गोपीचंद ने कहा, हम अभी भी बैडमिंटन में चीन से बहुत पीछे हैं, यह बताया कारण...

भारत के पुरुष एवं महिला बैडमिंटन खिलाड़ी इस समय अपनी कामयाबी से सबका ध्‍यान आकर्षित कर रहे हैं.

गोपीचंद ने कहा, हम अभी भी बैडमिंटन में चीन से बहुत पीछे हैं, यह बताया कारण...

रियो ओलिंपिक में सिल्‍वर मेडल जीतने वाली पीवी सिंधु के कोच गोपीचंद ही हैं (फाइल फोटो)

खास बातें

  • गोपीचंद बोले, हमारे कोच और सहयोगी स्‍टाफ स्‍तरीय नहीं
  • पिछले 25 साल से हमारा एक ही तरह का घरेलू ढांचा है
  • लगातार अच्‍छा प्रदर्शन करके ही हम ऐसा दावा कर सकते हैं
नई दिल्ली:

भारत के पुरुष एवं महिला बैडमिंटन खिलाड़ी इस समय अपनी कामयाबी से दुनियाभर का ध्‍यान आकर्षित कर रहे हैं. खिलाड़ि‍यों के अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर इस तरह उभरकर आने में राष्‍ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद का बड़ा हाथ माना जा रहा है, इसके बावजूद गोपी का मानना है कि बैडमिंटन में विश्‍व शक्ति बनने के मामले में भारत अभी चीन से काफी पीछे है. उन्‍होंने कहा कि  बैडमिंटन सुपर पावर बनने के लिये घरेलू ढांचे और प्रशासन में आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत पड़ेगी.

प्रतिष्ठित आल इंग्‍लैंड बैडमिंटन चैंपियन रह चुके गोपीचंद ने कहा, 'मुझे लगता है कि हम अभी भी चीन से काफी पीछे हैं. मुझे नहीं लगता कि यह सही तुलना होगी.' उन्‍होंने कहा कि हमने अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन मैं विश्व चैंपियनशिप, ओलिंपिक और ऑल इंग्लैंड में अच्छा प्रदर्शन चाहता हूं. लगातार अच्छा प्रदर्शन करने पर ही हम ऐसी बात कर सकते हैं. ' गोपी ने कहा कि जो भी देश अच्छा प्रदर्शन करते हैं उनके खिलाड़ी लगातार आगे बढ़ रहे हैं. उनके साथ कोच और सहयोगी स्टाफ भी बेहतर कर रहे है और इसके अलावा सरकारी ढांचा और नीतियां भी अनुकूल बन रही हैं. हमें भी इसकी जरूरत है.

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उन्‍होंने कहा कि हमारे यहां अभी हमारे खिलाड़ी तो आगे बढ़ रहे हैं लेकिन हमारे कोच, सहयोगी स्टाफ और मैनेजर उस स्तर के नहीं हैं.' भारतीय शटलर विशेषकर किदाम्बी श्रीकांत की अगुवाई वाले पुरुष खिलाड़ियों ने हाल में अच्छा प्रदर्शन किया है. महिला और पुरुष वर्ग में पिछली छह में से चार सुपर सीरीज में भारतीय खिलाड़ी विजेता रहे हैं. पीवी सिंधु ने इंडिया ओपन में जीत दर्ज की जबकि प्रणीत ने सिंगापुर में अपना पहला सुपर सीरीज खिताब जीता. इसके बाद श्रीकांत ने इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में लगातार दो खिताब अपने नाम किए.

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गोपीचंद ने घरेलू टूर्नामेंटों के स्तर और प्रशासन की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि हमारे टूर्नामेंट और प्रशासन विश्व स्तरीय नहीं है. हमारे पास अब भी 1991 के आधार पर चलाए जा रहे टूर्नामेंट हैं. इस तरह से पिछले 25 वर्षों से हमारा एक ही तरह का घरेलू ढांचा है. वही राष्ट्रीय चैंपियनशिप, उसी तरह की रैंकिंग और उसी तरह की सोच. राज्य स्तर पर हम उसी तरह के कोच पैदा कर रहे हैं.