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गोरखपुर की गलती नहीं दोहराएगी कांग्रेस, यूपी उपचुनाव को लेकर लिया यह बड़ा फैसला

कांग्रेस नेता का कहना है कि कैराना लोकसभा उपचुनाव और नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है.

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गोरखपुर की गलती नहीं दोहराएगी कांग्रेस, यूपी उपचुनाव को लेकर लिया यह बड़ा फैसला

राहुल गांधी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. यूपी उपचुनाव से दूर रहेगी कांग्रेस
  2. गोरखपुर की गलती नहीं दोहराएगी कांग्रेस.
  3. कैराना और नूरपुर उपचुनाव से कांग्रेस अलग.
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश उपचुनाव में कांग्रेस ऐसा कुछ भी नहीं करने वाली है, जिससे महागठबंधन की संभावनाओं पर कोई बुरा असर पड़े. इस महीने के अंत में होने वाले कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस अपना कैंडिडेट नहीं उतारने जा रही है. इसकी वजह यह बताई जा रही है कि पार्टी इस कदम से विपक्ष के महागठबंधन की उम्मीदों को बढ़ाना चाहती है, ताकि इन दो सीटों पर बीजेपी को हराया जा सके. कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि इस कदम से इन दो सीटों पर बीजेपी को टक्कर देने के लिए विपक्ष के महागठबंधन की संभावनाओं में सुधार होगा. 

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गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के अंतिम समय में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन ने न सिर्फ बीजेपी को दोनों सीटों से हराया था, बल्कि दो दशक से सीएम योगी आदित्यनाथ का गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर की सीट पर भी सपा-बसपा गठबंधन ने जीत दर्ज की थी. यह अप्रत्याशित जीत ने विपक्ष के खेमे में उम्मीद की किरण पैदा की थी, और इससे यह स्पष्ट संकेत गया कि अगर विपक्ष अपने कार्ड सही से खेलता है तो वे 2019 में बीजेपी को हरा सकते हैं. 

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बता दें कि इसी सप्ताह बसपा प्रमुख मायावती ने एनडीटीवी से बातचीत में यह स्पष्ट कर दिया कि अखिलेश यादव के साथ उनका गठबंधन 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जारी रहेगा. हालांकि, उन्होंने कहा कि इस समझौते पर काम हो रहा है और जल्द ही इसके डिटेल्स साझा किये जाएंगे. 

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कांग्रेस नेता का कहना है कि कैराना लोकसभा उपचुनाव और नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है. पार्टी का कहना है कि दोनों सीटों पर ग्रैंड अलायंस की जीत हो इसलिए ये फैसला किया गया है. क्योंकि कई वहां के इलाकों में उसका बेस मजबूत नहीं है. 

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बता दें कि बीजेपी के सांसद हुकूम सिंह के निधन के बाद कैराना और लोकेंद्र चौहान की मौत के बाद नूरपुर की सीट खाली हो गई थी. इस उपचुनाव में बीजेपी ने हुकूम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को कैराना लोकसभा सीट से उतारा है, वहीं, लोकेंद्र चौहान की पत्नी अवनी सिंह को नूरपुर सीट से उतारा है. वहीं, विपक्ष के महागठबंधन ने अजीत सिंह की नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोकदल के तबस्सुम बेगम को कैराना लोकसभा सीट से और सपा के नैमूल हसन को नूरपुर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है. 

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हालांकि, कांग्रेस अभी तक औपचारिक रूप से इस गठबंधन का हिस्सा नहीं बनी है. इसी साल मार्च में हुए उपचुनाव में जहां बसपा-सपा ने एक साथ मिलकर कैंडिडेट उतारा था, वहीं कांग्रेस ने गोरखपुर और फूलपुर में अपना अलग कैंडिडेट खड़ा किया था. कैराना के नतीजे को एक अच्छा संकेतक के रूप में देखा जाता है कि विपक्षी एकता का यह टेम्पलेट कितना शक्तिशाली है. 2014 के चुनावों में, बीजेपी के हुकूम सिंह को करीब 50 फीसदी वोट मिले थे.

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