योगी और मौर्या के लिए इन वजहों से ये उपचुनाव बना सबसे बड़ी चुनौती

इन्हीं दोनों नेताओं को जनता ने यहां से जिताकर लोकसभा भेजा था और अब दोनों ही इस्तीफे के बाद राज्य की सत्ता में हैं.

योगी और मौर्या के लिए इन वजहों से ये उपचुनाव बना सबसे बड़ी चुनौती

सीएम योगी के साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या.

खास बातें

  • दोनों के लोकसभा से इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटें
  • दोनों को राज्य में सत्ता के शीर्ष पर बिठाया गया
  • दोनों ही अपने अपने पसंदीदा उम्मीदवार मांग रहे थे.
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में दो लोकसभा सीटों के लिए उपचुनावों की तारीखों का ऐलान भी हो चुका है और पार्टियों ने अपने अपने प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी है. यह अलग बात है कि यह जीत ज्यादा दिनों की नहीं होगी क्योंकि 2019 में फिर चुनाव होना तय है और कहा जा रहा है कि मोदी सरकार चुनाव इस साल के अंत तक चुनाव करने को तैयार है. बावजूद इसके यह चुनाव में सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के लिए 2017 फरवरी में पार्टी को मिली अपार सफलता के बाद पहली सबसे बड़ी चुनौती है. इन्हीं दोनों नेताओं को जनता ने यहां से जिताकर लोकसभा भेजा था और अब दोनों ही इस्तीफे के बाद राज्य की सत्ता में हैं. दोनों ही नेताओं ने पार्टी से अपने-अपने उम्मीदवारों को टिकट देने के लिए पूरा जोर लगाया था. पार्टी की बैठकों में अपने अपने उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा भी की, लेकिन पार्टी ने दोनों ही दिग्गज नेताओं के उम्मीदवारों को दरकिनार कर अपनी रणनीति के हिसाब से उम्मीदवारों का चयन कर लिया. 

नहीं मिले पसंदीदा उम्मीदवार
बताया जा रहा है कि दोनों ही नेता अपने अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर आश्वस्त थे क्योंकि वे इसी अपनी जीतहार के रूप में ले रहे थे. लेकिन अब जब पार्टी ने नए उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है, तब भी दोनों ही नेताओं को अपने अपने क्षेत्रों में अपनी पकड़ के सबूत के तौर पर पार्टी को दोनों ही सीटों पर जीत का तोहफा देना है. दोनों ही नेताओं को पार्टी ने सत्ता की बागडोर सौंपी है और इस लिए इन दोनों के कामकाज और जनता की स्वीकार्यता को इस जीत से जोड़ा जा रहा है. 

चुनाव से जुड़ी तारीखें
यूपी में दो लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव होने हैं. गोरखपुर लोकसभा सीट योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के कारण इस्तीफा देने और फूलपुर लोकसभा सीट उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के त्यागपत्र दिये जाने की वजह से खाली हुई हैं. इन सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान 11 मार्च को होना है. परिणाम 14 मार्च को घोषित होंगे.

कौन हैं बीजेपी उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उत्तर प्रदेश में गोरखपुर व फूलपुर संसदीय सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा हाल ही में की. पार्टी ने गोरखपुर से उपेंद्र शुक्ला व फूलपुर से कौशलेंद्र सिंह पटेल को उम्मीदवार बनाया है. पार्टी ने अपनी समझ से अगड़े-पिछड़े समीकरण को आगे बढ़ाते हुए प्रत्याशी उतारे हैं.

फूलपुर सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से मेयर रहे कौशलेंद्र सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाया है जबकि योगी के गढ़ गोरखपुर में पार्टी ने संगठन में अगड़ों के चेहरा उपेंद्र दत्त शुक्ला को उतारा है. कहा जा रहा है कि पूर्वांचल में कलराज मिश्रा के राजनीतिक संन्यास की ओर बढ़ने से भाजपा ब्राहमणों को आगे करने की अपनी अपनी रणनीति पर चल रही है. 

इधर, गोरखपुर के लिए हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली पसंद योगी कमलनाथ माने जा रहे थे, लेकिन संगठन ने इसे नजरअंदाज कर दिया. 

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सपा के प्रत्याशी
बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव के लिये अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. गोरखपुर से प्रवीण निषाद को पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया और फूलपुर सीट से नागेन्द्र प्रताप सिंह पटेल मैदान में उतारा है. प्रवीण ‘निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल’ (निषाद पार्टी) के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे हैं, जो सपा में शामिल हो गए हैं. वहीं, फूलपुर सीट से उम्मीदवार नागेन्द्र पटेल पूर्व में सपा की राज्य कार्यकारिणी में रह चुके हैं.

कांग्रेस के कैंडिडेट
कांग्रेस ने भी गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. पार्टी ने डॉक्टर सुरहिता करीम को गोरखपुर और मनीष मिश्रा को फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया है. सुरहिता जानी मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उन्होंने साल 2012 में गोरखपुर के महापौर पद का चुनाव भी लड़ा था, जिसमें वह दूसरे स्थान पर रही थीं.