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Janmashtami 2019: इस वचन के कारण नहीं हो पाई राधा और कृष्ण की शादी, पढ़ें पूरी अलौकिक प्रेम कथा

Janmashtami 2019: हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के आठवें अवतार नटखट नंदलाल यानी श्री कृष्ण (Krishna) ने जन्माष्टमी के दिन ही जन्म लिया था. आइए जानते हैं राधा-कृष्ण का शादी आखिर क्यों नहीं हो पाई थी...

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Janmashtami 2019: इस वचन के कारण नहीं हो पाई राधा और कृष्ण की शादी, पढ़ें पूरी अलौकिक प्रेम कथा

Janmashtami 2019: राधा और कृष्ण (Radha Krishna) की अलौकिक प्रेम कथा

खास बातें

  1. भारत के साथ विश्व के कई हिस्सों में मनाई जा रही है जन्माष्टमी
  2. जन्माष्टमी पर प्रस्तुत की जाती हैं राधा और कृष्ण की अलौकिक लीलाएं
  3. एक वचन के कारण नहीं हो पाई थी राधा और कृष्ण की शादी
नई दिल्ली:

Janmashtami 2019: हिंदुओं का प्रमुख त्योहार जन्माष्टमी (Janmashtami) आज भारत के साथ-साथ विश्व के भी कई हिस्सों में बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के आठवें अवतार नटखट नंदलाल यानी श्री कृष्ण (Krishna) ने इसी दिन जन्म लिया था. इस त्योहार पर चारों तरफ धूम मची होती है. कहीं मां यशोदा और नंदलाल की झाकियां तो कहीं भगवान कृष्ण (Lord Krishna) की लीलाएं प्रस्तुत की जाती हैं. भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव (Krishna Janmotsav) हो और उनकी लीलाओं में राधा का जिक्र न हो, ऐसा संभव ही नहीं है. राधा-कृष्ण (Radha-Krishna) की अलौकिक प्रेम कथाओं से हर कोई परिचित है. पौराणिक कथाओं में कृष्ण को रास लीला करते हुए और राधा को उनके प्रेम में डूबे हुए दिखाया गया है. दोनों का वैवाहिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रिश्ता था. लेकिन आज भी लोगों के मन में यह सवाल है कि दोनों ने शादी क्यों नहीं की. 

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स्टार भारत पर दिखाए जाने वाली पौराणिक कथा 'राधा कृष्ण (Radha Krishn)' के अनुसार राधा की शादी कृष्ण (Lord Krishna) से तय हो जाती है लेकिन वह अपने पिता के एक वचन के कारण श्री कृष्ण से शादी नहीं कर पातीं. राधा रानी के पिता वृषभान ने अपने परम मित्र उग्रपत को वचन दिया होता है कि वह अपने जीवन में एक बार उनसे कुछ भी मांग सकते हैं. राधा और कृष्ण की शादी से पहले उग्रपत राधा के पिता को उनका यह वचन याद दिलाते हैं और कहते हैं कि वह अपनी बेटी राधा का विवाह कृष्ण से न करवाकर उनके बेटे अयन (अभिमन्यु)  से करवा दें. वचन को याद दिलाने के बाद उग्रपत वृषभान से कहते हैं कि अगर उन्होंने यह वचन तोड़ा तो उन्हें बरसाना छोड़कर जाना पड़ेगा.(देखें राधा-कृष्ण का स्पेशल एपिसोड)

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राधा (Radha) के पिता वृषभान अपनी पुत्री की खुशी के लिए अपने मित्र को दिए वचन को तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं. इसके साथ ही वह बेटी के विवाह के बाद बरसाना छोड़कर जाने के लिए भी तैयार हो जाते हैं. लेकिन जैसे ही यह बात उग्रपत की पत्नी जटिला को पता चलती है तो वह उसी समय वृषभान को बरसाना से निष्काषित करवाने और उन्हें वचन तोड़ने का दंड देने का फैसला कर लेती हैं. इसके साथ ही जटिला राधा के पास जाकर उनपर उनके माता-पिता का जीवन छीनने का आरोप लगाती है. इस वचन के बारे में श्री कृष्ण को पता चल जाता है. आखिर में राधा अपने माता-पिता की खातिर विवाह को तैयार हो जाती है. इससे इतर श्रीधर ने भी राधा और कृष्ण को 100 वर्षों तक वियोग का श्राप दिया था. इस श्राप के कारण ही श्री कृष्ण और राधा के विवाह में विघ्न आए. (देखें राधा कृष्ण का स्पेशल एपिसोड)

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