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वार्डन ने मासिक धर्म की जांच के लिए स्कूल में 70 लड़कियों को कथित रूप से निर्वस्‍त्र होने पर मजबूर किया

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खास बातें

  1. मामला सामने आने के बाद आरोपी महिला वार्डन को निलंबित कर दिया गया
  2. हालांकि प्रधानाचार्या ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है
  3. जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं
मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध पर लगाम लगती नहीं दिख रही है. ताज़ा मामला मुज़फ़्फ़रनगर के खतौली के तिगरी गांव का है जहां एक स्कूल के हॉस्टल में छात्राओं को बेलिबास कर घंटों क्लास में बिठाए रखने का मामला सामने आया है. इस स्कूल के हॉस्टल की वार्डन ने 70 लड़कियों को निर्वस्त्र होकर कक्षा में बैठने के लिए मजबूर किया. स्कूल के बाथरूम में खून के धब्बे दिखाई देने के बाद वार्डन ने छात्राओं को सजा देते हुए और यह पता करने के लिए कि किस छात्रा का मासिक धर्म चल रहा है, यह शर्मनाक कृत्य किया. इस हरकत से गुस्से में आए छात्राओं के अभिभावकों ने मामले की शिकायत राज्य सरकार से की है और वार्डन पर कार्रवाई करने की मांग की है.

जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रकेश यादव के अनुसार कस्तूरबा गांधी रेसिडेंशियल स्कूल की छात्राओं के अभिभावकों की ओर से की गई शिकायत में कहा गया है कि लड़कियों को वार्डन द्वारा सिर्फ अपमानित ही नहीं किया गया, बल्कि यह धमकी भी दी गई कि अगर उन्होंने उनके आदेश नहीं माने तो इससे भी बदतर सजा दी जाएगी.
मामला सामने आने के बाद आरोपी महिला वार्डन को निलंबित कर दिया गया. घटना के बाद से छात्राओं और उनके परिजनों में रोष है. कई अभिभावक अपनी बच्चियों को हॉस्टल से घर ले गए और सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं. पीड़िताओं के परिवार वालों की ओर से दायर शिकायत के अनुसार डिगरी गांव के कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल की छात्राओं से गुरुवार को प्रधानाचार्या ने जबरन कपड़े उतरवाए. जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी चंदर केश यादव में बताया कि प्रधानाचार्या ने कथित तौर पर छात्राओं को उसकी बात न मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी. उन्होंने बताया कि मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

एक छात्रा ने कहा, ‘‘वहां कोई अध्यापक नहीं था. हमें छात्रावास से नीचे बुलाया गया. मैडम ने हमें कपड़े उतारने को कहा और ऐसा न करने पर उन्होंने हमें पीटने की बात कही. हम बच्चें हैं हम क्या कर सकते थे? अगर हम उनका कहना नहीं मानते तो वह हमें पीटती.’’

हालांकि प्रधानाचार्या ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें किसी ने कपड़े उतारने को नहीं कहा. यह स्टाफ की मेरे खिलाफ साजिश है क्योंकि वे नहीं चाहते कि मैं यहां रहूं. मुझे यह देखने को कहा गया था कि स्टाफ अपना काम कर भी रहा है या नहीं. मैं सख्त हूं इसलिए वे मुझसे नफरत करते हैं.’’ प्रधानाचार्या के उत्पीड़न करने की खबर फैलने के बाद 65 छात्राओं में से 35 स्कूल छोड़कर चली गईं. यादव ने कहा कि कई और छात्राओं ने भी ऐसी ही शिकायत की है. मामले की जांच की जा रही है.

(इनपुट भाषा से...)


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