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गोरखपुर: BRD मेडिकल कालेज में 35 और बच्चों की मौत, मृतक बच्चों की संख्या 1304 हुई

गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस साल अब तक यहां 1304 बच्चों की मौत हो चुकी है.

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गोरखपुर:  BRD मेडिकल कालेज में 35 और बच्चों की मौत, मृतक बच्चों की संख्या 1304 हुई

गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है (फाइल फोटो)

गोरखपुर: गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस साल अब तक यहां 1304 बच्चों की मौत हो चुकी है. उधर, बच्चों की मौतों के मामले में स्थानीय अदालत ने सात लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं.

मेडिकल कालेज में बीते 48 घंटे के दौरान 35 बच्चों की मौत के मामले आए हैं. इस साल अब तक कुल 1304 बच्चों की मौत हो चुकी है. जांच अधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य राजीव मिश्र और उनकी पत्नी पूर्णिमा शुक्ला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के एक दिन बाद अपर सत्र न्यायाधीश शिवानंद सिंह ने एफआईआर में नामित नौ लोगों में से सात के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया.

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वारंट एईएस वार्ड के प्रभारी कफील खान, एनेस्थीसिया के डा सतीश, फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल, लेखाकार सुधीर पाण्डेय, सहायक क्लर्क संजय कुमार और गैस आपूर्तिकर्ता उदय प्रताप सिंह एवं मनीष भंडारी के खिलाफ जारी हुआ है. नोडल अधिकारी रहे खान को पहले ही पद से हटा दिया गया है.

बच्चों की मौत के बाद डाक्टर दंपत्ति सहित नौ लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किये गये थे. इस बीच, मेडिकल कालेज के नवनियुक्त प्राचार्य डा. पीके सिंह ने बताया कि 31 अगस्त को 16 बच्चों की मृत्यु हो गयी, जबकि 19 अन्य बच्चों की 1 सितंबर को एनआईसीयू, जनरल एवं इंसेफेलाइटिस वार्डों में मौत हो गयी. सिंह ने बताया कि जनवरी में 152 बच्चों की मौत हुई. फरवरी में 122, मार्च में 159, अप्रैल में 123, मई में 139, जून में 137, जुलाई में 128 और अगस्त में 325 बच्चों की मौत हुई.

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पूर्व प्राचार्य मिश्र और उनकी पत्नी को ​उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने मंगलवार को कानपुर से गिरफ्तार किया गया था. उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया गया और अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. मिश्र को मेडिकल कालेज के​ प्रिंसिपल पद से 12 अगस्त को निलंबित कर दिया गया था. हालांकि उन्होंने बच्चों की मौत की घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उसी दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. आरोप हैं कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा के कारण हुई क्योंकि आपूर्तिकर्ता को कई महीनों से भुगतान नहीं किया गया था.

उत्तर प्रदेश सरकार ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की बात से इंकार किया लेकिन मुख्य सचिव राजीव कुमार की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय जांच समिति ने मिश्र और अन्य पर लापरवाही और अन्य आरोप लगाये. मिश्र पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने अस्पताल को आक्सीजन गैस आपू​र्तिकर्ता का भुगतान समय पर नहीं किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुख्य सचिव द्वारा सौंपी गयी रिपोर्ट के आधार पर डाक्टर दंपति के खिलाफ कार्रवाई की गयी. योगी ने 12 अगस्त को उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था.
 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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