यह ख़बर 29 अगस्त, 2012 को प्रकाशित हुई थी

महिला मुक्केबाजों को विदेशी कोच की जरूरत : मैरीकॉम

महिला मुक्केबाजों को विदेशी कोच की जरूरत : मैरीकॉम

खास बातें

  • ओलिंपिक क्वालीफाइंग राउंड से पहले मैरीकॉम विदेशी कोच से प्रशिक्षण लेना चाहती थी, लेकिन खेल मंत्रालय ने उनकी यह मांग नामंजूर कर दी थी।
मुंबई:

लंदन ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली एमसी मैरीकॉम ने बुधवार को कहा कि विदेशी प्रशिक्षकों के रहने से देश की महिला मुक्केबाजों को फायदा होगा।

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मैरीकॉम ने मुंबई में प्रचार कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा, 'निश्चित तौर पर हमें विदेशी प्रशिक्षकों की जरूरत है। मैंने भारतीय कोचों के साथ कई वर्षों तक अभ्यास किया और ओलिंपिक के बाद हमें विदेशी कोचों से भी कुछ सीखने की जरूरत है।'

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ओलिंपिक क्वालीफाइंग राउंड से पहले मैरीकॉम विदेशी कोच से प्रशिक्षण लेना चाहती थी, लेकिन खेल मंत्रालय ने उनकी यह मांग नामंजूर कर दी थी। पुरुष मुक्केबाजों को दूसरी तरफ क्यूबा के केबीआई नॉर्डिस से कोचिंग मिल रही थी, जो द्रोणाचार्य पुरस्कार हासिल करने वाले पहले विदेशी कोच बन गए हैं। वह पिछले एक दशक से अधिक समय से पुरुष मुक्केबाजों को कोचिंग दे रहे हैं।
 
मैरीकॉम ने कहा कि वह 2016 में रियो डि जेनेरियो में होने वाले ओलिंपिक खेलों में भाग लेना चाहती हैं, जहां वह एक और पदक जीतने की कोशिश करेंगी। मैरीकॉम ने कहा, 'यदि 46 या 48 किलोग्राम में बाउट होगी तो मैं निश्चित तौर पर स्वर्ण पदक लेकर आऊंगी। यदि 46 से 48 किलोग्राम की बाउट नहीं होती हैं तब भी मैं अपने पदक का रंग बदलने की कोशिश करूंगी।'