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लियोनेल मेसी से मिलकर सुर्खियों में आया था नन्‍हा मुर्तजा, अब बेघर होकर खौफ के साये में जीने को मजबूर

अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी लियोनेल मेसी (Lionel Messi) के नाम की प्लास्टिक की जर्सी पहनकर नन्हे मुर्तजा अहमादी (Murtaza Ahmadi) ने 2016 में एक फोटो के जरिए रातोंरात सुर्खियां बटोरी थीं.

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लियोनेल मेसी से मिलकर सुर्खियों में आया था नन्‍हा मुर्तजा, अब बेघर होकर खौफ के साये में जीने को मजबूर

लियोनेल मेसी के साथ मुर्तजा अहमादी का यह फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना था

खास बातें

  1. अफगानिस्‍तान के गाजी प्रांत में रहता था मुर्तजा
  2. तालिबान के हमले के कारण हो गया है बेघर
  3. सात साल के मुर्तजा केा घर छोड़कर भागना पड़ा
काबुल:

अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी लियोनेल मेसी (Lionel Messi) के नाम की प्लास्टिक की जर्सी पहनकर फुटबॉल खेलने वाले नन्हे मुर्तजा अहमादी (Murtaza Ahmadi) ने 2016 में एक फोटो के जरिए रातोंरात सुर्खियां बटोरी थीं लेकिन यह बच्‍चा अब गुमनामी और गरीबी के अंधकार में जीने को मजबूर है. मेसी का यह प्रशंसक इस समय बेघर है. अफगानिस्तान (Afghanistan) के गाजी प्रांत के जाघोरी जिले में रहने वाले मुर्तजा के इलाके पर तालिबान द्वारा हमला किया गया और इस कारण दो-तिहाई जनता को बेघर होना पड़ा है. गौरतलब है कि मुर्तजा (Murtaza Ahmadi) की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें उसे मेसी की अर्जेंटीना टीम की 10 नम्बर की जर्सी पहने हुए देखा गया था. यह जर्सी मुर्तजा के बड़े भाई ने प्लास्टिक की पन्नी से बनाई थी. मुर्तजा की इस फोटो ने इतनी सुर्खियां बटोरी थी कि खुद मेसी इस नन्हे प्रशंसक से मिले थे और उसे अपनी एक जर्सी भी भेंट की थी.

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वक्‍त गुजरने के साथ सात साल के मुर्तजा (Murtaza Ahmadi)को तब अपने परिवार के साथ अपना ही घर छोड़कर भागना पड़ गया, जब उसके इलाके में तालिबान द्वारा हमला किया गया. समाचार एजेंसी एफे की रिपोर्ट के अनुसार, मुर्तजा का परिवार पिछले दो सप्ताह से काबुल में रह रहा है. मुर्तजा ने कहा, "मुझे जाघोरी में अपने घर की याद आती है. यहां मेरे पास फुटबॉल भी नहीं है. मैं खेल नहीं सकता और बाहर नहीं जा सकता." बार्सिलोना के स्टार मेसी को दिए एक संदेश में मुर्तजा ने कहा, "मुझे अपने साथ ले जाइए. मैं यहां फुटबॉल नहीं खेल सकता. यहां सिर्फ बंदूकों और धमाकों की आवाज है."मुर्तजा (Murtaza Ahmadi) अपने परिवार के साथ एक छोटे से किराए के घर में रहता है. उनके इस घर में उनके पड़ोसी भी साथ रहते हैं. बातचीत के दौरान मुर्तजा से जब मेसी की ओर से मिली जर्सी और फुटबॉल के बारे में पूछा गया, तो वह भावुक हो गया.

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मुर्तजा ने कहा, "हम उन्हें जाघोरी में पीछे छोड़ आए. मैं उन्हें साथ नहीं ला पाया, क्योंकि मुझे आधी रात में अपना घर छोड़ना पड़ा. मेरी मां ने मुझे कहा कि जर्सी और फुटबॉल को घर में ही छोड़ दो." अफगानिस्तान के सुरक्षाबलों ने तालिबानी विद्रोहियों को जाघोरी से निकाल दिया है, लेकिन मुर्तजा का परिवार अब लौटना नहीं चाहता. उन्हें मुर्तजा के सुर्खियां बटोरने के कारण हमले से पहले भी फोन पर धमकियां मिल रहीं थी.

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मुर्तजा के बड़े भाई हुमायूं अहमादी (17) ने कहा, "कतर में मेसी से मुर्तजा की मुलाकात से लौटने के बाद हमारे लिए जीना मुश्किल हो गया. हम डर में रह रहे थे, क्योंकि हमारे आसपास के लोगों को लगता था कि मेसी ने हमें काफी धन दिया है." हुमायूं ने कहा कि अनजान लोग उनके घर के आसपास घूम रहे थे. उन्हें अपहरण और अन्य प्रकार के हमले का डर था. ऐसे में मुर्तजा को पिछले दो साल से स्कूल भी नहीं जाने दिया गया और घर पर ही बंद रखा गया.

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मुर्तजा का परिवार मई, 2016 में अमेरिका में शरण मिलने की आस में पाकिस्तान चला गया था लेकिन उनकी शरण की अपील रद्द कर दी गई और उन्हें अपने गांव लौटना पड़ा. दो साल बाद भी मुर्तजा उस वादे को नहीं भूला है, जो मेसी ने कतर में मुलाकात के दौरान उससे किया था. मेसी ने कहा था कि थोड़ा बड़ा हो जाने के बाद वह उसके लिए सभी चीजों का इंतजाम करेंगे लेकिन मेसी ने उसके बाद एक भी बार उससे बात नहीं की. सात वर्षीय मुर्तजा की मां शफीका ने एजेंसी से कहा, "जब भी मुर्तजा धमाके या गोलीबारी की आवाज सुनता है, तो डर के मारे दौड़कर चादर के अंदर घुस जाता है."



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