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आर्मी पायलट कोर्स के दीक्षान्त समारोह में नए पायलटों का सम्मान

इलाहाबाद के वायु सेना स्टेशन के प्रारंभिक उड़ान प्रशिक्षण स्कूल (बीएफटीएस) में दीक्षान्त समारोह का आयोजन किया गया. यह आयोजन 199वें  आर्मी पायलट कोर्स के 25 सेना विमान चालकों के लिए था जिन्होंने अपना उड़ान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया.

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आर्मी पायलट कोर्स के दीक्षान्त समारोह में नए पायलटों का सम्मान

वायु सेना स्टेशन के बीएफटीएस में दीक्षान्त समारोह का आयोजन किया गया

इलाहाबाद: इलाहाबाद के वायु सेना स्टेशन के प्रारंभिक उड़ान प्रशिक्षण स्कूल (बीएफटीएस) में दीक्षान्त समारोह का आयोजन किया गया. यह आयोजन 199वें  आर्मी पायलट कोर्स के 25 सेना विमान चालकों के लिए था जिन्होंने अपना उड़ान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया. इन विमान चालकों ने पिछले पांच महीने के दौरान सख्त उड़ान तथा ग्राउंड प्रशिक्षण प्राप्त किया. 

बता दें कि वायुसेना का प्रारंभिक उड़ान प्रशिक्षण स्कूल एक बेहतरीन उड़ान प्रशिक्षण केन्द्र हैं. इसकी स्थापना पायलटों को एचपीटी-32 एयर क्राफ्ट पर आरम्भिक प्रशिक्षण देने के लिए 1987 को की गई थी. वर्ष 1999 को इस स्कूल की भूमिका में बदलाव आया जिससे इसकी भूमिका भारतीय वायु सेना के पायलट कैडेट के प्रशिक्षण के साथ भारतीय सेना, नौसेना तथा तटरक्षक के अधिकारियों को भी प्रशिक्षण देना शामिल किया गया. आर्मी अधिकारियों को हेलीकाप्टर पर आरम्भिक उड़ान प्रशिक्षण  देने के लिए 2005 में इस स्कूल को चीता हेलीकाप्टर से लैस किया गया.

दीक्षान्त समारोह के दौरान एयर मार्शल डीएस रावत ने प्रमाणपत्र तथा प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट कार्य के लिए ट्रॉफी प्रदान की. कैप्टेन मनिन्दर पाल सिंह को फ्लाइंग में सर्वोत्तम होने की ट्रॉफी प्रदान की गई. कैप्टेन गगनदीप सिंह को फस्ट इन ओवर आल मेरिट की ट्रॉफी प्रदान की गई तथा कैप्टेन गगनदीप सिंह को ग्राउंड सब्जेक्ट में सर्वोत्तम होने की ट्रॉफी प्रदान की गई. स्क्वाड्रन लीडर टीडी शर्मा को उत्तम इंस्ट्रक्टर ट्रॉफी प्रदान की गई. 

इस मौके पर  एयर मार्शल डीएस रावत ने इस बात पर जोर दिया कि मिलिट्री एविएशन काफी मुश्किल हो गया है. तकनीक में बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है. हमें इस बदलाव को बखूबी अपनाना है ताकि हम किसी से पीछे ना रहें. उन्होंने कहा कि भविष्य में पायलट ही ऑपरेशन के दौरान अग्रिम पंक्ति में होंगे. उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि मिलिट्री विमान चालकों के लिए गलती की कोई गुंजाईश नहीं है. इसलिए उनके प्रशिक्षण के स्तर को सर्वोत्तम बनाने की कोशिश हमेशा होती रहनी चाहिए. 
 


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