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'तीन-पांच' के सियासी खेल में आखिरकार पिछड़ी RLD, हरसंभव प्रयास भी नहीं दे पाई मनचाहा नतीजा

लोकसभा चुनाव को लेकर सपा-बसपा (SP-BSP Alliance) के बीच सीटों का बंटवारा होने के बाद आरएलडी को तीन सीटें मिलीं.

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'तीन-पांच' के सियासी खेल में आखिरकार पिछड़ी RLD, हरसंभव प्रयास भी नहीं दे पाई मनचाहा नतीजा

अखिलेश यादव और जयंत चौधरी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव 2019 ( Lok Sabha Election 2019) के मद्देनजर यूपी की सियासत में सपा-बसपा गठबंधन से मनचाहा सीट पाने की राष्ट्रीय लोकदल इच्छा दम तोड़ चुकी है. अंत-अंत तक मनचाहा सीट पाने की इच्छा रखने वाली आरएलडी को आखिरकार सपा-बसपा गठबंधन में महज तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ा. राष्ट्रीय लोकदल लोकसभा चुनाव में बसपा-सपा गठबंधन से चार से पांच सीट चाहती थी, मगर मायावती और अखिलेश यादव के गठबंधन में उसकी यह मुराद पूरी नहीं हो पाई और अब वह महज तीन सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतार सकती है.  

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दरअसल, लोकसभा चुनाव को लेकर सपा-बसपा (SP-BSP Alliance) के बीच सीटों का बंटवारा होने के बाद आरएलडी को तीन सीटें मिलीं, वहीं सपा 37 और बसपा 38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. राष्ट्रीय लोकदल को पश्चिमी यूपी की मथुरा, मुजफ्फरनगर और बागपत सीट मिली है, जहां से आरएलडी के तीन उम्मीदवार अपनी किस्तम आजमा सकते हैं. उम्मीद की जा रही है कि मुजफ्फरनगर से अजीत सिंह और बागपत से जयंत चौधरी चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि, मथुरा से कौन होगा आरएलडी का उम्मीदवार अब तक इसके कोई संकेत नहीं हैं. 

सपा और बसपा के गठबंधन में शुरू से ही आरएलडी की यह कोशिश रही की कम से कम उसे पांच सीटें मिले. शुरू में आरएलडी ने सपा-बसपा गठबंधन से 5 सीटों की मांग की थी, जबकि सपा-बसपा गठबंधन शुरू से ही आरएलडी को तीन सीटें देने को तैयार था. आरएलडी ने इन पांच सीटों की मांग की थी- हाथरस, कैराना, बागपत, मुज़फ़्फरनगर और कैराना. हालांकि, उसे महज तीन सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. 

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मंगलवार को अखिलेश यादव ने सहयोगी पार्टी आरएलडी को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि हम आरएलडी को इस चुनाव में तीन सीट दे रहे हैं. इस ऐलान के बाद आरएलडी के नेता जयंत चौधरी ने कहा कि RLD उत्तर प्रदेश में तीन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि RLD उत्तर प्रदेश में BSP-SP गठबंधन में शामिल होगी. हमारे कार्यकर्ता अथक परिश्रम करेंगे, ताकि राज्य की हर सीट पर गठबंधन की जीत सुनिश्चित हो सके.

राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी रही कि शुरू में तो अखिलेश यादव अपने कोटे से आरएलडी को कुछ और सीटें देने को तैयार भी थे, मगर मायावती अपने फैसले पर अडिग थीं. जब ऐसी हवा चली कि आरएलडी सपा-बसपा गठबंधन में मनमुताबिक सीट नहीं मिलने पर अलग हो सकती है तो अखिलेश यादव ने अपने कोटे से कुछ सीटें देने की भी बात कही. मगर फिर बाद में यह साफ हो गया कि सपा और बसपा में से कोई भी आरएलडी को तीन से ज्यादा सीटें नहीं देगी. 

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लेकिन तीन-पांच के इस सियासी खेल में आखिरकार जयंत सिंह और अजित सिंह बाजी नहीं जीत पाए और उन्हें बसपा-सपा गठबंधन में महज तीन सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. हालांकि, चार से पांच सीटों के लिए आरएलडी ने हर संभव कोशिश की. इसके लिए अखिलेश यादव से कई बार जयंत सिंह ने बातचीत भी की. मगर किसी तरह की कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी. बता दें कि मायावती की पार्टी बसपा और अखिलेश यादव की पार्टी सपा बराबर-बराबर सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी.

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