सीमा पूनिया रचना चाहती हैं राष्ट्रकुल खेलों में इतिहास, इस बात का आज तक है गम

वैसे जो सपना इस एथलीट ने पाला है, वह 34 साल की उम्र में थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है.

सीमा पूनिया रचना चाहती हैं राष्ट्रकुल खेलों में इतिहास, इस बात का आज तक है गम

सीमा पूनिया

खास बातें

  • साल 2020 ओलंपिक में हिस्सा लेना चाहती हैं सीमा
  • 11 साल की उम्र से एथलेटिक्स में प्रवेश किया था
  • साल 2014 और 2016 में रजत पदक जीता
नई दिल्ली:

सीमा पूनिया भले ही पूर्व में डोपिंग के कारण चर्चा में रही हो लेकिन अगले महीने होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में वह भारतीय एथलीटों में पदक की सर्वश्रेष्ठ दावेदार हैं और चक्का फेंक की यह खिलाड़ी भी इन खेलों के अपने अभियान का शानदार अंत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में सीमा भारत की सबसे सफल एथलीट रही हैं. उन्होंने जब भी इन खेलों में हिस्सा लिया तब पदक जरूर जीता. सेकिन अब सीमा पूनिया डिस्कस-थ्रो में नया इतिहास लिखना चाहती हैं.
 


अभी अमरीका में अभ्यास कर रही सीमा ने कि यह मेरे चौथे राष्ट्रमंडल खेल होंगे. मुझे पूरा विश्वास है कि मैं गोल्ड कोस्ट में पदक जीत सकती हूं. मैं हालांकि यह नहीं कह सकती कि पदक का रंग क्या होगा. उन्होंने कहा कि यह यात्रा लंबी रही है. मैं नहीं जानती कि मैं 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों तक खुद को फिट रख पाती हूं या नहीं लेकिन मैं 2020 ओलंपिक खेलों तक बने रहना चाहती हूं. मैं अभी फिनिश नहीं हुई हूं.

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हरियाणा के सोनीपत जिले के खेवड़ा गांव में जन्मीं सीमा ने 11 साल की उम्र से एथलेटिक्स में प्रवेश कर लिया था. उन्होंने 17 साल की उम्र में विश्व जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीता था लेकिन डोपिंग का दोषी पाये जाने के कारण उनका पदक छीन लिया गया था. सीमा ने स्यूडोफेडरिन ली थी जिसे जुकाम के उपचार के लिS लिया जाता है. तब आईएएएफ के नियमों के अनुसार केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। इसके बाद उनका करियर उतार चढ़ाव वाला रहा. 

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बहरहाल, सीमा पूनिया इस साल होने वाले राष्ट्रकुल खेलों में स्वर्ण पतक जीतना चाहती हैं. यह उनका आखिरी राष्ट्रकुल खेल साबित हो सकते हैं. सीमा ने साल 2010 दिल्ली राष्ट्रकुल खेलों में कांस्य और साल 2014 और 2016 में रजत पदक जीता, लेकिन अब उनका सपना स्वर्ण जीतने का है. बहरहाल सीमा पूनिया को सबसे बड़ा खेद करियर में इस बात का है कि वह ओलंपिक 2012 और 2016 में वह क्वालीफिकेशन दौर में ही बाहर हो गईं.

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