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गोडसे को महिमामंडित करने वाले नाटक की BHU ने नहीं दी इजाजत: जांच समिति

काशी हिंदू विश्वविद्यालय( बीएचयू) ने अपने वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव में नाथूराम गोडसे को महिमामंडित करने वाले नाटक के मंचन की इजाजत नहीं दी थी.

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गोडसे को महिमामंडित करने वाले नाटक की BHU ने नहीं दी इजाजत: जांच समिति

इस मामले की जांच करने के लिए गठित समिति ने उक्त बात कही है.

खास बातें

  1. गोडसे को महिमामंडित करने वाले नाटक की BHU ने नहीं दी इजाजत
  2. इस मामले की जांच करने के लिए गठित समिति ने उक्त बात कही है
  3. बीएचयू परिसर में पिछले महीने खूब हंगामा हुआ था
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय( बीएचयू) ने अपने वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव में नाथूराम गोडसे को महिमामंडित करने वाले नाटक के मंचन की इजाजत नहीं दी थी. इस मामले की जांच करने के लिए गठित समिति ने उक्त बात कही है. बीएचयू परिसर में पिछले महीने उस वक्त हंगामा हुआ था जब छात्रों के एक समूह ने दावा किया कि महोत्सव के दौरान महात्मा गांधी की छवि खराब करने और गोडसे को महिमा मंडित करने वाले नाटक का मंचन किया गया था. सोशल मीडिया पर नाटक की प्रस्तुति से जुड़ी वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद उन्होंने देशद्रोह का मामला दर्ज किये जाने की मांग के साथ पुलिस से संपर्क साधा. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से भी इसकी शिकायत की जिसके बाद इस मामले की जांच के लिये विश्वविद्यालय की तरफ से एक तथ्य अन्वेषी समिति गठित की गई थी. 

यह भी पढ़ें: बीएचयू में छेड़छाड़ और हिंसा का मामला: जांच रिपोर्ट में VC जीसी त्रिपाठी को क्लीन चिट

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समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा था कि बीएचयू अधिकारियों ने विश्वविद्यालय महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की स्क्रीनिंग के दौरान गोडसे पर एक छात्र की एकल प्रस्तुति को अयोग्य ठहरा दिया था. इसमें कहा गया, ‘‘ वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के चयन के लिये होने वाले प्रक्रिया के दौरान प्रतिभागियों ने अपनी पसंद के विषय पर अधिकतम पांच मिनट की प्रस्तुति दी थी.’’ रिपोर्ट में कहा गया कि आयोजकों या निर्णायकों को प्रतिभागियों द्वारा चुने गए विषय के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी. 

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इसमें कहा गया, ‘‘ स्क्रीनिंग के दौरान एक प्रतिभागी ने गोडसे पर पांच मिनट की एकल प्रस्तुति दी और निर्णायकों ने महोत्सव में चयन के लिये उसे अयोग्य ठहरा दिया.’’ जांच समिति ने जोर देकर कहा था पाया गया कि यह प्रस्तुति महज चयन प्रक्रिया के लिये थी और आयोजकों या निर्णायकों को विषय के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.


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