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'इन शूटरों' ने बिखेरी साल 2017 में चमक....पर मिला 'यह बड़ा गम'!

भारत के युवा निशानेबाजों ने साल 2017 में रेंज पर अपनी प्रतिभा की बेमिसाल बानगी पेश करते हुए भविष्य के लिए उम्मीदें जगाई हैं

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'इन शूटरों' ने बिखेरी साल 2017 में चमक....पर मिला 'यह बड़ा गम'!

खास बातें

  1. इलावेनिल वालारिवन, मेघना सज्जनार, मेहुली घोष सहित कई ने दिखाया दम
  2. अगले साल कई बड़े टूर्नाेमेंट हैं सामने
  3. क्या बढ़ पाएगी पदकों की संख्या?
नई दिल्ली: भारत के युवा निशानेबाजों ने साल 2017 में रेंज पर अपनी प्रतिभा की बेमिसाल बानगी पेश करते हुए भविष्य के लिए उम्मीदें जगाई हैं जबकि अगले साल कई महत्वपूर्ण टूर्नामेंट खेले जाने हैं. अगले साल राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और विश्व चैंपियनशिप होने वाली है जिनमें नामी गिरामी निशानेबाज अपने तमगों की तादाद बढ़ाने और उदीयमान निशानेबाजी अपनी छाप छोड़ने के इरादे से उतरेंगे. लेकिन इसी के साथ ही उन्हें एक बड़ा गम भी मिला है.  

भारतीय निशानेबाजों में से इलावेनिल वालारिवन, मेघना सज्जनार, मेहुली घोष, अनीश भानवाला, शपथ भारद्वाज ने उम्दा प्रदर्शन किया. इनके साथ ही सौरभ चौधरी, अखिल शेरोन, यशस्विनी सिंह देसवाल और अंगद वीर सिंह बाजवा के प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि भारतीय निशानेबाजी का भविष्य उज्ज्वल है. सीनियर स्तर पर डबल ट्रैप निशानेबाज अंकुर मित्तल ने कामयाबी की नई दास्तान लिखते हुए आईएसएसएफ विश्व कप में रजत और स्वर्ण पदक जीते ।

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अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने तोक्यो ओलंपिक 2020 से ओलंपिक पदकों में लैंगिक समानता लाने के मकसद से अपने टूर्नामेंटों के नियमों में बदलाव किया है. डबल ट्रैप, प्रोन, 50 मीटर पिस्टल अब ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है और मित्तल, जीतू राय तथा गगन नारंग जैसे दिग्गज निशानेबाज बदलाव को तैयार हैं.

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हालांकि, देश के शूटरों को साल के आखिर में बड़ा गम भी मिला क्योंकि बर्मिंघम में 2022 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में लॉजिस्टिक से जुड़े मसलों के कारण इसे हटाया जा सकता है.


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