SAI ने मेरी जिंदगी नर्क बना दी, मैं खाना भी नहीं खा पा रहा हूं : सुंदर गुर्जर

SAI ने मेरी जिंदगी नर्क बना दी, मैं खाना भी नहीं खा पा रहा हूं : सुंदर गुर्जर

खास बातें

  • मैं 10 मीटर से आगे था. 10 मीटर बहुत होता है. क्या रिजल्ट मिला
  • मैं बैग वापस लेने आया तो 1 मिनट लेट हो गया
  • कोच ने नियम नहीं बताए थे
नई दिल्ली:

पैरा एथलीट सुंदर गुर्जर ने SAI के अधिकारियों पर धोखा देने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि कोच दीपक भारद्वाज ने मेरी जिंदगी नर्क बना दी. दरअसल, मौके पर होने के बावजूद सुंदर पैरालिंपिक में भाग नहीं ले पाए थे.

सुंदर ने एनडीटीवी को बताया कि मेरे साथ जो हुआ, बहुत बुरा रहा. मैं आज तक खाना भी नहीं खा पा रहा हूं, लेकिन कोई बात नहीं, जो होता है, अच्छे के लिए होता है. उम्मीद करता हूं कि आने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप 2017 में मैं बहुत अच्छा प्रदर्शन करूंगा. हिन्दुस्तान को यह भरोसा दिलाऊंगा कि मैं ही सबसे बेहतर था.
 
क्या देवेंद्र झाझड़िया ने भी आपको इंफॉर्म नहीं किया, वे उस वक्त आपके साथ थे और अंदर भी चले गए थे?
ऐसा तो कुछ नहीं था, ऐसा तो वह बोलेंगे क्योंकि वह मेरे प्रतिद्वंदी थे, लेकिन मुझे किसी ने नहीं बताया. कुलदीप और भारद्वाज वहीं थे और जेवलिन थ्रो से वार्मअप करा रहे थे. वे झाझड़िया को अंदर भेजकर आए थे, लेकिन मुझे एक बार भी नहीं बोला.

क्या आपको पहले भी लगा कि आपके साथ साजिश हो रही है?
मैं किसी के दिल के अंदर की बात कैसे जान सकता हूं. अगर मैं जान जाता तो मैं टाइम से अंदर पहुंच जाता. एक मिनट क्यों लेट होता. कोई बात नहीं, मेरी किस्मत ही ऐसी थी कि मैं दुनिया को नहीं दिखा पाया कि वास्तव में मैं ही सबसे बेहतरीन खिलाड़ी था. भगवान ने आज साथ नहीं दिया, कल नहीं देगा, परसों नहीं देगा, कभी तो भगवान साथ देगा, मैं दिखाऊंगा ज़रूर, मर जाऊंगा, बूढ़ा हो जाऊंगा, लेकिन लड़ता रहूंगा.

आप बहुत बड़े दावेदार थे, इसके बाद कितने मायूस हैं?
मैं 10 मीटर से आगे था. 10 मीटर बहुत होता है. क्या रिजल्ट मिला, ज़ीरो. इन लोगों की गलती ने मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी. मेरी जिंदगी नर्क बना दी. मैं अब कैसे जिऊंगा सर.

आपके पर्सनल कोच भी वहीं थे, क्या उन्होंने आपको कोई इशारा नहीं दिया?
मेरे पर्सनल कोच महावीर जी सिर्फ़ ट्रेनिंग के लिए आए थे. उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं थी. वे चुपके से थोड़ा अंदर गए थे.. फिर उन्होंने बोला अंदर जाओ, मैं बैग वापस लेने आया तो 1 मिनट लेट हो गया. सारी गलती दीपक भारद्वाज की थी, इन लोगों को मुझे नियम बताना चाहिए था, क्योंकि ये लोग ऑफ़िशियल मीटिंग में गए थे और इन लोगों को नियम पता थे.

SAI ने कहा कि आपको कई बार सूचना दी गई, लेकिन आपने नहीं सुना, क्या यह सच है?
जिसने यह कहा है उस शख्स को मेरे सामने लाकर बुलवा दें तो मैं मान लूंगा.

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इसमें सबसे बड़ी गलती आपको किसकी नजर आती है?
इसमें गलती SAI के अधिकारियों, अफ़सरों और दीपक भारद्वाज की है, क्योंकि ओलिंपिक शुरू होने से पहले जो ऑफ़िशियल मीटिंग होती है उसमें सारे नियम बताए जाते हैं, लेकिन इन्होंने किसी खिलाड़ी को एक भी नियम नहीं बताया. अगर मुझे यह नियम पता होता कि 1 मिनट लेट होने पर बाहर हो सकते हो तो मैं ऐसी गलती क्यों करता, आज हिन्दुस्तान ने एक मेडल खोया है तो इन लोगों की बदौलत खोया है.