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यूपी में मुठभेड़ों का मामला : कोर्ट ने कहा सिर्फ मीडिया रिपोर्ट पर कोई आदेश जारी नहीं होगा

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि इस मामले से जुड़े दस्तावेज दाखिल करें, PUCL द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई

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यूपी में मुठभेड़ों का मामला : कोर्ट ने कहा सिर्फ मीडिया रिपोर्ट पर कोई आदेश जारी नहीं होगा

सुप्रीम कोर्ट.

नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि इस मामले से जुड़े दस्तावेज दाखिल करें फिर हम मामले की सुनवाई करेंगे. कोर्ट ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट पर कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिवार की NHRC के सामने दाखिल शिकायतों को कोर्ट में दाखिल करने को कहा है. इसके बाद ही कोर्ट सुनवाई करेगा

उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ को लेकर दाखिल एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. पिछली सुनवाई में कोर्ट यूपी सरकार को नोटिस जारी किया था और यूपी सरकार ने हलफनामा दाखिल कर आरोपों को बेबुनियाद बताया था. कोर्ट में  PUCL द्वारा दाखिल याचिका में मांग की गई है कि राज्य में हुई पुलिस मुठभेड़ की सीबीआई या एसआईटी से जांच कराई जाए इसकी निगरानी कोर्ट करे.

पिछली सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि यह एक बहुत गंभीर मामला है. विस्तृत सुनवाई की जरूरत है. दरअसल मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं.


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याचिका में NGO ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पुराने बयानों को भी शामिल किया है जिनमें उन्होंने अपराधियों को गोली मारने की बात कही है. याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा NHRC को दिए गए आंकड़े के मुताबिक 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2018 तक मुठभेड़ में 45 लोगों की मौत हुई है जबकि सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध आंकड़े कहते हैं कि पिछले एक साल में 1100 मुठभेड़ों में 49 लोगों की मौत हुई और 370 लोग घायल हुए. याचिका में PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य में सुप्रीम कोर्ट के 2014 के फैसले का हवाला दिया गया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने मुठभेड़ की जांच के लिए गाइडलाइन जारी की थी.

याचिका में मांग की गई है कि इन सभी मामलों की सीबीआई या SIT से जांच कराई जाए. जांच की या तो सुप्रीम कोर्ट खुद निगरानी करे या फिर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज इसकी अगुवाई करें. पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा दिलाया जाए.


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