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IPL से तुलना करने लगे हैं प्रो रेसलिंग लीग (PWL) के आयोजक, साक्षी-योगेश्वर का रैंप वॉक

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IPL से तुलना करने लगे हैं प्रो रेसलिंग लीग (PWL) के आयोजक, साक्षी-योगेश्वर का रैंप वॉक

साक्षी मलिक और योगेश्वर दत्त ने रैंप वॉक किया (फोटो : NDTV)

नई दिल्ली:

शहर के पांच सितारा होटल में रैंप वॉक करते वक्त भी ओलिंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक आत्मविश्वास से लबालब नजर आईं. मैट पर कुश्ती हो या रैंप वॉक ..साक्षी के सितारे बुलंदी पर हैं. 'रैंप वॉक' के बाद उन्होंने कहा, "अच्छा लगा. काफी अलग था, लेकिन कुश्ती यकीनन कहीं ज़्यादा मुश्किल है." यह और बात है कि साक्षी से ज़्यादा प्रो रेसलिंग लीग (PWL) आयोजक उत्साहित नजर आए. आयोजकों ने दावा किया कि IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) के बाद PWL के दर्शकों की संख्या सबसे ज़्यादा रही. उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले वक्त में उनकी लोकप्रियता IPL को टक्कर दे सकती है.

रियो ओलिंपिक की पदक विजेता साक्षी बहुत कम समय में एक बड़ा ब्रांड बनती नजर आ रही हैं. बॉलीवुड के बड़े रियलिटी शोज़ से लेकर कई समारोह में वह बतौर मुख्य अतिथि दिखी हैं. ज्यादातर शोज़ में वह अपनी बातचीत से दर्शकों का दिल जीतती रही हैं. साक्षी न केवल अच्छे पहनावे और बोलने में आगे हैं, बल्कि अच्छे पहलवानों के प्रति बनी परंपरागत धारणा को तोड़ने में भी अपनी भूमिका निभाती नजर आती हैं.
 

साक्षी मलिक ने प्रो रेसलिंग लीग को प्रमोट करने के लिए रैंप वॉक किया (फोटो : NDTV)

अगले महीने की 15 तारीख़ को शुरू होने वाली दूसरी प्रोफ़ेशनल कुश्ती लीग के लिए 'रैंप वॉक' में वह बिल्कुल अलग अवतार में नज़र आईं. रैंप से पहले भी टेढ़े सवालों का सामना वह हंसकर करती रहीं. मसलन उनसे पूछा गया कि उन पर अगर बायोपिक बने तो वो किसे अपना रोल अदा करता देखना चाहेंगी. साक्षी ने कहा, "मेरा काम कुश्ती करना है. अगर ऐसा होता है तो यह सोचना दूसरे लोगों का ही काम है कि किसे उनका रोल अदा करना चाहिए."


24 साल की ओलिंपिक पदक विजेता प्रोफ़ेशनल रेसलिंग के लिए फ़ैशन शो के रैंप वॉक पर उनके हौसले की दाद देनी पड़ेगी, लेकिन ओलिंपिक में जीत के बाद से फ़ैन्स मैच में उनके प्रदर्शन का इंतज़ार कर रहे हैं. हाल ही में गोन्डा में हुए कुश्ती के नेशनल्स में भी उन्होंने हिस्सा नहीं लिया. वह मानती हैं कि कुश्ती और रैंप की मेहनत में बड़ा फ़र्क है. वो कहती हैं, "यहां रैंप करना बहुत अच्छा लगा. अलग अनुभव रहा, लेकिन कुश्ती यकीनन कहीं ज़्यादा मुश्किल है."

15 दिसंबर से 14 जनवरी 2017 तक चलने वाली कुश्ती की दूसरी प्रोफ़ेशनल लीग में अब 6 के बजाए 8 टीमें हिस्सा लेंगी. इसमें खिलाड़ियों की संख्या भी अब 100 के करीब हो जाएगी. ओलिंपियन गीता फोगट के लिए अपने मंगेतर पवन कुमार के साथ रैंप वॉक करना एक अलग अहसास रहा, तो ओलिंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त और ओलिंपियन बबीता इसे मिशन मानकर रैंप वॉक करते रहे. लंदन ओलिंपिक के पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने कहा, "अच्छा लगा. लेकिन मैं इसे फ़ैशन शो की तरह नहीं देखता हूं. मैं इसको कुश्ती के लिए मंच मानता हूं."
 

योगेश्वर दत्त ने कहा कि यह रैंप वॉक फैशन शो की तरह नहीं है (फोटो : NDTV)
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प्रोफ़ेशनल लीग को लेकर आयोजकों और कुश्ती के समर्थकों में उत्साह तो है. लेकिन कई जानकार मानते हैं कि प्रोफ़ेशनल लीग जैसी कोशिशों के साथ बुनियादी स्तर पर अभी काफ़ी काम करने की ज़रूरत है. पहले प्रोफ़ेशनल लीग से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार नौरिस प्रीतम कहते हैं," एक बैलेंस बनाने की ज़रूरत है. प्रोफ़ेशनल लीग से बाहर भी अच्छे टूर्नामेंट की ज़रूरत है. यहां कितने (भारतीय) पहलवानों को मौक़ा मिलेगा... 6 या 8 पहलवानों को. इसलिए बुनियादी स्तर पर अभी काफ़ी काम करने की ज़रूरत है." लेकिन पूर्व पहलवान जगदीश कालीरमन कहते हैं, "प्रोफेशनल लीग का बड़ा फ़ायदा हुआ है. यहां भारत के स्टार पहलवान इस टूर्नामेंट की रौनक बढ़ा देते हैं. इससे भारतीय कुश्ती को बहुत फ़ायदा हुआ है. भारतीय कुश्ती संघ सही दिशा में काम कर रहा है.

पिछले लगातार तीन ओलिंपिक खेलों में पदक और रियो की कामयाबी के दम पर आयोजक बेशक PWL की तुलना क्रिकेट के IPL से करने लगे हैं, लेकिन कुश्ती को क्रिकेट के आसपास भी पहुंचने से पहले हर स्तर इसे मीलों लंबा सफ़र तय करना पड़ेगा.



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