NDTV Khabar

जूते न होने के कारण फीफा वर्ल्ड कप नहीं खेल पाया था भारत, जानिए क्या है सच्चाई

अक्सर एक किस्सा सुना दिया जाता है कि 1950 के फुटबॉल विश्व कप में सम्मिलित होने के लिए भारतीय फुटबॉल टीम पहुंची तो थी लेकिन खिलाड़ियों के पास जूते ना होने के कारण उन्होंने मैच नहीं खेला. लेकिन क्या ये बात सच है.

249 Shares
ईमेल करें
टिप्पणियां
जूते न होने के कारण फीफा वर्ल्ड कप नहीं खेल पाया था भारत, जानिए क्या है सच्चाई

1950 फीफा वर्ल्ड कप में भारत क्वालिफाई कर गया था और नाम वापिस ले लिया था.

खास बातें

  1. 1950 फीफा वर्ल्ड कप में भारत क्वालिफाई कर गया था
  2. क्वालिफाई के बावजूद नाम वापिस ले लिया था
  3. टीम ने 1951 और 1962 के एशियाई खेलों में गोल्ड जीता था
नई दिल्ली: फीफा अंडर-17 विश्व कप का इंतजार खत्म होने को है. महज चार दिन बाद दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में इसकी शुरुआत होने जा रही है. भारत में पहली बार फीफा का कोई टूर्नामेंट हो रहा है. टूर्नामेंट में कुल 24 टीमें खेलेंगी. छह अक्टूबर को शुरू हो रहे इस टूर्नामेंट में 52 मैच होंगे. इसका फाइनल 28 अक्टूबर को कोलकाता में होगा. फीफा अंडर-17 विश्व कप का इंतजार खत्म होने को है. महज चार दिन बाद दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में इसकी शुरुआत होने जा रही है. भारत में पहली बार फीफा का कोई टूर्नामेंट हो रहा है. टूर्नामेंट में कुल 24 टीमें खेलेंगी. छह अक्टूबर को शुरू हो रहे इस टूर्नामेंट में 52 मैच होंगे.

पढ़ें- 6 अक्टूबर से शुरू होगा अंडर-17 फीफा वर्ल्ड कप, जानिए कब और कहां होंगे मुकाबले

इसका फाइनल 28 अक्टूबर को कोलकाता में होगा. हम आपको बताने जा रहे हैं फीफा वर्ल्ड कप से जुड़े ऐसे ही बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं. एक समय था जब फीफा वर्ल्ड कप में भारत का डंका बजा करता था. क्या आपको पता है 1950 फीफा वर्ल्ड कप में भारत क्वालिफाई कर गया था. लेकिन भारत ने अपना नाम  वापिस ले लिया था. आइए जानते हैं आखिर वजह क्या थी.

पढ़ें- फुटबॉल के खेल और इसके सितारों के बारे में अपनी जानकारी को परखिए..​
 
1950 fifa

अक्सर एक किस्सा सुना दिया जाता है कि 1950 के फुटबॉल विश्व कप में सम्मिलित होने के लिए भारतीय फुटबॉल टीम पहुंची तो थी लेकिन खिलाड़ियों के पास जूते ना होने के कारण उन्होंने मैच नहीं खेला. लेकिन क्या ये बात सच है. 1948 के ओलंपिक खेलों में भारत के खिलाड़ियों ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से विश्व के खेलप्रेमियों को अपना मुरीद बना लिया था.  इस दौरान कई भारतीय खिलाड़ी नंगे पैर या मोजे में खेलते नजर आए इस बात ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला था.

पढ़ें- फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप के लिए रेफरी नियुक्त 

अब अगले कुछ सालों में फुटबॉल महाकुंभ फीफा विश्व कप शुरू होने वाला था. भारत के खिलाड़ी पहले से ही ओलंपिक में नंगे पैर खेलते नजर आए थे तो फीफा ने भारतीय टीम को आगाह करते हुए कह दिया कि अगर वे टूर्नामेंट में खेलना चाहते हैं तो उन्हें जूते पहनने होंगे. टीम इंडिया को एशिया महाद्वीप की तरफ से एकमात्र टीम के रूप में अपने आप फीफा में शामिल होने के लिए जगह मिल गई.  लेकिन टीम इंडिया फीफा वर्ल्ड कप खेलने नहीं गई.
 
1950 fifa

खेल पत्रिका स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड (Sports Illustrated) की मानें तो ये सभी तथ्य गलत हैं. Sports Illustrated का कहना है कि AIFF के लिए ओलंपिक सबसे ज्यादा जरूरी खेल प्रतियोगिता थी और फुटबॉल विश्व कप के बारे में वो ज्यादा उत्साहित नहीं थे. पत्रिका ने 1950 में टीम के कप्तान रहे सेलन मन्ना से बात की और मन्ना के मुताबिक टीम को उस समय वर्ल्ड कप की अहमियत का अंदाजा नहीं था. टीम और खिलाड़ियों के लिए ओलंपिक ही सबसे बड़ा खेल आयोजन था. AIFF ने कथित तौर पर खिलाड़ियों के चयन में दिक्कत और प्रैक्टिस के लिए कम समय होने को FIFA के सामने एक बड़ी वजह के तौर पर रखा और टूर्नामेंट में भाग नहीं लिया.

टीम ने 1951 और 1962 के एशियाई खेलों में टीम ने गोल्ड मेडल जीता, 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में टीम इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों को पछाड़कर चौथे नंबर पर रही थी. ये सब देखकर यही लगता है कि खेल इतिहास में शायद भारत से इतनी बड़ी चूक कभी नहीं हुई.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement