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यहां स्वस्थ रहने के लिये घर छोड़ने को मजबूर हैं बच्चे, कारण जान उड़ जाएंगे होश

बच्चों की नन्हीं उम्र में जब परिजन उन्हें आंखों से ओझल नहीं होने देते, ऐसे उम्र में बच्चों का बचपन घर से दूर रिश्तेदारों के घर में बीत रहा है.

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यहां स्वस्थ रहने के लिये घर छोड़ने को मजबूर हैं बच्चे, कारण जान उड़ जाएंगे होश

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. स्वस्थ रहने के लिये घर छोड़ने को मजबूर हैं बच्चे
  2. पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा होने के कारण घर छोड़ रहे हैं बच्चे
  3. यूपी के सोनभद्र की है खबर
सोनभद्र: बच्चों की नन्हीं उम्र में जब परिजन उन्हें आंखों से ओझल नहीं होने देते, ऐसे उम्र में बच्चों का बचपन घर से दूर रिश्तेदारों के घर में बीत रहा है. जनजातीय इलाके में शुमार सोनभद्र जिले के 269 गांवों के लोग बच्चों के जन्म के कुछ साल बाद ही उन्हें रिश्तेदारों के घर भेजने को मजबूर हैं. हालांकि, वह यह कदम खुशी-खुशी नहीं बल्कि मजबूरी में उठाते हैं. दरअसल, इन गांवों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा इतनी ज्यादा है कि इसे ज्यादा दिन तक इस्तेमाल करने वाला शख्स फ्लोरोसिस नाम की बीमारी का शिकार हो जाता है. इस बीमारी की जद में आए लोगों को जवानी में ही बुढ़ापे का दंश झेलना पड़ता है या फिर बाकी जिंदगी अपाहिज बनकर गुजारनी पड़ती है. 

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म्योरपुर ब्लॉक के कुसुम्हां, रोहनियादामर, कुड़वा समेत कई गांवों के हालात पर गैर करें तो पता चलता है कि यहां के पानी में फ्लोराइड की मात्रा बेहद ज्यादा है. इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग व जल निगम की तमाम जांच रिपोर्ट में भी हो चुकी है. जिले के 269 गांवों में अधिक मात्रा में फ्लोराइड वाले पानी के इस्तेमाल की वजह से यहां का पानी पीने वाले लोग फ्लोरोसिस की चपेट में आ जाते हैं. कुड़वा गांव के निवासी सीताराम कहते हैं कि फ्लोराइड युक्त पानी पीने से उनके गांव के अधिकांश लोग बिस्तर पकड़ चुके हैं.कुसुम्हा गांव के राम विलास ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को घर से दूर नहीं भेजा, नतीजतन, आज वह अपाहिजों की जिंदगी काटने को मजबूर है. 

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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, फ्लोरोसिस में सबसे पहले लोगों के दांत पीले होते हैं. बाद में वे कमजोर होकर टूटने लगते हैं. शरीर की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं. धीरे-धीरे व्यक्ति अपाहिज हो जाता है और खड़े होने लायक भी नहीं बचता. जिले में फ्लोराइड से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका चोपन ब्लाक का है. इसके बाद म्योरपुर, दुद्धी, बभनी और नगवां ब्लाक के कुछ गांव प्रभावित हैं. सीएमओ डा. एसपी सिंह ने बताया कि सेवा ट्रस्ट के जरिए कैंप लगाकर लोगों के इलाज की व्यवस्था की जा रही है. 

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इस मुद्दे पर शासन में भी चर्चा चल रही है. जल्द ही फ्लोरोसिस क्लीनिक की स्थापना जिले में की जाएगी.    


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