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नोटबंदी के एक साल बाद वाराणसी के इस कैशलेस गांव में आज होती है सिर्फ नगद लेनदेन

वाराणसी का मिसिरपुर गांव को नोटबंदी के बाद 21 दिसंबर 2016 को कैशलेस गांव घोषित किया गया था. गांव में बैंक तो नहीं है पर बैंकिंग सेवा केंद्र जरूर है. इसी बैंकिंग सेवा केंद्र की पहल पर गांव के छोटे—मोटे दुकानदार से लेकर किसान और गांव वाले कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए एटीएम और  दुकानदार को स्वैपिंग मशीन दी गई थी.

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नोटबंदी के एक साल बाद वाराणसी के इस कैशलेस गांव में आज होती है सिर्फ नगद लेनदेन

21 दिसंबर 2016 को कैशलेस गांव घोषित किया गया था

वाराणसी का मिसिरपुर गांव को नोटबंदी के बाद 21 दिसंबर 2016 को कैशलेस गांव घोषित किया गया था. गांव में बैंक तो नहीं है पर बैंकिंग सेवा केंद्र जरूर है. इसी बैंकिंग सेवा केंद्र की पहल पर गांव के छोटे—मोटे दुकानदार से लेकर किसान और गांव वाले कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए एटीएम और  दुकानदार को स्वैपिंग मशीन दी गई थी. योजना के शुरुआत में ये बेहद उत्सुक नजर आए. लेकिन 11 महीने बाद नोटबंदी की सालगिरह पर जब एक बार फिर एनडीटीवी की टीम कैशलेश का जायजा लेने पहुंची तो ये मुहीम पूरी तरह ख़त्म नजर आई. दुकानदारों की स्वैपिंग मशीन पॉलीथिन में पैक करके रख दी गई और हर लेन देन नगद हो रहा है. 

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मिसिरपुर गांव की आशा देवी

तस्वीर में पकौड़ी ताल रहीं आशा देवी हैं. बीते 3 जनवरी को आशा देवी ऐसे ही पकौड़ी तल रहीं थी.  तब इस पकौड़ी के स्वाद को कैशलेस लेनदेन की चटनी ने दोगुना कर दिया था. आशा देवी भी बड़े मजे से स्वैपिंग मशीन से पकौड़ी लेने वालों के एटीएम से पैसे ले रही थी. चेहरे पर एक नई तरह की ख़ुशी थी,  लेकिन आज 11 महीने बाद आशा देवी की दुकान वही है. कढाही में भी वैसी ही पकौड़ी तल रही है  पर कैशलेस के नाम पर आशा देवी के चेहरे पर न तो वो खुशी है और न ही कोई कैशलेस लेनदेन कर रहा है. ये लेनदेन सिर्फ चंद दिन ही चल पाया. लिहाजा आशा देवी की स्वैपिंग मशीन आज दुकान के आलमारी में पॉलीथिन में बंद है. कैशलेस न करने के सवाल पर आशा देवी बड़ी बेरुखी से बताती हैं. अब नाही 2 रुपिया, चार रुपिया के लोग करा रहे हैं इसीलिए बंद हो गया (पैच) पैसा हमारा कट गया तो बंद कर दिए. पहले लोग कहे थे इससे फायदा होगा लेनदेन होगा तो लेनदेन में लेने ही लगे हमारे घर से जाने लगा तो बंद कर दिये.  

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मिसिरपुर गांव में जिस जगह कैशलेस गांव का बोर्ड लगा है. उसी से कुछ कदम आगे सूर्य प्रकाश देव की स्टेशनरी और गिफ्ट की दुकान है. सूर्य प्रकाश को भी बैंक ऑफ बड़ौदा ने स्वैपिंग मशीन दी थी.  उन्होंने शुरू 48 रुपये तक का कैशलेस लेनदेन किया भी लेकिन फिर बाद में बंद कर दिया. उनकी मशीन में आखिरी ट्रांजेक्शन की रसीद में 11 रुपये की है. सूर्य प्रकाश को बैंक ने एटीएम भी दिया जिससे कि वो स्वैप किये गए पैसे को निकाल सके, लेकिन उस एटीएम का पिन इन्हे नहीं मिला जिससे उन्होंने कैशलेस ट्रांजेक्शन ही बंद कर दिया. पूछने पर बड़े तल्ख अंदाज में सूर्य प्रकाश नारायण सिंह बताते हैं कि कैशलेस मैंने 45 या 75 रुपये का किया होगा उसके बाद हमको पिन कोड नहीं मिला कोई प्रॉफिट नहीं समझ में आया तो बंद कर दिया. मान लीजिये कि हमने हजार पांच सौ का सामान का पैसा कैशलेस लिया उसके बाद खरीददारी करने बाज़ार गए लेकिन एटीएम का पिन ही नहीं मिला तो हम वहां कैसे एटीएम से पैसा ले पाएंगे ये सबसे बड़ी हमारी समस्या है.

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कैशलैस हुए मिसिरपुर गांव में हर दुकानदार के पास कैसलेश लेनदेन को लेकर कई समस्याएं हैं. आशा देवी और सूर्य प्रकाश की तरह ही गांव के बीज के दुकानदार शशि सिंह ने भी पीओएस मशीन ली थी.  मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाने वाले राज कुमार, किराना की दुकान चलाने वाले विजय कुमार, दर्जी का काम करने वाले कैलाश पटेल सभी स्वैपिंग मशीन का प्रयोग कर रहे थे. सबकी की दुकान के बाहर ई पेमेन्ट शॉप का बोर्ड भी लगा है, लेकिन सभी सिर्फ दो चार ट्रांजेक्शन ही उससे किए और बाद में बंद कर दिया. आज हर किसी की स्वैपिंग मशीन धूल फांक रही है. टेलर कैलाश ने सबसे ज़्यादा 2300 रुपये का ट्रांजेक्शन किया था जिसमे से उनका 1300 रुपये काट गया जिसके बाद से उन्होंने स्वैपिंग बंद कर दी. 


मिसिरपुर गांव में प्रॉपर बैंक नहीं बल्कि बैंक ऑफ बड़ौदा की बैंकिंग सेवा केंद्र है. 3500 के इस गांव में बैंक ने एटीएम के 634 फार्म पिछले साल भरवाये गये थे, जिसमे से ज़्यादातर यहां लोगों को मिले नहीं हैं. गांव के 34 दुकानदारों में से 21 को स्वैपिंग मशीन दिए गए थे, जिसके बाद बड़े जोरशोर से कार्यक्रम करके 21 दिसंबर को इस गांव को कैशलेस घोषित किया गया था, लेकिन उसके बाद इनकी समस्याओं को सुनने के लिये भी बैंक के अधिकारी नहीं आए. बैंक जाने पर भी इनकी सुनवाई नहीं हुई और अब जब एक साल होने पर ये गांव मीडिया के निगाह पर आया तो बैंक के अधिकारी आकर बता गए की आधारकार्ड से जुड़ा अंगूठा वाला स्वैपिंग मशीन देंगे.  


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