहा जाएगा कि पेनल्‍टी शूटआउट में श्रीजेश और भारतीय टीम यह प्रदर्शन दोहरा नहीं पाई और उसे सिल्‍वर मैडल से ही संतोष करना पड़ा।

28 साल के श्रीजेश आज टीम इंडिया के न सिर्फ नंबर वन गोलकीपर हैं बल्कि उनका गोल क्षेत्र पर मौजूद रहना टीम के खिलाडि़यों को अलग ही आत्‍मविश्‍वास और बेफिक्री का भाव देता है। केरल के अर्नाकुलम जिले के श्रीजेश शुरुआत से ही खेल में करियर बनाना चाहते थे। हॉकी गोलकीपर बनने के पहले उन्‍होंने एथलेटिक्‍स और वॉलीबॉल जैसे खेलों में भी हाथ आजमाया। बाद में कोच की समझाइश पर वे हॉकी गोलकीपर बने और जल्‍द ही अपने प्रदर्शन से नई ऊंचाइयां छूते गए।

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वर्ष 2004 में जूनियर नेशनल टीम में स्‍थान बनाने के बाद उन्‍हें सीनियर टीम में जगह बनाने के लिए ज्‍यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा और 2006 में वे सीनियर टीम के सदस्‍य बन गए। लंदन ओलिंपिक और हॉकी वर्ल्‍डकप में भी वे भारतीय टीम का प्रतिनिधित्‍व कर चुके हैं। मजे की बात यह है कि भारतीय टीम को रियो ओलिंपिक में प्रवेश दिलाने में भी सबसे बड़ा योगदान श्रीजेश का ही रहा है। वर्ष 2014 में दक्षिण कोरिया में इचियोन में हुए एशियाई खेलों में निर्धारित समय तक भारत और पाकिस्‍तान का मुकाबला बराबरी पर रहा था और पेनल्‍टी शूटआउट में अपने बेहतरीन बचाव के जरिये श्रीजेश ने भारत की खिताबी जीत और उसके 2016 ओलिंपिक में प्रवेश का रास्‍ता साफ कर दिया था।

गौरतलब है कि किसी भी महाद्वीप की विजेता टीम को ओलिंपिक में सीधे  प्रवेश मिलता है। ओलिंपिक में भारतीय प्रदर्शन को बहुत कुछ दारोमदार श्रीजेश पर भी होगा। टीम अगर एक यूनिट में रूप में खेली (जैसा कि यह चैंपियंस ट्रॉफी में नामी टीमों के सामने कर चुकी है) तो श्रीजेश ब्रिगेड से देशवासियों को कुछ अप्रत्‍याशित और अच्‍छी खबर मिल सकती है...।