UP : कड़ी धूप में भी पस्त नहीं हुई हिम्मत, लॉकडाउन में घर जाने के लिए 500 KM की दूरी तय करने को मजबूर स्टूडेंट्स

छात्रों में शामिल गोलू मिश्रा ने कहा, "हमारे परिवार ने 14 अप्रैल तक गुजर बसर करने के लिए पैसे भेजे थे. हम बरेली में पीजी में रहते हैं और यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते है. हमारे सारे पैसे खर्च हो गए थे." 

UP : कड़ी धूप में भी पस्त नहीं हुई हिम्मत, लॉकडाउन में घर जाने के लिए 500 KM की दूरी तय करने को मजबूर स्टूडेंट्स

लॉकडाउन की वजह से 500 किमी दूर घर जाने को मजबूर छात्र

खास बातें

  • लॉकडाउन के बीच बरेली से निकले चार छात्र
  • 250 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचे लखनऊ
  • 350 किलोमीटर दूर वाराणसी में है घर
लखनऊ:

कोरोनावायरस लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) के चलते लोग विभिन्न स्थानों से घर आने के लिए पैदल चलने को मजबूर हैं. सरकार की ओर से मनाही के बावजूद अब भी लोग पैदल-पैदल सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं. ताजा मामला उत्तर प्रदेश के बरेली का है. यहां के रोहिलखंड यूनिवर्सिटी के कुछ छात्र एक बस्ते में कुछ कपड़े, बिस्कुट और पानी जैसी चीजें लेकर 500 किलोमीटर दूर अपने घर वाराणसी की ओर निकल पड़े. सुबह 11 बजे वे लखनऊ पहुंचे. इस समय सूरज सिर पर चढ़ा हुआ था और धूप तेज थी. 

इन स्टूडेंट्स ने बताया कि वे पिछले 24 घंटों का सफर तय करके बरेली से लखनऊ पहुंचे हैं. उन्होंने यह सफर पैदल और रास्ते में आने-जाने वाले वाहनों से लिफ्ट लेकर तय किया. बरेली से लखनऊ की दूरी करीब 250 किलोमीटर है. उन्हें 320 किमी की दूरी तय करके अपने घर वाराणसी जाना है. 

छात्रों में शामिल गोलू मिश्रा ने कहा, "हमारे परिवार ने 14 अप्रैल तक गुजर बसर करने के लिए पैसे भेजे थे. हम बरेली में पीजी में रहते हैं और यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते है. हमारे सारे पैसे खर्च हो गए थे." 

उसने बताया, "हमारे लिए कोई और विकल्प नहीं बचा है." मिश्रा ने कहा, "मैं एक दिहाड़ी मजदूरी करने वाले परिवार से ताल्लुक रखता हूं. मेरे घरवालों ने बड़ी मुश्किलों से मुझे पढ़ने के लिए भेजा है. वे मुझे और पैसे भेजेंगे अगर वे खुद कमा रहे होते, लेकिन लॉकडाउन की वजह से काम बंद है." बता दें कि कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने देशभर में लॉकडाउन लगाया हुआ है और लोगों से घर में रहने और यात्रा नहीं करने की अपील की है. लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है.

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एक अन्य स्टूडेंट शुभम सिंह ने कहा, "सरकार ने हमारी मदद की. एक वरिष्ठ अधिकारी ने हमें बरेली के पास हाईवे पर एक ट्रक में चढ़ा दिया. उन्होंने हमें बड़े शहरों में जाने से मना किया और राजमार्ग से जाने के लिए कहा. अन्य जगहों पर, कुछ अधिकारियों ने हमें पानी और भोजन दिया और हमसें सहानुभूति जताई. 

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