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देश में टेबल-टेनिस के खेल को भी पीवी सिंधु जैसी रोल मॉडल की जरूरत : मनिका बत्रा

टेबल.टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा का कहना है किभारत में इस खेल ने तेजी से विकास किया है लेकिन इसमें और अधिक रफ्तार लाने के लिए इस खेल को पीवी सिंधु जैसी रोल मॉडल की जरूरत है.

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देश में टेबल-टेनिस के खेल को भी पीवी सिंधु जैसी रोल मॉडल की जरूरत : मनिका बत्रा

मनिका बत्रा विश्व रैंकिंग में 104वें नंबर की टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. विश्‍व रैंकिंग में 104वें नंबर की खिलाड़ी हैं मनिका
  2. चिली ओपन में मनिका बत्रा जीत चुकी हैं रजत पदक
  3. टेबल टेनिस की खातिर मॉडलिंग का ऑफर ठुकरा दिया था
नई दिल्ली: भारत की सर्वोच्च वरीयता प्राप्त महिला टेबल.टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा का कहना है कि बीते कुछ सालों की तुलना में भारत में इस खेल ने तेजी से विकास किया है लेकिन इसमें और अधिक रफ्तार लाने के लिए इस सुंदर खेल को पीवी सिंधु जैसी रोल मॉडल की जरूरत है. सिंधु इन दिनों बैडमिंटन में देश का नाम रोशन कर रही हैं. विश्व रैंकिंग में 104वें नंबर की खिलाड़ी मनिका ने आईएएनएस के साथ बातचीत में यह बात कही. वह पंजाबी बाग स्थित हंसराज मॉडल स्कूल में इंटर स्कूल टेबल-टेनिस स्टेट चैम्पियनशिप में खिलाड़ियों की हौसलाअफजाई के लिए पहुंची थीं. मनिका खुद इस स्कूल की छात्रा रही हैं और उनके गुरू और कोच संदीप गुप्ता इसी स्कूल में अकादमी चलाते हैं, जहां वह अभ्यास करती हैं. मनिका भारत की सर्वोच्च वरीय महिला खिलाड़ी हैं.

मनिका ने कहा, "बीते कुछ सालों में हमारे खिलाड़ियों ने काफी अच्छा विकास किया है. पेशेवर लीग के आने से यह खेल काफी आगे बढ़ा है और बढ़ता रहेगा लेकिन इसमें रफ्तार आए, इसके लिए इस खेल को पीवी सिंधु जैसी रोल मॉडल की जरूरत है, जो अपने ही नहीं बल्कि दूसरे खेलों से जुड़ी युवा पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं. मैं भी सिंधु से काफी प्रभावित हूं और उनके जैसे ही देश के लिए सर्वोच्च स्तर पर पदक जीतना चाहती हूं." गौरतलब है कि रियो ओलिंपिक में रजत पदक जीतने वाली सिंधु ने हाल ही में ग्लासगो में आयोजित बैडमिंटन विश्व चैम्पियनशिप में अपनी चमक दिखाते हुए फाइनल तक का रास्ता तय किया और रजत हासिल किया. वह फाइनल में जापान की निजोमी ओकुहारा से हार गईं. सिंधु विश्व चैम्पियनशिप में एक रजत और दो कांस्य जीत चुकी हैं.

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मनिका ने 2011 में चिली ओपन में यू-21 वर्ग में रजत पदक जीतकर अपने करियर की शानदार शुरुआत की लेकिन वह राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और ओलिंपिक में अब तक चमक नहीं दिखा सकी हैं. 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों और ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में वह क्वार्टर फाइनल में हार गईं जबकि रियो ओलिंपिक में उन्हें पहले ही दौर में हार मिली. मनिका ने 2016 दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था. अपने करियर को लेकर मनिका ने कहा, "मैं अब काफी फोकस्ड हूं. मेरे खेल में बीते दिनों की तुलना में काफी सुधार हुआ है. पेशेवर लीग के आने से मुझे काफी फायदा मिला है और अब मैं खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर राष्ट्रमंडल खेलों (गोल्ड कोस्ट) तथा एशियाई खेलों (जकार्ता) के लिए तैयार कर रही हूं. मेरा लक्ष्य इन आयोजनों में पदक जीतना है और इसी दिशा में मैं अपने कोच के साथ मेहनत कर रही हूं."

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टेबल-टेनिस पर फोकस करने के लिए जीसस एंड मेरी कॉलेज की पढ़ाई छोड़ चुकीं मनिका ने 16 साल की उम्र में स्वीडन के पीटर कार्लसन अकादमी में प्रशिक्षण के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. यही नहीं, इस दौरान छह फुट एक इंच लम्बी मनिका को मॉडलिंग का भी ऑफर मिला था लेकिन वह इन सबसे दूर खुद को टेनिस को समर्पित करना चाहती थीं. हाल ही में सम्पन्न अल्टीमेट टेबल टेनिस लीग में ओएस योद्धाज टीम का प्रतिनिधित्व करने वाली मनिका ने कहा कि उनकी जीवन की प्रेरणा उनकी मां हैं और टेबल-टेनिस में वह शरथ कमल को आदर्श मानती हैं. उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं शरथ के कारण टेबल टेनिस का खेल लोगों के बीच जाना-पहचाना नाम है, लेकिन अभी लंबा सफर तय करना है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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