TENNIS: इसलिए आईटीए ने किया अपने संविधान में संशोधन

अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ की मतदान प्रक्रिया के अनुसार एआईटीए ने अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों को अधिक मत दिये थे जिससे एमएसएलजीए, केएसएलजीए और टीएनटीए की भूमिका चुनाव में दूसरों से महत्वपूर्ण होती थी. महाराष्ट्र लॉन टेनिस संघ के पास करीब 20 मत थे

TENNIS: इसलिए आईटीए ने किया अपने संविधान में संशोधन

टेनिस की प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

खेल संहिता के अनुरूप ढालने की कवायद में अपने संविधान में एक बड़ा संशोधन करते हुए राष्ट्रीय टेनिस महासंघ एआईटीए ने आजीवन अध्यक्ष और आजीवन उपाध्यक्ष के पद हटाते हुए मतदान की प्रक्रिया में भी बदलाव किया है. एआईटीए ने संयुक्त सचिवों की संख्या दो से बढाकर चार कर दी है. एआईटीए ने सोमवार को आमसभा की आनलाइन विशेष बैठक में यह फैसला लिया. महासंघ के महासचिव हिरण्यमय चटर्जी ने बताया, ‘हमें सरकार के दिशा निर्देशों और खेल संहिता का पालन करना है. हम मतदान के लिये आईटीएफ के तरीके का पालन करते थे लेकिन सरकार एकरूपता लाना चाहती है और हमें उससे गुरेज नहीं है.'

अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ की मतदान प्रक्रिया के अनुसार एआईटीए ने अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों को अधिक मत दिये थे जिससे एमएसएलजीए, केएसएलजीए और टीएनटीए की भूमिका चुनाव में दूसरों से महत्वपूर्ण होती थी. महाराष्ट्र लॉन टेनिस संघ के पास करीब 20 मत थे चूंकि वह देश के एकमात्र एटीपी 250 टूर्नामेंट के अलावा एक एटीपी चैलेंजर, डब्ल्यूटीए टूर्नामेंटों और आईटीएफ फ्यूचर्स टूर्नामेंटों की मेजबानी करता है.

इसी तरह तमिलनाडु और कर्नाटक लॉन टेनिस संघ के पास भी अधिक मत थे चूंकि वहां कई चैलेंजर टूर्नामेंट होते हैं. अब एआईटीए ने ‘एक राज्य एक मत' व्यवस्था अपना ली है जिससे सभी सदस्यों को बराबर का मताधिकार होगा. एआईटीए के 28 पूर्णकालिक सदस्यों के पास मतदान का अधिकार है. खेल मंत्रालय ने जब आजीवन अध्यक्ष पद को खेल संहिता का उल्लंघन बताया था , तब एआईटीए को अनिल खन्ना, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और एस एम कृष्णा को पद से हटाना पड़ा था. मंत्रालय ने मार्च में इस संबंध में पत्र जारी किया था और महासंघ ने इन पदों को हटाने पर सहमति जताई थी.

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