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असली दंगल से क्यों छिटक रहे हैं दर्शक: क्या गोल्ड मेडल को लेकर आपको भी शिकायत है?

इकलौते फैन की तालियां पूरी कुश्ती के दौरान छह मिनट तक बजती रहीं. शायद इकलौते सरदार की तालियां बहुत असर ना दिखा पाईं. जिस टूर्नामेंट में क़रीब 300 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं वहां फ़ैन्स की संख्या मुश्किल से सौ भी नहीं पहुंच पा रहीं.

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असली दंगल से क्यों छिटक रहे हैं दर्शक: क्या गोल्ड मेडल को लेकर आपको भी शिकायत है?

एशियाई चैंपियनशिप दंगल में साक्षी मलिक ने सिल्वर मेडल जीता, इस मैच को देखने केवल एक दर्शक पहुंचा.

खास बातें

  1. RIOओलिंपिक में कांस्य विजेता साक्षी ने एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर जीतीं
  2. मुकाबला देखने केवल एक दर्शक पहुंची, 6 मिनट तक बजाई ताली
  3. फ़ोगाट बहनों विनीश और रितु ने भी टूर्नामेंट में पदक जीते
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एशियाई चैंपियनशिप दंगल चल रही है. पांच दिनों तक चलनेवाले इस टूर्नामेंट के तीसरे दिन ओलिंपिक की कांस्य पदक विजेता एथलीट साक्षी मलिक फाइनल के लिए आईं तो उनकी चाल-ढाल शेरों जैसी ही दिखी. लेकिन दर्शक दीर्घा में एक बूढ़ा फ़ैन तालियां बजाकर साक्षी का हौसला बढ़ाने की पूरी कोशिश करता रहा. हैरत की बात ये रही कि इस इकलौते फ़ैन की तालियां पूरी कुश्ती के दौरान छह मिनट तक बजती रहीं. शायद इकलौते सरदार की तालियां बहुत असर ना दिखा पाईं. जिस टूर्नामेंट में क़रीब 300 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं वहां फ़ैन्स की संख्या मुश्किल से सौ भी नहीं पहुंच पा रहीं.
 
साक्षी सिल्वर जीत पाईं उसकी कई वजहें हैं. रियो ओलिंपिक की कामयाबी के बाद साक्षी का ज़्यादातर वक्त समारोह की शोभा बढ़ाने में बीता. इस टूर्नामेंट में वो बहुत तैयारी के साथ नहीं आ सकीं. 58 किलोग्राम वर्ग में कुश्ती लड़ने वाली साक्षी का वजन बढ़ने की वजह से उन्हें 60 किलोग्राम वर्ग में लड़ना पड़ा. फाइनल में उनकी टक्कर जापान की उस पहलवान से हुई, जिन्होंने (जापान की रिसाको कवाई) 63 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था. रियाको वजन घटाकर 60 किलोग्राम में लड़ने आईं उसका फायदा भी उन्हें जरूर मिला. रिसाको ने साक्षी को 10-0 से हरा दिया. लेकिन कुश्ती का ये स्कोरकार्ड क्रिकेट के स्कोरकार्ड से बेहद अलग है. इसमें साक्षी की कोशिश और तमाम दूसरी वजहें कहीं नज़र नहीं आतीं.

माना जा रहा था कि दिल्ली में हो रहे एशियाई चैंपियनशिप में ओलिंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक सबसे बड़ा स्टार आकर्षण बनेंगी. साक्षी के अलावा दो फ़ोगाट बहनों (विनीश और रितु फ़ोगाट) ने भी टूर्नामेंट के तीसरे दिन पदक जीते. लेकिन दर्शकों की कमी खलती रही. फिर भी गोल्ड ना मिलने को लेकर फ़ैन्स शिकायत जरूर करते हैं मीडिया सुर्ख़ियां बनाकर निशाना बनाने से नहीं चूकतीं. मीडिया भी ये जिक्र करना नहीं चाहती, जिस दंगल फ़िल्म ने 700 करोड़ रुपये की कमाई की उसे देखने लाखों लोग थिएटर गए. लेकिन असली दंगल से फ़ैन्स छिटकते रहे. रियो ओलिंपिक में कामयाब साक्षी मलिक क़रीब 8 महीने बाद एशियाई चैंपियनशिप के फ़ाइनल में पहुंचीं तो कई जानकार बड़ी उम्मीद बांधने लगे. साक्षी ये कहते हुए वॉर्म अप एरिया में वापस आईं, "पहले सिल्वर के लिए भी लोग तरसते थे...अब जीता है तो...." साक्षी ने NDTV से ख़ास बातचीत में वादा किया कि अगली वर्ल्ड चैंपियनशिप में फ़ैन्स असली साक्षी को देखेंगे. जाहिर तौर पर वो अपने प्रदर्शन से बेहद खुश नहीं थीं. 

आमिर खान की फिल्म दंगल ने करोड़ो कमाए. फिल्म को देखने लोग सिनेमा हाल में जमकर उमड़े. थिएटर हाउसफुल रहे और फिल्म के जरिये पैसों की बारिश होती रही. लगा कुश्ती के दिन फिरने वाले हैं. लेकिन भारत की तीन महिला पहलवान देश की  राजधानी दिल्ली में एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में गोल्ड के लिए दमदार प्रदर्शन करती रहीं पर फैंस नदारद ही हैं.
 
मुकाबलों में भारत की तीन महिला खिलाड़ी फाइनल में हार गई. मीडिया और फैन्स को शिकायत है कि खिलाड़ियों, खासकर साक्षी को सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा. महिला पहलवानों ने दूसरे दिन एक कांस्य और तीन रजत अपने नाम किए, लेकिन साक्षी की हार की मायूसी बड़ी खबर बन गई.
 
एशियाई चैंपियनशिप (10-14 मई) के दौरान खिलाड़ी से लेकर आयोजन में कई कमियां नजर आ रही हैं. लेकिन जापान और मंगोलिया जैसे कुश्ती पावरहाउस टीमों के सामने भारतीय खिलाड़ियों को खुद को आंकने का मौक भी मिल गया. ये टूर्नामेंट एक सबक है ना सिर्फ खिलाड़ी और आयोजकों के लिए बल्कि खेलों में रुचि रखने वाले फैन्स के लिए और हमेशा पदक की उम्मीद कर खिलाड़ी और सिस्टम को कोसने वाले फैन्स के लिए भी.
 


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