आज विश्व भर में मनाया जा रहा है ओलिंपिक दिवस, खेल जगत के महाकुंभ में ऐसा रहा है भारत का सफर

भारत ने पहली बार वर्ष 1900 में पेरिस समर ओलिंपिक में भाग लिया. ओलिंपिक में भारत की ओर से पहले एथलीट ब्रिटिश मूल की थे जिनका नाम नार्मन प्रिचार्ड था. भारत ने 30 ओलिंपिक गेम्स में कुल 28 पदक जीते हैं.

आज विश्व भर में मनाया जा रहा है ओलिंपिक दिवस, खेल जगत के महाकुंभ में ऐसा रहा है भारत का सफर

अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक दिवस की शुरुआत 1948 में हुई थी

खास बातें

  • हर साल 23 जून को विश्व भर में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस मनाया जाता है
  • अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस की शुरुआत 1948 में हुई थी
  • 1896 में ग्रीस की राजधानी एथेंस में पहले ओलंपिक गेम्स का आयोजन हुआ था

भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता के आगे अन्य सभी खेल कहीं नहीं टिकते. लेकिन एक समय ऐसा आता है की पूरा देश, क्रिकेट को छोड़ दूसरे खेलों में भी रुचि दिखाता है. हर चार साल में खेल जगत का सबसे बड़ा मंच दुनिया भर के खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर पर अपना जौहर दिखाने का अवसर प्रदान करता है. हर चार साल में ये मौका 'ओलिंपिक ' के रूप में आता है. आज की तारीख, यानी 23 जून, को हर साल विश्व भर में अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक दिवस मनाया जाता है. हर साल हज़ारों की संख्या में विभिन्न देशों के लोग तरह तरह के इवेंट्स जैसे दौड़, प्रदर्शनी मुकाबले में हिस्सा लेकर ओलिंपिक दिवस मनाते हैं. अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक दिवस की शुरुआत 1948 में हुई थी.

1896 में हुई ओलिंपिक गेम्स की शुरुआत

साल 1894 में अन्तर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (IOC) का गठन हुआ और ठीक 2 साल बाद 1896 में ग्रीस की राजधानी एथेंस में पहले ओलिंपिक गेम्स का आयोजन हुआ. इन गेम्स में कुल खेल 43 स्पर्धाओं में 14 देशों के 241 एथलीट्स ने हिस्सा लिया. ओलिंपिक गेम्स 2016 तक आते-आते 306 खेल स्पर्धाओं व 207 देशों की भागीदारी वाला खेल जगत का सबसे बड़ा उत्सव बन गया.

ओलिंपिक गेम्स में भारत का सफर

भारत ने पहली बार वर्ष 1900 में पेरिस समर ओलिंपिक में भाग लिया. ओलिंपिक में भारत की ओर से पहले एथलीट ब्रिटिश मूल की थे जिनका नाम नार्मन प्रिचार्ड था. प्रिचार्ड ने 200 मीटर की दौड़ और 200 मीटर की बाधा दौड़ में भारत को 2 रजत पदक दिलाये. भारत ने 30 ओलिंपिक गेम्स में कुल 28 पदक जीते हैं. ओलिंपिक हॉकी में भारत का  रिकार्ड अविश्वसनीय है. 1928 से 1956 का दौर भारतीय हॉकी का स्वर्णिम दौर रहा है जिसमें भारत ने लगातार 6 स्वर्ण जीते. इसके अलावा 1964 और 1980 में भी भारतीय हॉकी टीम ने दो स्वर्ण हासिल किए. फील्ड हॉकी में भारत को सबसे अधिक 11 मेडल मिले हैं. इसके अलावा भारत को शूटिंग में 4, एथलेटिक्स में 2 , रेसलिंग में 5 , बैडमिंटन में 2 , बॉक्सिंग में 2 , टेनिस में 2 और वेटलिफ्टिंग में 1 पदक मिला है.
 

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व्यक्तिगत पदक के लिए लंबा इंतज़ार
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हालांकि भारत लम्बे समय से ओलिंपिक गेम्स में हिस्सा ले रहा है लेकिन व्यक्तिगत सफलताओं में सिर्फ एक बार शीर्ष स्थान पर खड़ा होने का मौका मिला. ये मौका बेहद लम्बे इंतज़ार के बाद 2008 बीजिंग गेम्स में आया जब भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने 10 मीटर एयर रायफल ने सबसे सटीक निशाना साधते हुुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया. ये मैडल भारत का अब तक का एकमात्र व्यक्तिगत स्वर्ण पदक है. साल 1952 के हेलसिंकी ओलिंपिक में खाशाबा जाधव ने कुश्ती में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए पहला व्यक्तिगत पदक जीता था.
 

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2016 रियो गेम्स की निराशा के बाद 'टारगेट ओलिंपिक पोडियम' कमेटी का पुनर्गठन

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2016 के रियो ओलिंपिक में पहलवान साक्षी मलिक (फ्रीस्टाइल 58 किलोग्राम में कांस्य पदक) और बैडमिंटन में पीवी सिंधू (रजत पदक) ने मेडल हासिल करके देश को गौरवान्वित किया लेकिन भारत की कुल पदकों की संख्या सिर्फ दो थी. इस ख़राब प्रदर्शन को देखते हुए खेल मंत्रालय ने 'टारगेट ओलिंपिक पोडियम' (टीओपी) कमेटी का पुनर्गठन किया जिसका मुख्य उद्देश्य ऐसे खिलाडिय़ों की पहचान करना और उनको प्रोत्साहित करना है, जिनकी प्रतिभा के आधार पर उन्हें 2020 और 2024 के ओलिंपिक खेलों में पदक जीतने के लिए तैयार किया जा सकेगा. कमेटी में अध्यक्ष के रूप में गोल्ड मेडल विजेता अभिनव बिंद्रा को रखा गया है. इस दस सदस्यीय कमेटी में प्रकाश पादुकोण, कर्णम मल्लेश्वरी, पीटी ऊषा, अंजलि भागवत भी शामिल हैं.