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बुंदेलखंड: सूखे से जूझ रहे किसानों को अब 'राम' नाम का सहारा!

उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड को भले ही राज्य की योगी सरकार सूखाग्रस्त घोषित करने में आना-कानी कर रही हो, लेकिन यहां का किसान खुद को सूखाग्रस्त घोषित कर चुका है

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बुंदेलखंड: सूखे से जूझ रहे किसानों को अब 'राम' नाम का सहारा!

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. बुंदेलखंड में सूखे से जूझ रहे किसानों को अब 'राम' नाम का सहारा!
  2. यहां के किसान खुद को सूखाग्रस्त घोषित कर चुके हैं
  3. किसान बारिश के देवता इंद्रदेव को मनाने की कोशिश कर रहे हैं
बुंदेलखंड: उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड को भले ही राज्य की योगी सरकार सूखाग्रस्त घोषित करने में आना-कानी कर रही हो, लेकिन यहां का किसान खुद को सूखाग्रस्त घोषित कर चुका है. यही वजह है कि बरसात की आस में महोबा जिले के किसान पिपरामाफ गांव के कुष्मांडा धाम मंदिर में दीपावली से ही 'रामधुन' के भजन के जरिए बारिश के देवता इंद्रदेव को मनाने की कोशिश कर रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता जनक सिंह परिहार ने रविवार को बताया, "क्षेत्र में बरसात न होने से भूगर्भ जल का स्तर बहुत नीचे चला गया है. हैंडपंप और निजी नलकूपों से पानी निकलना बंद हो गया है, जिससे हजारों बीघे खेतों में रबी की बुआई नहीं हो पा रही है. आसपास के किसान दीपावली के दिन से ही पिपरामाफ के कुष्मांडा मंदिर में भगवान श्रीराम के नाम 'रामधुन' का अखंड कीर्तन कर रहे हैं."

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उन्होंने बताया कि 'रामधुन' के जरिए इंद्र देव को खुश करने की कोशिश की जा रही है, ताकि बारिश हो और किसान फसल की बुआई कर सकें. रामधुन कीर्तन में हिस्सा ले रहे किसान संतोष और गोविंद का कहना है कि जिले में सूखे जैसे हालात हैं, फिर भी राज्य सरकार इस जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं कर रही. उन्होंने बताया कि आसपास के गांवों के दस-दस किसानों की टोली बनाई गई है, जो अखंड रामधुन कीर्तन में भाग ले रहे हैं. इनका मानना है कि राम नाम का जप करने से भगवान इंद्र देव खुश होंगे और बरसात होगी.

VIDEO: बुंदेलखंड में लगातार तीन साल सूखे के बाद बाढ़
कुल मिलाकर सूखे का दंश झेल रहे किसानों को अब सरकार पर भरोसा नहीं रह गया और वे एक बार फिर 'ऊपर' वाले का सहारा लेने पर मजबूर हो गए हैं. यहां के किसान पिछले एक दशक से सूखे एवं अन्य दैवीय आपदाओं की भी मार झेल रहे हैं.


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