रियो ओलिंपिक : मेडल आ नहीं रहे, विवाद थम नहीं रहे

रियो ओलिंपिक : मेडल आ नहीं रहे, विवाद थम नहीं रहे

खास बातें

  • 11 दिन गुजरने के बाद भी भारत पदक से दूर
  • इस बीच कई विवादों ने तूल पकड़ा
  • ताजा मामले में एथलेटिक्‍स कोच रहे हिरासत में
रियो डि जिनेरियो:

रियो में भारत के लिए 11वां दिन भी खाली गया-मेडल के लिहाज से लेकिन विवादों की रफ्तार बदस्‍तूर बनी रही. सूत्रों के हवाले से छन-छनकर खबर आई कि एथलेटिक्‍स के कोच निकोलाइ स्नेसारेव को रियो पुलिस ने आधे दिन के लिए हिरासत में रखा. दरअसल उनकी एथलीट ओपी जैशा की हालत मैराथन के दौरान खराब हो गई और उन्‍हें अस्‍पताल ले जाना पड़ा.

खबरों के मुताबिक अस्‍पताल में ओपी जैशा के कोच स्नेसारेव ने महिला डॉक्‍टर के साथ बदसलूकी की और मामला पुलिस तक पहुंच गया. ब्राजील में भारतीय दूतावास के दखल के बाद ही उन्‍हें छोड़ा जा सका.

इससे पहले खेल मंत्री विजय गोयल को आईओसी से मिली चेतावनी का विवाद अभी सबके जेहन में ताजा है. संयोग से विजय गोयल और उनकी टीम पर भी बदसलूकी का दाग लगा.

भारतीय मुक्‍केबाज मनोज 64 किग्रा भार वर्ग में पहले राउंड में जीत के बावजूद अपनी जर्सी के विवाद की वजह से सुर्खियों में छाए रहे. ये मसला सीधा भारतीय खेल तंत्र (बॉक्सिंग और भारतीय ओलिंपिक संघ) की लापरवाही का नतीजा रहा. मनोज कुमार की जर्सी पर भारत नहीं लिखा था.

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एक वक्‍त तो ऐसा लगा कि मनोज कुमार की जीत हार में तब्‍दील कर दी जाएगी. यही नहीं भारतीय जर्सी की क्‍वालिटी को लेकर कई शिकायतें रहीं. खासकर प्‍लेयर्स के ट्रैक सूट के कपड़े की क्‍वालिटी काफी खराब बताई गई. कई प्‍लेयर्स की जर्सी पर हफ्ते भर के अंदर ही फफूंद पड़ते दिखाई दिए.

दरअसल इस आयोजन से करीब दो महीने पहले ही नरसिंह यादव के ओलिंपिक में जाने को लेकर कई बड़े विवाद हुए. इससे न सिर्फ खेलों की साख पर बट्टा लगा बल्कि भारतीय खिलाडि़यों का अच्‍छा-खासा नुकसान भी हुआ. इनमें से कई विवादों की नींव ओलिंपिक शुरू होने से पहले ही पड़ गई थी. भारतीय टीम और फैंस इन सभी विवादों के नतीजे बमुश्किल टीस के साथ ढो रहे हैं और नतीजा सबके सामने हैं.