उत्तर प्रदेश : दलित दूल्हे को घोड़े पर नहीं बैठने देना चाहते गांव के दबंग

गांव के दबंगों का कहना है कि दलित की बारात उनके घरों के पास से होकर गुज़रे यह उनको मंजूर नहीं है.

उत्तर प्रदेश : दलित दूल्हे को घोड़े पर नहीं बैठने देना चाहते गांव के दबंग

दलित दूल्हे की बारात के लिए प्रशासन ने रास्ता तय किया है

खास बातें

  • हाथरस से कासगंज जाएगी बारात
  • प्रशासन ने तय किया रास्ता
  • दबंगों ने किया है विरोध
लखनऊ:

यूपी के कासगंज के एक गांव के लोग दलित दूल्हे को बारात लेकर जाने का रास्ता नहीं दे रहे हैं. उनका कहना है कि इससे गांव की परंपरा टूट जाएगी. इस गांव के दबंगों का कहना है कि दलित की बारात उनके घरों के पास से होकर गुज़रे यह उनको मंजूर नहीं है. मिली जानकारी के मुताबिक बारात हाथरस से आनी है. दूल्हे का नाम संजय जाटव है.  यही नहीं वो यह भी तय कर रहे हैं कि बारात लंबी चौड़ी न निकले और लड़की के घर से 80 मीटर की दूरी पर शादी हो. उस गांव में 90 फीसदी सवर्ण है और 10 फीसदी दलित. जब हमारी टीम ने वहां जाकर मामले की जानकारी ली तो हैरान करने वाली बात सामने आई. गांव के दंबंगो का कहना है कि यहां पर कभी किसी दलित जाति के दूल्हा घोड़े पर नहीं बैठा है.  

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वहीं प्रशासन भी इस मामले में टकराव टालने की कोशिश में दंबगों के सामने झुकता नजर आ रहा है. दूल्हा घोड़े पर ही चढ़कर जाएगा लेकिन बारात का रास्ता तय कर दिया गया है. डीएम आरपी सिंह ने यह जानकारी दी है. साथ ही यह भी तय किया गया है कि दुल्हन के घर से 500 मीटर की दूरी पर वह दूल्हा घोड़े पर बैठ सकेगा. बाकी कार्यक्रम एक खेत में होंगे. 

वीडियो : पुलिस की सुरक्षा में दूल्हा
हालांकि यह पहला मामला नहीं है जिसमें किसी दलित के घोड़े पर बैठने पर सवर्ण जाति के लोगों ने आपत्ति जताई हो. इससे पहले भी इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा. इन मामलों के सामने आने के बाद इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज के दौर में भी समाज में जातिवाद और अगड़े-पिछड़े की मानसिकता किस तरह से लोगों के दिमाग में हावी है.

 
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