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वाराणसी के अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के एक अस्पताल में पिछले छह महीने में ऑक्सीजन कथित तौर पर उपलब्ध नहीं होने से हुई मौतों पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा.

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वाराणसी के अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार से मांगा जवाब

6 महीनों के दौरान वाराणसी के एक अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है

वाराणसी: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के एक अस्पताल में पिछले छह महीने में ऑक्सीजन कथित तौर पर उपलब्ध नहीं होने से हुई मौतों पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा. उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि पिछले छह महीने में वाराणसी के एक अस्पताल में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की वजह से 50 से अधिक लोगों की मौत हुई.

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न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति अमर सिंह चौहान की खंडपीठ ने भुवनेश्वर द्विवेदी की जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया और राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा. अदालत ने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 27 अक्तूबर तय की.

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याचिकाकर्ता की ओर से जिरह करते हुए अधिवक्ता केके राय और चार्ली प्रकाश ने आरोप लगाया कि मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से सर सुंदरलाल अस्पताल में 50 से अधिक लोगों की जानें चली गईं. यह अस्पताल बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से संबद्ध है.

इन अधिवक्ताओं ने यह आरोप भी लगाया कि मेडिकल ऑक्सीजन की किल्लत के मद्देनजर इस अस्पताल के डाक्टर गंभीर स्थिति के मरीजों को औद्योगिक गैसें दिलाते रहे हैं जिससे ये मौतें हुईं. यह जनहित याचिका ऐसे समय में दायर की गई है जब इस महीने की शुरुआत में गोरखपुर में एक अस्पताल में 30 से अधिक बच्चों की मौतें हुई हैं.

(इनपुट भाषा से)

 


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