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रियो ओलिंपिक: नहीं चले बॉक्‍सर शिव थापा , क्‍यूबा के रॉमिरेज से मुकाबला हारकर बाहर हुए

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रियो ओलिंपिक:  नहीं चले बॉक्‍सर शिव थापा , क्‍यूबा के रॉमिरेज से मुकाबला हारकर बाहर हुए

बॉक्सर शिव थापा (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. शिव थापा को 0-3 से हार का सामना करना पड़ा
  2. लंदन ओलंपिक में गोल्‍ड जीता था क्‍यूबा के रॉमिरेज ने
  3. बॉक्सिंग में भारत की उम्‍मीदें अब विकास और मनोज पर टिकीं

भारतीय बॉक्‍सर शिव थापा (56 किग्रा) गुरुवार को यहां पहले दौर के मुकाबले में चौथे वरीय क्यूबा के रोबेसी रॉमिरेज के खिलाफ शिकस्त के साथ रियो ओलंपिक से बाहर हो गए.अपने दूसरे ओलंपिक में हिस्सा ले रहे 22 साल के शिव को एकतरफा मुकाबले में 0-3 से शिकस्त का सामना करना पड़ा.इस मुकाबले के दौरान उनकी बायीं आंख के उपर कट भी लग गया.

पहले राउंड में दोनों मुक्केबाजों ने सतर्क शुरुआत की. दोनों मुक्केबाज जूनियर टूर्नामेंटों में खेलने के दौरान से एक दूसरे के खेल से परिचित हैं.दोनों यूथ विश्व चैम्पियनशिप और यूथ ओलंपिक 2010 के फाइनल में एक दूसरे से भिड़ चुके हैं.आज के मुकाबले से पहले रॉमिरेजने भारतीय मुक्केबाज के खिलाफ अपने दोनों मैच जीते थे और आज तीसरी जीत दर्ज करने में भी उन्हें अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ी.

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लंदन ओलंपिक में फ्लाइवेट वर्ग के स्वर्ण पदक विजेता रॉमिरेज ने दायें हाथ से कुछ धांसू मुक्के जमाये.क्यूबा के मुक्केबाज ने शानदार फुटवर्क दिखाया और शिव के डिफेंस को भेदने में कामयाब रहे.दूसरे राउंड में भी विश्व चैम्पियनशिप के कांस्य पदक विजेता शिव को रॉमिरेज के खिलाफ जूझना पड़ा जिन्हें दर्शकों का भी पूरा समर्थन मिल रहा था.तीसरे राउंड में भी कुछ नया देखने को नहीं  मिला और रॉमिरेज ने दबदबा बनाए रखते हुए जीत दर्ज की.शिव को चार साल पहले ओलंपिक में पदार्पण के दौरान भी पहले दौर में ही हार का सामना करना पड़ा था.भारतीय उम्मीदों का भार अब विकास कृष्ण (75 किग्रा) और मनोज कुमार (64 किग्रा) पर है जो दोनों प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बना चुके हैं.


गौरतलब है कि थापा भी अपने भारवर्ग की विश्व रैंकिंग में छठे स्थान पर हैं, लेकिन वह तदर्थ समिति द्वारा कुछ गड़बड़ियों के कारण वरीयता पाने में असफल रहे थे. अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (एआईबीए) द्वारा बनाए गए नए मुक्केबाजी नियमों के मुताबिक ओलिंपिक में वरीयता पेशेवर मुक्केबाजी (एपीबी) और मुक्केबाजी विश्व सीरीज (डब्ल्यूएसबी) में किए गए प्रदर्शन के आधार पर तय होनी है. तदर्थ समिति ने भारतीय मुक्केबाजों को इस नियम की जानकारी नहीं दी जिसके कारण थापा ने एपीबी में हिस्सा नहीं लिया. जिससे उन्हें पहले दौर में क्यूबा के वरीयता प्राप्त मुक्केबाज से भिड़ना पड़ा.



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