NDTV Khabar

बीएचयू में छात्र और छात्राओं में लैंगिक भेदभाव के आरोप, मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट भी याचिका पर सुनवाई को तैयार हो गया है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में हॉस्टल में छात्राओं के लिए बनाए नियमों को चुनौती दी गई है.

71 Shares
ईमेल करें
टिप्पणियां
बीएचयू में छात्र और छात्राओं में लैंगिक भेदभाव के आरोप, मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

नई दिल्ली: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी यानी BHU के महिला महाविद्यालय हॉस्टल में छात्राओं के साथ लैंगिक आधार पर भेदभाव का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट भी याचिका पर सुनवाई को तैयार हो गया है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में हॉस्टल में छात्राओं के लिए बनाए नियमों को चुनौती दी गई है.
 
याचिका में कहा गया है कि छात्राओं के लिए बनाए नियम के तहत लैंगिक आधार पर भेद भाव किया गया है. याचिका में कहा गया है कि छात्राओं को रात 8 के बाद हॉस्टल छोड़ने की इजाजत नही है यहाँ तक कि वो लाइब्रेरी में भी नही जा सकती. जबकि छात्रों को रात 10 बजे तक इजाजत है. छात्राओं को हॉस्टल के कमरे में वाई फाई लगाने की इजाज़त नही है. नियमों के मुताबिक छात्राओं अपने कमरे से बाहर सभ्य पोशाक में रहेंगी जबकि छात्रों के लिए कोई ड्रेस कोड नही है.

यह भी पढ़ें :  BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल में ऑपरेशन के बाद हुईं 9 मौतों को लेकर हड़कंप

याचिका में ये भी कहा गया है कि एक नियम ये भी है कि लड़कियां हॉस्टल में मांसाहार भोजन नही खा सकती और न ही वो किसी राजीतिक डिबेट का हिस्सा हो सकती है. लेकिन ये नियम लड़कों पर लागू नहीं है. लड़कियां रात 10 बजे के बाद मोबाइल फोन पर बात भी नही कर सकती. 
VIDEO: बीएचयू के छात्र और डॉक्टरों में भिड़ंत

वकील प्रशांत भूषण ने कुछ छात्राओं की ओर से इस मामले को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच के सामने रखा. प्रशांत भूषण  ने कोर्ट को बताया कि यदि कोई छात्रा किसी नियम का उल्लंघन करती है तो उसे हॉस्टल छोडने को कह दिया जाता है. याचिका में मांग की गई है कि MVV हॉस्टल की गाइडलाइन को छात्र हॉस्टल की तरह बनाए जाने के आदेश दिए जाएं.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement