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पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करने वाले पी चिदंबरम के बदले सुर, कहा-ध्रुवीकरण से जीता उत्तर प्रदेश

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पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करने वाले पी चिदंबरम के बदले सुर, कहा-ध्रुवीकरण से जीता उत्तर प्रदेश

पी चिदंबरम ने इस बात का समर्थन नहीं किया कि चुनाव नतीजे नोटबंदी पर जनमत संग्रह हैं.

खास बातें

  1. चिदंबरम ने चुनाव परिणामों को नोटबंदी का जनमत संग्रह नहीं माना.
  2. यूपी में बीजेबी की जीत को वोटों का ध्रुवीकरण बताया.
  3. एक दिन पहले पीएम मोदी को कहा था प्रभावशाली शख्सियत.
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रभावशाली शख्सियत कहने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम के सुर बदल गए हैं. पी चिदंबरम ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सात चरणों का इस्तेमाल मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के लिए किया. मोदी को 'सबसे प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व' के तौर पर उभरने वाला बयान देने के एक दिन बाद चिदंबरम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हार की एक वजह मजबूत सांगठनिक ढांचे का नहीं होना है. चिदंबरम ने चुनाव प्रचार के दौरान दिए मोदी के ‘कब्रिस्तान एवं श्मशान’ वाले बयान का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव में इस तरह टिप्पणियों का इस्तेमाल किया गया.

उन्होंने कहा, 'उत्तर प्रदेश के पहले दो चरणों में अल्पसंख्यकों की मौजदूगी बड़ी थी और मोदी संभलकर बोले बाद में शैली बदल गई.'

'चुनाव परिणामों को नोटबंदी का जनमत संग्रह नहीं मानता'

पी चिदंबरम ने इस बात का समर्थन नहीं किया कि चुनाव नतीजे नोटबंदी पर जनमत संग्रह हैं. कहा कि चुनाव नतीजे राज्यसभा में भाजपा की सीटें बढ़ाएंगी और उच्च सदन में बहुमत होने पर एनडीए सरकार के लिए शेष अवधि में आर्थिक वृद्धि को तेज करने के लिए महत्वपूर्ण सुधार शुरू करना संभव होगा. दोनों सदनों में सरकार के पास बहुमत होने पर यह किसी भी विधेयक को पारित करने में सक्षम होगी, क्योंकि राजनीतिक अड़चनें नहीं रहेंगी.

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पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि असली सुधार के लिए बाजार में सरकार का अनावश्यक हस्तक्षेप रोकना, नौकरशाही का पुनर्गठन और एक नैतिक एवं न्यायसंगत समाज बनाना भी बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि शेष 24-27 महीनों में (सरकार के) हम नये सुधारों की पहचान कर सकते हैं और आर्थिक वृद्धि को तेज कर सकते हैं जो हमे फिर से आठ फीसदी की वृद्धि दर पर ले जाएगा.

उन्होंने दावा किया कि यूपीए सरकार ने 1991-96 और 2004-14 के बीच संख्या बल के अभाव के बावजूद सुधारों की पेशकश की थी. नोटबंदी पर चिदंबरम ने कहा कि इसे यूपी में भाजपा की जीत से जोड़ना एक बहुत सुविधाजनक निष्कर्ष होगा. कई अन्य कारणों ने भी चुनाव के दौरान भूमिका निभाई और यह नोटबंदी के कदम पर जनमत संग्रह नहीं था. चिदंबरम ने इन बातों को भी खारिज कर दिया है सारे जातीय समीकरण टूट गए. उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि जातीय समीकण हमेशा के लिए मिट गया. वर्ष 1971, 1980 और 1984 में भी ऐसी ही बातें कही गई थी.
 


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