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अयोध्या में जलियांवाला बाग नरसंहार की याद में 'अवाम का सिनेमा' का फेस्टिवल

तीन दिन का 12वां अयोध्या फिल्म फेस्टीवल 9 अगस्त से 11 अगस्त तक, उत्सव में खिंची चली आती हैं दिग्गज हस्तियां

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अयोध्या में जलियांवाला बाग नरसंहार की याद में 'अवाम का सिनेमा' का फेस्टिवल
नई दिल्ली:

अवाम का सिनेमा जलियांवाला बर्बर हत्याकांड के शताब्दी वर्ष पर 12 वें फिल्म महोत्सव का आयोजन कर श्रद्धांजलि अर्पित करेगा. आयोजन डॉ राममनोहर लोहिया, अवध विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के  फैज़ाबाद ज़िले के संत कबीर सभागार में 9 अगस्त  2018 से 11 अगस्त  2018 तक चलेगा. उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्विद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित करेंगे.

उद्घाटन समारोह में प्रसिद्ध फिल्म लेखक व निर्देशक डा. इकबाल दुर्रानी,  प्राख्यात दस्तावेजी फिल्म निर्माता डा. राजीव श्रीवास्तव, मशहूर गजल गायक डॉ गजल श्रीनिवास, अवधी विरासत की लोक गायिका इन्द्रा श्रीवास्तव आदि प्रमुख हस्तियां शिरकत करेंगी. संचालन नंदीग्राम डायरी के लेखक पुष्पराज करेंगे. मीराबाई के पदों को ऊर्दू शायरी में ढालने वाले शायर हाशिम रजा जलालपुरी, काकोरी केस के नायक रामकृष्ण खत्री के सुपुत्र उदय खत्री और विदेशी जेलों में बंद भारतीयों को वतन लाने में मदद करने वाले रियल बजरंगी भाईजान के नाम से मशहूर आबिद हुसैन को सम्मानित किया जाएगा. 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में अंग्रेजों ने नरसंहार किया था.
 
अवाम का सिनेमा के संस्थापक शाह आलम ने एनडीटीवी को बताया की उद्घाटन समारोह में कई शख्सियतें आने को लेकर उत्साहित हैं जिसमें बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर, प्रोडूसर और लेखक डॉ इकबाल दुर्रानी भी हिस्सा लेने मुख्य रूप से मुंबई से अयोध्या पहुंच रहे हैं. डॉ इकबाल दुर्रानी लगभग तीन दर्जन फ़िल्में लिख और डायरेक्ट कर चुके हैं. उन्होंने कई महत्वपूर्ण किताब भी लिखी हैं. इसके इलावा 125 से अधिक भाषाओं में गाने वाले गजल गायक और तेलुगू फिल्म अभिनेता डॉ गजल श्रीनिवास हिस्सेदारी करेंगे. इन दिनों डा. गजल श्रीनिवास जालियांवाला बाग नरसंहार पर बन रहे तराने में शिद्दत से जुटे हुए हैं. इस गीत को कर्नल तिलकराज ने लिखा है जो कि शहीद वंशज हैं. अयोध्या फिल्म फेस्टिवल में यह डीवीडी रिलीज के बाद अमृतसर के जालियांवाला बाग स्मारक पर भी रिलीज की जाएगी.

 
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डॉ राजीव श्रीवास्तव हाल ही में लोकनायक जेपी पर बनी दस्तावेजी फिल्म स्क्रीनिंग के बाद दर्शकों से रुबरु होंगे. जालियांवाला नरसंहार को समेटे तीन दिवसीय आयोजन में सेमिनार, फोटो एवं पोस्टर प्रदर्शनी, कविता , पोस्टर प्रदर्शनी, पुस्तक विमोचन, अमर क्रांतिकारियों के वंशजों का सम्मान, नाटक, लोक गीत, झांकी, फीचर, लघु और दस्तावेजी फिल्मों की प्रदर्शनी, कविता पाठ, क्रांतिकारियों की जेल डायरी, तार और मुकदमें की फाइलों आदि के मार्फत संवाद किया जाएगा.


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सिलसिला जो चल पड़ा...
शाह आलम कहते हैं कि अवाम का सिनेमा के 13 साल कुछ कम नहीं होते, इसके सफरनामे की शुरुआत 28 जनवरी 2006 को अयोध्या से हुई थी. तब डॉ आरबी राम ने तीन सौ रुपये का आर्थिक सहयोग देकर कांतिवीरों की यादों को सहेजने की इस पहल का स्वागत किया था. अवाम का सिनेमा का आगे का रास्ता क्या हो? आजादी आंदोलन के योद्धा और कानपुर बम एक्शन के नायक अनंत श्रीवास्तव के सुझाव पर बना इसका संविधान. प्रसिद्ध और सरोकारी डिजाइनर अरमान अमरोही ने इसका लोगो बनाया. तेरह वर्षों में देश-दुनिया की बहुत सारी शख्सियतें इसकी गवाह बनीं, फिर भी वह दौर आसान न था. बावजूद इसके अयोध्या से लेकर चाहे चंबल का बीहड़ हो, राजस्थान का थार मरुस्थल या फिर सुदूर कारगिल, अवाम का सिनेमा पुरजोर तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए राजनीति, समाज सबकी सच्चाइयों को समाने लाने की कोशिश में लगातार लगा हुआ है.

स्पांसरशिप से परहेज
देश भर में अवाम का सिनेमा के 17 केन्द्र हैं जहां विविध आयोजन साल भर चलते रहते हैं. इसका आयोजन हमख्याल साथियों के श्रम सहयोग और जनसहयोग से होता रहा है और आगे भी हरहाल में यह कारवां अपने शुरुआती तेवर के साथ जारी रहेगा.

 
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लगातार आयोजनों की रही है हमेशा चर्चा...
13 वर्षों के इतिहास में देश भर में हुए सफल आयोजनों में देश सहित दुनियां के कई हिस्सों से सरोकारी हस्तियां अपने खर्चे से शामिल होकर हौसला बढ़ाती रही हैं. इसके इलावा क्रांतिकारियों से संबंधित दस्तावेज, फिल्म, डायरी, पत्र, तस्वीरें, तार, मुकदमें की फाइल आदि तमाम सामग्री गिफ्ट मिली हैं. गांव, कस्बों से लेकर, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों ने जहां निशुल्क कार्यक्रम स्थल दिया हैं, रुकने और भोजन का प्रबंध कर गौरवान्वित किया है. विभिन्न संगठनों ने जमीनी स्तर पर जनसहभागिता बढ़ाकर हौसला बढ़ाया है, तो वही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया ने अग्रिम सूचनाएं प्रसारित कर आयोजन को कामयाब बनाया है तो वही साथियों ने फेसबुक, ट्यूटर, पत्र, ईमेल, नुक्कड़ मीटिंग, चर्चा करके आयोजन की सूचना समाज से साझा करते रहे हैं तो वहीं कई ने क्रांतिकारियों पर लगातार लिखकर जागरूकता बढ़ाई है. साथ वीडियो, फोटो,दस्तावेजीकरण और प्रकाशन में आर्थिक और श्रम सहयोग देकर इस विरासत को आगे बढ़ाया है.


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