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विश्‍व बैडमिंटन चैंपियनशिप : अगर आज फाइनल जीतीं तो इतिहास रच देंगी भारत की पीवी सिंधु

ओलिंपिक की रजत पदकधारी पीवी सिंधु ने चीन की चेन युफेई पर आसान जीत से विश्व चैम्पियनशिप के फाइनल में प्रवेश किया, जिससे वह इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनने की ओर हैं.

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विश्‍व बैडमिंटन चैंपियनशिप : अगर आज फाइनल जीतीं तो इतिहास रच देंगी भारत की पीवी सिंधु

सिंधु ने सेमीफाइनल में चीन की चेन युफेई को हराया (फोटो AFP)

खास बातें

  1. चीन की युफेई पर आसान जीत दर्ज कर फाइनल में पहुंचीं
  2. फाइनल में जापान की नोजोमी ओकुहारा से होगा मुकाबला
  3. खिताब जीतीं तो ऐसा करने वाली पहली भारतीय शटलर होंगी
ग्‍लास्‍गो:

ओलिंपिक की रजत पदकधारी पीवी सिंधु ने चीन की चेन युफेई पर आसान जीत से विश्व चैम्पियनशिप के फाइनल में प्रवेश किया, जिससे वह इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनने की ओर हैं. 22 वर्षीय सिंधु ने दुनिया की 10वें नंबर की चेन को बीती रात महिला एकल के सेमीफाइनल में सीधे गेम में 21-13 21-10 से जीत दर्ज कर भारत के लिये कम से कम रजत पदक तो पक्का करा दिया क्योंकि हमवतन खिलाड़ी साइना नेहवाल को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा.

फाइनल मुकाबले में सिंधु का सामना जापान की नोजोमी ओकुहारा से होगा जिन्होंने कल पहले सेमीफाइनल में साइना को 12-21 21-17 21-10 से मात दी थी. यह विश्व चैम्पियनशिप में सिंधु का पहला फाइनल होगा जिससे यह उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. विश्व चैम्पियनशिप में यह सिंधु का तीसरा पदक होगा क्योंकि वह 2013 और 2014 में सेमीफाइनल में हारने के बाद दो बार कांस्य पदक जीत चुकी हैं. वह इससे भी बेहतर कर इतिहास रच सकती हैं. खिताब जीतकर वह पहली भारतीय विश्व चैम्पियन शटलर बन जाएंगी. भारत ने इससे पहले विश्व चैम्पियनशिप में एक रजत (साइना के 2015 के जरिये) और चार कांस्य पदक अपने नाम किये हैं.

इस जीत से सिंधु विश्व चैम्पियनिशप के फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी भारतीय बन गई हैं, इससे पहले जकार्ता में पिछले चरण में साइना ने यह उपलब्धि हासिल की थी. यह विश्व चैम्पियनशिप में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी होगा क्योंकि देश अब पहली बार इसमें दो पदक अपने नाम करेगा.

वीडियो : पीवी सिंधु को मिला 'बड़ा' तोहफा


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सिंधु का ओकुहारा के खिलाफ पिछली छह भिड़ंत में फाइनल का रिकार्ड 3-3 से बराबरी का रहा है, लेकिन रियो ओलिंपिक और 2017 सिंगापुर ओपन में पिछले दो मुकाबलों इस भारतीय का पलड़ा भारी रहा है. जब से सिंधु यहां आई हैं तो वह अपने कांस्य पदक (2013 और 2014 में) और रजत पदक (2016 ओलंपिक) का रंग (स्वर्ण पदक में) बदलना चाहती हैं. सेमीफाइनल मैच के बाद जब उनसे पूछा गया कि अगर रंग बदलने की बात है तो क्या रजत पदक, इस पर सिंधू ने कहा, ‘‘अरे नहीं, यह काफी नहीं होगा. आज जीतना अहम था क्योंकि मैं अपने पदकों का रंग बदलना चाहती हूं. मैं जीतना चाहती हूं और मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतने का है और मेरा ध्यान इसी पर लगा है.’

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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